Friday, 18 April 2014

लोकसभा चुनाव 2014  

2014 का लोकसभा चुनाव कई मायनों में अहम है जहां बीजेपी की ओर गुजरात के मुख़्यमंत्री नरेंद्र मोदी पार्टी के  पीएम पद उम्मीदवार हैं जो अपनी  पार्टी को इस आम चुनाव में जीताने के लिए जी जान से लगे हुए हैं आय दिन जनसभाओं और रैलियों के जरिए जनता के बीच जाकर अपनी पार्टी की जीत के लिए लोगों से विकास के आधार पर  वोट मांग रहें हैं । नरेंद्र मोदी  पीएम पद के उम्मीदवार घोषित  होने के लिए जितना अपने विरोधियों से नहीं  लड़े उससे कही ज़्यादा अपनी ही पार्टी में उन्हे विरोध का सामना करना पड़ा इतने सारे विरोधों के बावज़ूद अंततह मोदी पार्टी के पीएम प्रत्याशी बने । ऐसे में 2014 लोक सभा चुनाव में अपनी पार्टी  को जीत दिलाना नरेंद्र मोदी के लिए एक चुनौती होगा लेकिन देश का मूड  देख कर ये नहीं कहा जा सकता कि  मोदी को इस चुनौती से पार पाने में कोई दिक्कत होगी पूरे देश में नरेंद्र मोदी की लहर हैं मोदी ने लोगों के मन में विकास का एक अलख जगाया है आज लोग मोदी में विकास की एक अद्भभूत अलख देखते हैं आज जनता महंगाई, भष्टाचार से त्रस्त हैं जिसे एक जनकल्याण करने वाली सरकार की दरकार  हैं ऐसा नहीं हैं कि मोदी रातोरात हर समस्या का सामाधान कर देंगे लेकिन गुजरात में हुए विकास से लोगों को काफ़ी उम्मीदें हैं।


2004 से कांग्रेस सरकार में है पिछले 10 सालों में कांग्रेस की सरकार ने अपने आप को महंगाई और भ्रष्टाचार का पार्यवाची के रूप में स्थापित कर लिया है एक से बढ़ कर एक घोटाले हुए। ये बात पूरी तरह से साफ़ है कि आज जनता में कांग्रेस विरोधी लहर  हैं इसकी वजह पिछले 10 सालों में कांग्रेस द्वारा जनविरोधी फ़ैसले लेना कांग्रेस नेताओं द्वारा अजीबों- गरीब बयान देना कांग्रेस द्वारा जनता को भूल्कड़-बेवकूफ बताना ये सारी वजहें कांग्रेस को 2014 के आम चुनावों में हराने के लिए काफ़ी है भाजपा अपने विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ रही हैं तो दूसरी ओर कांग्रेस जात-पात पर अपनी सियासत कर रहीं हैं संप्रादायिकता के नाम पर एक ख़ाससमुदाय को गुमराह कर रहीं हैं।  कांग्रेस मोदी और बीजेपी के नाम पर मुस्लिमों को हमेसा से डराती रही है । कांग्रेस बीजेपी और मोदी को संप्रादायिक बताती है पर वह 1969 में  कांग्रेस शासन का गुजरात दंगा और 1989 का भागलपुर दंगा भूल जाती है कांग्रेस पार्टी के युवराज राहुल गांधी भी बीजेपी को संप्रादायिक बताते है और ख़ुद 1984 के सिख दंगा के लिए अपनी ही पार्टी के नेताओं को जिम्मेदार मानते हुए भी उन्हे धर्मनिरपेक्ष मानते है

 कांग्रेस के अघोषित पीएम पद के उम्मीदवार राहुल गांधी संंप्रदायिकता को बढ़ावा  देने वालों को इस आम चुनावों  ना चुनने की जनता से लगातार अपील कर रहें हैं, लेकिन शायद युवराज भूल गए कि असम में  कोकराझार का दंगा हुआ जहां उनकी पार्टी  की सरकार  उनकी लंगड़ी सरकार को बाहर से समर्थन देनी वाली समाजवादी पार्टी सरकार के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश में सैकड़ों दंगे हुए जिसमें मुज़फ़्फ़रनगर का दंगा आज भी लोगों के जहन में जिंदा होगा बावज़ूद राहुल जी धर्मनिरपेक्ष हैं,  दोनों पार्टियां जीत के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रही हैं पर ये तो जनता को समझना हैं कि उसे किससे  ताकत मिल सकती हैं  अपनी ताकत को दिखाने वाले से या दूसरों की ताकत का लोहा मानने वालों से।

इस आम चुनाव में नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी की सिधी टक्कर हैं लेकिन 49 दिन की सरकार चलानी वाली "आप" को हल्के में नहीं ले सकते है।

आयदिन हो रहे सर्वेक्षणों में राजग की सरकार बनती दिखाया जा रहा हैं और  बंपर मतदान को देखते हुए कहा जा सकता हैं कि राजग की सरकार बनने जा रही हैं

 एक तरफ विकास हैं तो दूसरी ओर धर्मनिरपेछ का ढोंग । बहरहाल दोनों ही बड़े नेता अपनी-अपनी पार्टी की जीत का दावा कर रहे हैं


 लगातार राजनितिक विशलेषण के लिए पढ़ते रहिए "चौथा स्तंभ"

Sunday, 23 February 2014

नरेन्द्र मोदी की रैली


 भाजपा की विजय 'शंखनाद'


चार राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे काफ़ी हैरान कर देने वाले रहे जहां भाजपा के लिए नतीजें उम्मीद से बढ़कर रहें तो वही कांगेस के लिए इन नतीज़ो ने सिरदर्दी बढ़ा दी है। अंदरुनी कलह से जुझ रही भाजपा चार हिंदी भाषी राज्यों बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में बहुमत की  सरकार बनानें में क़ामयाब रही तो वही देश की राजधानी दिल्ली में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के रुप में उभरी। क्या इन नतीजों का ये मतलब निकाला जाए कि देश में नरेन्द्र मोदी की लहर हैं या सिर्फ़ इन चुनावों में मिली जीत का श्रेय यहां के स्थानीय नेताओं को दी जाए। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में जहां भाजपा जीत की हैट्रिक लगाने में क़ामयाब रही तो वही राजस्थान में पूर्ण जनादेश के साथ सत्ता पर काबिज़ हुई। लेकिन देश की राजधानी दिल्ली में 15 साल से सत्ता का बनवास झेल रही भाजपा राज्य में जीत का स्वाद ही नही चख़ा बल्कि सबसें बड़ी पार्टी बनकर उभरी लेकिन उसे एक बार फिर सत्ता के सिंहासन पर बैठने से बंचित रहना पड़ा। इसकी वजह हैं क़रीब 10 महीने पहले बनी नई पार्टी आम आदमी पार्टी। 70 सीटों वाली दिल्ली विधानसभा में भाजपा कों 31, आप को 28, कांग्रेस को 8, जबकी अन्य को 3 सीटें मीली हैं। भाजपा सबसें बड़ी पार्टी तो हैं पर उसके पास इतने नंबर नही वो दिल्ली में सरकार बना सकें। अगले 6 महीने में आम चुनाव के साथ कई राज्यों में विधानसभा के चुनाव भी होने हैं ऎसे में पार्टी में कोई जोख़िम नही लेना चाहती जिससे उस पर सत्ता में आने को लेकर कोई गंभीर आरोप लगें। दिल्ली में आप ने तो धमाकेदार दस्तक दी लेकिन देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस लग़ातार अपना ज़नादेश खोती जा रही हैं तो इसकी मुख़्य वज़ह है भ्रष्टाचार। कांग्रेस के नेतृत्व में चल रही यूपीए सरकार के कार्यकाल में एक से बढकर एक घोटाले हुए जिससे वह जनता में अपना जनादार खोती गई या यू कहे तो काग्रेस को लोग भ्रष्टाचार के पर्याववाची के रूप जानने लगे। 2014 में होने वाले आम चुनावो में भाजपा की लहर है या मोदी की ये तो पता नही पर इस बात से इनकार नही किया जा सकता कि देश में कांग्रेस विरोधी लहर बह रही  है। आय दिन हो रहे चुनावी सर्वेक्षणों में हर तरफ नरेंद्र मोदी  ही मोदी हैं। पर वही दूसरी ओर देश पर सबसे ज़्यादा समय तक राज करने वाली पार्टी कांग्रेस की बात करे तो वह पूरी तरह से अपनी हार तय मान चुकी है इस बात का अंदाजा इसी से से लगाया जा सकता है कि हाल में संपन्न हुए चार हिंदी भाषी राज्यों के विधानसभा चुनाओं के जहां भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदार नरेंद्र मोदी ने चुनावी रैलियों का रेला लगा दिया जिसका फ़ायदा पार्टी को चुनाव के नतीजो में साफ दिखा। तो वही कांग्रेस के राजकुमार व पार्टी  के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने चुनावी राज्यों में गिनती के रैली कर पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश भरने की कोशिश की जो पूरी करह से फ़ेल हो गया और पार्टी चारों राज्यों में ओंधे मुंह गिरी। अब दिखना होगा कि पूरे देश में होने वाले आम चुनाओं  में मोदी का विकास रंग लाता हैं  या  राहुल का दलित दौरा। 

Wednesday, 1 May 2013

प्रधानमंत्री तक पहुंची कोयले की आंच 



रास में गतिरोध जारी, विपक्ष पीएम के इस्तीफे की मांग पर अड़ा कोयला घोटाले की जांच रिपोर्ट में सरकार के कथित हस्तक्षेप पर विपक्ष ने किया उच्च सदन में हंगामा

 कोयला ब्लॉक आवंटन मामले की रिपोर्ट में सरकार के कथित हस्तक्षेप को लेकर प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग पर विपक्ष का हंगामा मंगलवार को भी जारी रहने के कारण राज्यसभा की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई और बैठक को दो बार के स्थगन के बाद पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया गया। उच्च सदन में बजट सत्र का गत सोमवार को दूसरा चरण शुरू होने के बाद सदन की कार्यवाही लगातार बाधित रही और इस दौरान एक भी दिन प्रश्नकाल नहीं हो पाया। मंगलवार को सदन की बैठक शुरू होने पर सभापति हामिद अंसारी ने जैसे ही प्रश्नकाल शुरू करने का ऐलान किया, राजग सदस्यों ने कोयला ब्लॉक आवंटन में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही सीबीआई की रिपोर्ट में सरकार के कथित हस्तक्षेप का मुद्दा उठाया। सभापति ने सदस्यों से प्रश्नकाल चलने देने के लिए कहा लेकिन भाजपा सदस्य प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए नारे लगाने लगे और आसन के समक्ष आ गए। अन्नाद्रमुक और तेदेपा के सदस्य अपनी- अपनी जगहों पर खड़े हो कर कोई मुद्दा उठाते देखे गए। सपा के सदस्यों ने जम्मू-कश्मीर में चीनी सैनिकों की घुसपैठ का मुद्दा उठाया और वे भी आसन के समक्ष आ कर सरकार के खिलाफ नारे लगाने लगे। अंसारी ने सदस्यों ने अपने स्थानों पर लौट जाने और प्रश्नकाल चलने देने को कहा। लेकिन हंगामा थमते न देख उन्होंने 11 बज कर करीब चार मिनट पर ही बैठक दोपहर बारह बजे तक के लिए स्थगित कर दी। एक बार के स्थगन के बाद दोपहर 12 बजे बैठक शुरू होने पर भी वही नजारा दिखा और भाजपा तथा सपा के अलावा अन्नाद्रमुक सदस्य भी अपने स्थानों से आगे आकर नारेबाजी करने लगे। उपसभापति पीजे कुरियन ने हंगामे के बीच ही जरूरी दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाए। उन्होंने विशेष उल्लेख के जरिए लोक महत्व के तहत उठाए जाने वाले मुद्दे भी सदन पटल पर रखवाए। अगप के कुमार दीपक दास ने विशेष उल्लेख के जरिए असम में आर्सेनिक मुक्त पेयजल की आपूर्ति के लिए कदम उठाए जाने की मांग की। झामुमो के संजीव कुमार, बसपा के अंबेथ राजन और तृणमूल कांग्रेस के विवेक गुप्ता ने भी विशेष उल्लेख के जरिए लोक महत्व के अलग-अलग मुद्दे उठाए। कुरियन ने इसके बाद शून्यकाल शुरू करने को कहा। लेकिन हंगामे के कारण शून्यकाल शुरू नहीं हो सका और उपसभापति कुरियन ने बैठक दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी। दोपहर दो बजे बैठक फिर शुरू होने पर सदन में हंगामा जारी रहा। हंगामे के बीच ही उपसभापति कुरियन ने महिलाओं के उत्पीड़न के बारे में अधूरी रह गई र्चचा को आगे बढ़ाने को कहा। इस दौरान भाजपा के सदस्य आसन के समक्ष आकर नारेबाजी करने लगे। उधर, सत्ता पक्ष की ओर से प्रभा ठाकुर सहित कुछ सदस्य सदन की कार्यवाही न चलने देने के कारण अपना विरोध जताते हुए देखे गए। हंगामा थमते न देख कुरियन ने बैठक को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया। गौरतलब है कि बजट सत्र के 22 अप्रैल से शुरू दूसरे चरण में उच्च सदन की कार्यवाही लगातार बाधित हो रही है। गत सोमवार को भोजनावकाश के बाद महिलाओं के उत्पीड़न के मुद्दे पर र्चचा शुरू अवश्य हुई थी, लेकिन यह पूरी नहीं हो पाई।

     

अमेरिका के साथ बढ़ते सैन्य संबंध

                                                                                                                                                            
अमेरिकी गतिविधियों से यह स्पष्ट है कि वह भारत से सैन्य सम्बन्ध बढ़ाने का इच्छुक है। वहां के राजनीतिक और सैन्य मामलों की सहायक विदेश मंत्री एंड्रयू शपीरो ने 18 अप्रैल को वॉशिगटन फॉरेन प्रेस सेंटर में संवाददाताओं के सवालों के जवाब में कहा कि अमेरिका भारत के साथ एफ-35 स्टील्थ लड़ाकू विमानों की बिक्री करने सहित अपने सैन्य सम्बन्धों के विस्तार के लिए उत्सुक है। हालांकि एफ-35 की बिक्री पर अभी कोई फैसला नहीं किया गया है लेकिन हमने रक्षा व्यापार सम्बन्धों में खासी प्रगति की है। 

यह कारोबार आठ अरब डॉलर का हो चुका है और अगले कुछ वर्षो में इसमें और वृद्धि होगी। शपीरो ने कहा कि उप रक्षा मंत्री एस्टन कार्टर भारत के साथ रक्षा व्यापार सम्बन्धी पहल को आगे बढ़ा रहे हैं और अमेरिका को लगता है कि प्रगति हो रही है। उम्मीद है कि आगे भी यह सिलसिला जारी रहेगा। छह साल के अन्तराल में भारत के साथ अमेरिका की पहली राजनीतिक-सैन्य वार्ता पिछले साल हुई थी जिसके लिए अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई शपीरो ने की थी। पूर्व में बहुउद्देश्यीय भूमिका वाले लड़ाकू विमानों के करोड़ों डॉलर के सौदे के समय भारत द्वारा एफ-18 ए तथा एफ-16 लड़ाकू विमानों की खरीद के प्रस्ताव को ठुकराने के बाद अब अमेरिका ने एफ-35 की बिक्री के लिए हाथ आगे बढ़ाया है। अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन के सहायक रक्षा मंत्री एस्टन कार्टर ने पिछले वर्ष एक अगस्त को न्यूयार्क में एशिया सोसाइटी की बैठक को सम्बोधित करते हुए कहा था कि भारत अमेरिका सम्बन्ध व्यापकता व प्रभाव की दृष्टि से वैश्विक हैं और 21वीं सदी में व्यापक सुरक्षा तथा समृद्धि लाने के ओबामा प्रशासन के प्रयासों में भारत एक प्रमुख हिस्सा है। उन्होंने कहा था कि अमेरिका भारत को अपना रणनीतिक साझीदार मानता है और हमारे सुरक्षा हित साझा हैं। समुद्री सुरक्षा, हिन्द महासागर क्षेत्र, अफगानिस्तान व कई क्षेत्रीय मुद्दों पर हम व्यापक तौर पर अपने हित साझा करते हैं। 

हमारा मकसद अमेरिका-भारत रक्षा सहयोग के लिए साझा नजरिया विकसित करने का है। इसीलिए मैं एक प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत गया था और वहां राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन के साथ मैने रणनीतिक संवाद किया। इसके बाद 23 जुलाई 2012 को रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी से मुलाकात में भारत के स्वदेशी बैलेस्टिक मिसाइल रक्षा कवच की तैयारी में सहयोग की बात हुई तथा रक्षा क्षेत्र में भारत से विदेशी निवेश बढ़ाने की अपील की गई। उन्होंने कहा कि हमारे सहयोग की यह सीमा होनी चाहिए कि हमारे रणनीतिक निर्णय स्वतन्त्र हों। हम अपने रक्षा संगठनों के बीच प्रगाढ़ सम्बन्ध बना रहे हैं। वायु सेना के लिए अमेरिका से खरीदे गए 10 बोइंग सैन्य परिवहन विमान सी-17 ग्लोबमास्टर में से पहला सी- 17 अपना आकार ले रहा है और हमारे आपसी सम्बन्ध भी मजबूत हो रहे हैं। सी-17 ग्लोबमास्टर की पहली उड़ान 1991 में हुई थी। इसके चालक दल में दो पायलट व एक लोड मास्टर होता है। इसकी लम्बाई 174 फुट तथा ऊंचाई 55.1 फुट है। इसके डैने 169.8 फुट ऊंचे हैं। 77,519 किलोग्राम पेलोड के साथ इसकी गति 0.76 मैक है। इसकी रेंज 2420 नॉटिकल मील है। यह चार इंजनों से लैस है। टी आकार के पिछले भाग वाले इस विमान के पिछले हिस्से में माल चढ़ाने के लिए रैंप बना होगा। सी-17 सात हजार फुट लम्बी हवाई पट्टी से भी उड़ान भर सकता है और आपात कालीन परिस्थितियों में मात्र 3000 फुट लम्बी हवाई पट्टी पर उतर सकता है। फिलहाल ऐसी विशेषताओं वाले विमान अमेरिका, कनाडा व ब्रिटेन जैसे 18 देशों के पास हैं। भारत ने पिछले साल जून माह में इस तरह के दस विमानों की खरीद का ऑर्डर दिया था। इस बड़ी खरीद वाले ऑर्डर के साथ भारत इन विमानों का सबसे बड़ा खरीददार बन गया है। इसके बाद सी-17 विमानों के निर्माण की शुरुआत जनवरी 2012 में हो गई थी। उम्मीद है कि इस साल जून माह तक पहला सी- 17 तैयार हो जाएगा। शेष नौ विमानों के सन 2014 के अन्त तक प्राप्त हो जाने की उम्मीद है। इन विमानों के आ जाने से पुराने हो चुके रूस निर्मित भारतीय मालवाहक विमानों के बेड़े को आधुनिक रूप दिया जा सकेगा। 

भारत में इन विमानों का अड्डा राजधानी दिल्ली के निकट हिंडन में बनाया जाएगा। इन विमानों का उपयोग राहत कायरें और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं में मदद पहुंचाने के लिए किया जाएगा। भारतीय नौ सेना के लिए अमेरिका निर्मित सामरिक मल्टी मिशन विमान पी-8 आई अपने अंतिम उड़ान परीक्षण की तैयारी कर रहा है। इसका प्रथम परीक्षण पिछले साल की शुरुआत में किया गया था। यह भारतीय नौ सेना को सामरिक रूप से मजबूत करेगा। इसमें समुद्र में लम्बी दूरी तक टोह लेने की और पनडुब्बीरोधी युद्ध क्षमता है। इस तरह देश की 7500 किलोमीटर लम्बी तटीय रेखा की निगहबानी मजबूत होगी। पी-8 आई विमान को घातक हार्पून मिसाइलों से भी लैस किया जाएगा। अमेरिकी नौ सेना के लिए पिछले कुछ सालों से पी-8 ए भरोसेमंद विमान रहा है। इसी की तर्ज पर भारत को दिए जाने वाले विमान का नाम पी-8 आई रखा गया है। भारत इस विमान का प्रथम ग्राहक है। पी-8 आई के तीन विमानों की पहली खेप इस साल के अन्त तक भारत को मिल जाने की उम्मीद है। अमेरिका से सी-130 जे परिवहन विमानों का सौदा किया गया था। भारतीय वायुसेना को छह विमान तय समय सीमा से पहले ही प्राप्त हो गए थे। वायुसेना ने ऐसे छह और परिवहन विमान खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अमेरिकी कम्पनी लॉकहीड सी-130 जे विमानों के सम्बन्ध में भारतीय वायुसेना की प्रतिक्रिया से अत्यन्त उत्साहित है। इसीलिए यह कम्पनी भारतीय थल सेना तथा नौ सेना को भी ये परिवहन विमान बेचने की संभावनाएं तलाश रही है। लॉकहीड मार्टिन कम्पनी के व्यवसाय विकास उपाध्यक्ष जार्ज स्टैंडिज ने 2 अगस्त 2012 को दिल्ली में कहा था कि हमारा काम है कि हम भारतीय सैन्य बलों की भविष्य की जरूरतों को समझें। ये विमान बड़े काम के हैं और भारत की विभिन्न प्रकार की सैन्य सेवाओं के साथ-साथ राहत एवं बचाव तथा आपदा प्रबन्धन कायरें के लिए भी उपयोगी हैं। उनकी कम्पनी भारतीय बाजार में कदम रख रही है तो एक दीर्घकालीन सोच के साथ आ रही है। बताया गया है कि इस कम्पनी ने टाटा समूह के साथ एक संयुक्त उद्यम समझौता किया है जिसके तहत दो कम्पनियां मिलकर हैदराबाद में एक विनिर्माण इकाई स्थापित करेंगी जहां सी-130 जे परिवहन विमानों के कुछ 

चीन की चोरी,सीनाजोरी फ्री में दादागिरी 

भारतीय सीमा में घुसपैठ

 

 

चीनी सेना 
 चीन सीमा विवाद को लेकर एक बार फिर माहौल गरम हो चूका है ताज़ा मामला है चिन के  2 0 -2 2 सैनिक तिब्बत के पास दोनों देशो के विवादित सीमा के अलावा भारतीय सीमा में 10 किलो मिटर पहुच चुके है और अपने तम्बू लगाकर अपने इरादे ज़ाहिर कर चुके हैं की वे अपनी ज़मीन पर है न की भारत के सरहद के अंदर और वे वापस जाने को तैयार नहीं खास बात है की भारतीय सैनिक भी उनके सामने डट कर अपना अड्डा जामा चुके हैं ऐसे में दोनों देशो के बिच का माहौल काफी तनाव पूर्ण हैं भारत और चीन के बिच एक लम्बी सीमा हैं जो नेपाल भूटान द्वारा तिन अनुभागो में फैला हुआ है भारत में इस मुद्दे पर  राजनीती शुरू होते देख  भारत के विदेश सचिव रंजन मथाई  ने चीन के राजदूत को दिल्ली में तलब किया लेकिन  चीन का रुख जस के तस है औरउसके सैनिक वापस जाने को तैयार नहीं हैं 

चीन समय समय पर भारत के अभिन्न अंग अरुणाचल प्रदेश को अपना बताने की हिमाकत करता रहा रहा हैं  चीन की माने तो वह लाइन एक्चुअल कण्ट्रोल में है ज़मीनी स्तर  (ग्राउंड जीरो ) की बात करे तो ये कोई पहला ऐसा मामला नहीं है जब चीनी सैनिक   भारतीय सीमा  में अपनी मौजूदकी  दर्ज कराते  रहे  है साल 1984 की बात करे तो उस समय भी बीजिंग का रुख इस विवादित सीमा को लेकर काफी सख्त रहा और चीनी राजनेताओं के रुख में काफी तल्खी देखनो को मिली चीनी सैनिक भारत के उन राज्यों में भी गस्त करते देखे गये जहाँ दोनों देशो के सीमओं को लेकर कोई द्वेष नहीं हैं मसलन कई बार चीनी सैनिक उत्तराखंड में गस्त करते देखे गये 
सिक्किम में चीनी सैनिक 10 दिनों तक भारतीय सीमा में रहकर गये और समय समय पर चीन ऐसे गस्ते करके भारत पर मनोवैनिक दबाव बनाने का काम करता रहा हैं तीन साल पहले की बात करे तो  चीन के तत्कालीन राष्ट्रपति हु जिंताओ ने भारत को चेताते हुए कहा था की भारत 1962  को ना भूले और अपनी हदों में रहे ताकि हमारे रिश्ते बरकरार रहे चीन के मौजूदा राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने हाल में हुए  डरबन ब्रिक्स सम्मेलन में कहा की भारत के साथ हम अच्छे रिश्ते चाहते है जो की इस नए मामले में  दिख रहा है की वे कैसे अच्छे रिश्ते चाहते है 









                  

कोयले में 'हाथ' काला                                                   

सरकारी खजाने को करोड़ो का चुना                                                


 आज देश में   भ्रष्टाचारों   का दौर  है जारी  हैं कभी CWG ,2G और अब कोलगेट घोटाला ने देश के राजनीति  में भूचाल पैदा कर दिया हैं अब तक कोलगेट को हम दातों की सफाई करने वाले पेस्ट के रुप में ही जानते थे लेकिन ताज़ा मामला है 1,86,000 हज़ार करोड़ का कोयला घोटाला कोलगेट का प्रयाव बन चूका हैं

  इस घोटाले के बाद दुनिया भर के टीवी और अख़बारों में इसे कोलगेट घोटाले के नाम से जाना  जाता हैं पत्रकार घोटालो  के नाम के आगे 'गेट' लगाकार इससे इसकी गंभीरता बताने की कोशिश करते हैं 1972 में अमेरिका में हुए वाटरगेट  घोटाले में वहा के राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन को अपनी कुर्शी  गवानी पड़ी थी लेकिन भारत में इस मामले में किसी को अपनी कुर्शी नहीं छोडनी पड़ी हैं 2006 से 2009 के दौरान हुए कोयला खदान आवंटन में पाया गया की नीलामी में निजी कंपनियों के फ़ायदे के लिए नीलामी में पारदर्शिता नहीं बरती गई और पूरी क़ानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ जिससे सरकारी खजाने को भरी भरकम नुकसान और निजी कंपनियों को काफी फ़ायदा हुआ

ये वो समय है जिस समय कोयला मंत्रालय देश के प्रधान मंत्री डॉ मनमोहन सिंह के पास था जिसकी वजह से प्रधान मंत्री भी सवालों के घेरे में हैं  साल 2010 में CAG की रिपोर्ट में पाया गया की 2006 से 2009 के दौरान हुए कोल खदान आवंटन में निजी कंपनियों का काफ़ी ध्यान रखा गया इस दौरान जिन निजी कंपनियों ने कोल ब्लाक खरीदा उनमे से नवभारत के एक व्यक्ति ने  अपने 5000 कंपनी शेयरों  को बढ़े दामों में 50  करोड़ में बेचा जबकि 85 करोड़ के कम्पनी के शेयरों को सिर्फ़ 12 करोड़ में बेचा कोल इंडिया लिमिटेड विश्व की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक है एवं भारत में कोयला बेचने की एक मात्र एजेंसी हैं सन  1973 में सरकार ने कोयला खनन  को अपने हाथों में ले लिया था लेकिन 1976 में लोहे एवं  इस्पात के निजी कम्पनियों को अंतरिम प्रयोग के लिए कोयला ब्लाक दी जाने लगी साल 2006 से 2009 के दौरान निजी कम्पनियों को 75 और सरकारी कम्पनियों 70 खदाने आवंटित की गई अक्टूबर 2008 में कोयला आवंटन  को लेकर एक विधेयक पेश किया गया जो कि  सितम्बर 2010 में क़ानून  बन गया साल 2012 में CAG ने कहा था कि आवंटन में कई स्तरों  पर पारदर्शिता  लाने की प्रक्रिया में देरी हुई जिससे निजी कम्पनियों को 1,85591 करोड़ का वित्तय  लाभ हुआ कोयला आवंटन मौज़ूदा समय में भारतीय राजनीति  का सबसे चर्चित मुद्दा रहा हैं

जिसकी वजह से कई बार संसद को ठप  करना पड़ा इतना ही नहीं केंद्र की मौज़ूदा कांग्रेस सरकार ने सवैधानिक संस्था कैग को ही विवादित बना दिया कहा कैग अपने आकड़ो को सुधारे दुनिया भर में कोयला तेल प्राकृतिक गैस खनिज प्रदार्थ ज़मीं के निचे प्राकृतिक संसाधन के रूप में ओये जाते हैं भारत में ओड़िसा छत्तीसगढ़ झारखण्ड जैसे राज्यों में कोयला अधिक मात्रा  में पाया जाता हैं  अगर अन्य  देशों की बात की करें तो चीन  हमसे पाच गुना ज़्यादा कोयले का उत्पादन करता हैं जिसकी बराबरी करने की लिए हमें मैन  मनी  की बड़े पैमाने पर आवश्कता हैं 







Thursday, 25 April 2013


दिमाग से नियंत्रित होने वाला टैबलेट



तकनीक की दुनिया में क्रांति लाएगा दिमाग से चलने वाला टैबलेट
मोबाइल कंपनी सैमसंग एक ऐसा टैबलेट तैयार कर रही है जो दिमाग से नियंत्रित होगा. अगर यह प्रयोग सफल हो गया तो टैबलेट की दुनिया में क्रांति आ जाएगी.
दक्षिण कोरियाई कंपनी सैमसंग के इस प्रयोग में अमरीकी शोधकर्ता भी काम कर रहे हैं. इन लोगों ने प्रयोग करके भी दिखाया है कि कैसे लोग सैमसंग गैलेक्सी टैबलेट में एक टिमटिमाते आइकन पर ध्यान केंद्रित करके उसे संचालित कर सकते हैं.ईईजी (इसके लिए लोगों को ऐसी टोपी पहननी होगी जिसमें ईईजी यानी इलेक्ट्रो इन्सीफैलोग्राम को मापने वाले इलेक्ट्रोड लगे होंगे.