Thursday, 24 September 2015

जातिवाद के साथ विकास की बात

शयद किसी राजा ने राज-धर्म पालन के लिए अपनी प्रजा का जात-पात नहीं पूछा होगा, उससे उसका नाम नहीं पूछा होगा, उससे उसका DNA नहीं जाना होगा, लेकिन बिहार की सियासत में पाटलीपुत्र राजा नीतीश कुमार बिहार की जनता का विकास उसके जातिगत आंकड़े से मानते है...बिहार की सियासत में विकास भारी या जातिवाद ये तो आने वाला समय ही बताएगा लेकिन चुनावी माहौल में विकास के पीछे-पीछे जातिवाद भी अपने परछाई को दिखा रहा है और आने वाले समय में दिखाएगा कि बिहार की राजनीति में विकास की बात करने वाले सियासत दान जातिवाद के जाल में फंस कर कैसे अपनी जात-पात को, नाम को, सम्मान को और अपने राजनीतिक प्रतिष्ठा को आगे कर बढ़ता रहे बिहार के रास्ते से विकास को हटा देंगे...

लेकिन सियासत की सही समझदारी ही वो है जो सही समय पर सही तरीके से सही तजुर्बें से साथ उस नीति को अपनाएं जिसके सहारे राजनेता धुंधले सियासत की जमात में अपने आप को , अपनी राजनीति को, अपनी चमचमाती सफेद कपड़ो को, अपनी प्रतिष्ठा को जनता की जलते चेहरे के रौशनी की चमक से अपनी राजनीति को चमका सकें..लेकिन जिस जनता के सराहे नेता अपनी राजनीति को उठाते है जो जनता एक झटके में इन नेताओं को फर्श से अर्श तक दूरी तय करने में सियासी समझदारी दिखाती है उस जनता को ये नेता विकास मशीन, विकासशील जनता के रुप में नहीं बल्कि जात-पात, धर्म, ये मेरी जात, ये तेरी जात ये मेरा DNA ये तेरा  DNA के आधार पर हमारे विकास पुरुष नेता देश की जनता सौदा करते है..ये सियासत का सौदा ही है कि जिस जात की जितनी आबादी उसे लोकतंत्र में लोकतांत्रिक लड़ाई लड़ने का मौका उसके जात के आधार पर मिलेगा..ये जरुरी नहीं कि वो जनता का विकास करेगा की नहीं, वो नेता जनता के हक की बात करेगा की नहीं, वो जनता के लिए लड़ाई लड़ेगा की नहीं बल्कि उसे बताने होगा कि वो किस जात से आता है उसे किस जाति का कितना वोट मिलेगा..वो सेक्यूलर है कम्युनल इस बात पर उस नेता के जनाधार का फैसला होगा और तय होगा कि उसे टिकट मिलेगा की नहीं...


शायद किसी सिनेमा घर के खिड़की फिलम के टिकट के लिए इतना हो हल्ला नहीं होते देखा होगा जितना कि बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टियों के टिकट को टिकट पाने वाले हर दावं को लगाते देखा...पीएम मोदी के खिलाफ लामबंद महागठबंन ने आखिर अपने प्रत्याशियों का एलान कर दिया मुस्कराते हुए सीएम नीतीश ने मीडिया को बताया कि टिकट बंटवारे में अपने सभी जातियों का ध्यान रखा, हमने सबके सम्मान किया है . हमने बिहार के सुशासन राज कायम किया है.. महागठबंधन में सीटों का बंटवारे हुआ तो विकास पुरुष की नीतीश कुमार की नजरे जाति के आकंडे पर गई नीतीश ने बताया कि उनके गठबंधन ने बैकवार्ड को 55 फीसदी, जनरल (अपर कास्ट को 16 फीसदी), मुसलमान को 14 फीसदी,  एससी-एसटी को 15 फीसदी टिकट दिया गया..नीतीश ने टिकट बांटे हो सकता है कि वो सभी जातियों का ध्यान रखते हो लेकिन जिन आकंडो पर नीतीश की चुनावी नजरे है वो साफ-साफ दिखाते है कि ये विकास की नहीं बल्कि जात-पात, धर्म की राजनतीति करने के आंकड़े है बिहार में अपर कास्ट के वोटर 15 फीसदी है, 51 फीसदी बैकवार्ड वोटर, 17 फीसदी मुसलमान वोटर, एससी-एसटी वोटर (16 एससी-1.3 एसटी वोटर) ये वो आंकड़े है जिन आकंड़ो पर नीतीश की आंखे टिकी है और नीतीश को उम्मीद है कि वो विकास से सहारे जातिवाद की राजनीति कर तीसरी बार सत्ता पर काबिज हो सकते है


इन आकंड़ो पर ध्यान दें और नीतीश जिन आंकड़ो के सहारे सियासत कर रहे है उन दोनों में मेल करे तो साफ दिखेगा बिहार की सियासत में और लालू वाले महागबंधन में जातिवाद का बोल बाला है... लालू ने 101 में से ज्यादातर उम्मीदवार अपने पारंपरिक वोट को देखते हुए MY समीकरण पर ध्यान दिया है खास बात कि टिकट बंटवारे में लालू ने गौर उपर कास्ट और नीतीश ने उपर कास्ट को साधने की कोशिश की है तो वही कांग्रेस लालू के लालटेन और नीतीश के तीर के सहारे अपनी गुम हो चुकी राजनीतिक जीवन में ज्योति कर राजनीतिक जंग में सही निशाना लगाना चाहती है 

Sunday, 30 August 2015

मोदी के खिलाफ महागठबंधन की 'स्वाभिमान रैली'

सियासत में समय पर समझदारी ही सही समझौता होता है इसी समझदारी वाली समझौता के बल पर बीजेपी को हराने के लिए लालू-नीतीश और सोनिया की स्वाभिमान रैली पटना के गांधी मैदान में आयोजित हुई इस स्वाभिमान रैली में बिहार के स्वाभिमान की दुहाई दी गई उस बिहार की दुहाई दी जिसे पीएम मोदी बीमारु कहते है जिसे पीएम गरीब बताते है अर्थव्यवस्था में सबसे पिछड़ा राज्य बताते है उस बिहार के स्वाभिमान को जगाने के लिए लालू ने अपने स्वाभिमान को मार डाला नीतीश ने अपने नीति को सोनिया के सहारे  छोड़ दिया उस कांग्रेस के सहारे बिहार को आगे बढ़ाने का सोच लिया जिस कांग्रेस ने अपने 40 साल के कार्यकाल में बिहार को 40 कदम भी आगे नहीं बढ़ाया...


नीतीश ने बिहार में लालू के उस सुशासन के सहारे सरकार बनाने का सोच लिया जिस सुशासन के सहारे बिहार में जंगलराज और गुंडागर्दी का राज होता है इस बिहार का स्वाभिमान जंगलराज और गुंडागर्दी के सहारे नहीं बल्कि जनादेश के सहारे जगेगा.इस स्वाभिमान रैली में लालू-नीतीश-सोनिया पहली बार एक मंच पर एक साथ दिखे पहली बार बीजेपी और मोदी के तीन ध्रुव विरोधी एक दूसरे के साथ एक दूसरे के सुर में सुर मिलाते हुए नजर आए... महागठबंधन को सजाने संवारने वाली समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह ने लालू-नीतीश के स्वाभिमान से अपने स्वाभिमान को दूर रखा और अपने समधी की स्वाभिमान रैली में अपने भाई शिवपाल को भेज कर मुलायम ने बता दिया कि लालू के स्वाभिमान से मुलायम का स्वाभिमान बड़ा हैं



स्वाभिमान रैली में सबसे पहले बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने बोलना शुरु किया तो राबड़ी के निशाने पर पीएम मोदी और कभी लालू के करीबी, RJD से सांसद रहे पप्पू यादव को राबड़ी ने मारकर भगाने की बात कही तो पीएम मोदी को झूठा बता दिया बिहार की पूर्व सीएम राबड़ी ने नीतीश को बिहार का सबसे बेहतर सीएम बता दिया अगर नीतीश की नीति अच्छी है और नीतीश के राज में बिहार में रामराज आया तो क्या लालू और खुद की सरकार को राबड़ी अच्छा नहीं मानती है  क्या 15 साल की लालू- राबड़ी की सरकार नीतिहिन और जंगलराज का था और अगर लालू-राबड़ी की सरकार अच्छी थी बेहतर थी, और सुशासन वाली थी तो नीतीश कुमार बिहार के सबसे बेहतर सीएम और नीतीश की सरकार सुशासन वाली कैसी हुई राबड़ी के लिए बेहतर सीएम कौन लालू या नीतीश?

बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने रैली को संबोधित करना शुरु किया तो नीतीश के निशाने पर पुराने दोस्त और नए दुश्मन पीएम मोदी थे नीतीश ने बिहार में बढ़ते अपराध वाले पीएम के बयान पर पलटवार करते हुए नीतीश ने बीजेपी शासित राज्यों में बढ़ते अपराध के बहाने बीजेपी और पीएम मोदी पर प्रहार किया नीतीश ने अपने पुराने दोस्त को बिहार का इतिहास बताया, बुद्ध को ग्यान देने वाला राज्य बताया, लेकिन नीतीश ने बिहार के सबसे बड़े आंदोलन और देश की राजनीति को बदल देने वाले जेपी आंदोलन का चंदन कुमार ने जिक्र तक नहीं किया...नीतीश को जेपी आंदोलन भूला दिया जैसे कोई बुरे सपने को भूल जाता है लेकिन नीतीश जेपी आंदोलन का जिक्र करते भी कैसे बगल में धर्मनिरपेक्षता की देवी सोनिया गांधी बैठी थी जिनकी सास ने जेपी को जेल भेज दिया था आंदोलन का जिक्र करते तो नीतीश को कांग्रेस के नीयत पर शक होता जो सोनिया को पसंद नहीं आता..सोनिया के सामने जेपी का जिक्र मोदी विरोधी महागठबंधन के लिए ठीक नहीं होता जो कांग्रसियों को रास नहीं आता..


मंच से नीतीश ने विरोधियों के सहारे लालू के नेतृत्व पर सवाल खड़ा किया कि विरोधी कहते है कि लालू का राज जंगलराज था मंच पर बैठे लालू मुस्कराते हुए नीतीश की नियत को समझ रहे थे जंगलराज किसका है मेरा या नीतीश का...


नीतीश ने लैंड बिल पर पीएम मोदी पर निशाना साधा उस बिल को लेकर पीएम मोदी नीतीश के निशाने पर थे नीतीश ने कांग्रेस के भूमि बिल को किसानों का बिल बताया तो मोदी के बिल को किसान विरोधी बताया अपने पुराने दोस्त के भूमि बिल से नीतीश नाराज है जो बिल किसानों के जमीन को छीन लेना आसान कर देती है इस बात को बोलते हुए नीतीश मुस्करा रहे थे पीएम के झुकने की बात कर रहे थे आज दिन को नीतीश खुशी का दिन बता रहे हैं क्योंकि पीएम आज नीतीश की नजरों में झुक गए है..


.देश की सियासत में अपनी राजनीति को चमकाने के लिए नीतीश किसानों के लिए आज भूखे बैठने की बात कर रहे है जिस राज्य में नीतीश के नाकोतले किसान मरने को मजबूर है पांच लीटर किरोसिन और एक डब्बा डीजल के लिए किसान भटक रहे हैं लेकिन आज नीतीश किसानों के लिए भूखा बैठने की बात कर रहे हैं..लालू सुशासन की बात कर रहै है...ये ही बिहार का स्वाभिमान है ? जिस स्वाभिमान की लड़ाई लड़ रहे लालू-नीतीश पीएम को ललकार रहे हैं बार-बार DNA की दुहाई दे रहे है  उस स्वाभिमान का DNA सैंपल भेजने वाले लिफाफे रोड पर लोगों के पैरों तले कुचलते नजर आए...ये बिहार का नहीं बल्कि लालू, नीतीश, सोनिया  का स्वाभिमान था जिसे लोगों ने पैरों तले कुचल दिया। 



Wednesday, 12 August 2015

मोदी के मुकाबले महागठबंधन तैयार

समय के मारे दो सियासी दुश्मन आज एक हो गए है या एक दिख रहे है एक मंच पर लालू नीतीश प्रेस को संबोधित कर कर रहे हैं मीडिया को बता रहे हैं कि कैसे महागठबंधन ने मोदी का काट तैयार किया है मोदी को हराने का रोडमैप बना लिया है हमने सीटों को बंटवारा कर लिया हम दुश्मन नहीं दोस्त बन गए है लालू का अपना सियासी अंदाज है वो बता रहे है कि कैसे नीतीश के पुराने दोस्त और नए दुश्मन मोदी का बिहार के चुनावों में बंटाधार करेंगे लालू- नीतीश जिन्होने एक दूसरे का सियासी विरोध कर अपनी राजनीतिक हैसियत को तैयार किया जो लंबे समय तक एक दूसरे के कमियों को जनता के बीच गिनाते रहे आज वो सियासत मे नए दोस्त बन गए है आज कमियां नहीं एक दूसरे की खुबियां बता रहे हैं



जंगलराज और गुंडाराज को भूला कर बिहार की जनता को अपने विकास राज की याद दिला रहे है नीतीश के सुशासन वाली सरकार को जीताने की बात करे रहे है आज लालू यादव नीतीश को बिहार का कस्टडीयन बता रहे है नीतीश इस सुशासन का हाल बता रहे है जिस सुशासन में रोज कई आम लोगों की हत्या होती है आम आदमी परेशान है पटना में एक पॉलिटिकल मर्डर हो जाता है प्रदेश में नीतीश की प्रजा परेशान है और नीतीश अपने विकास और सुशासन की बात करते हुए मीडिया को बता रहे है कैसे उन्होने बिहार में विकास किया कुछ लोगों ने तो सिर्फ जुमलेबाजी कि है नीतीश का सवाल मोदी की सरकार ने एक साल में क्या काम किया अपने पुराने दोस्त और नए दुश्मन से नीतीश का सवाल है कि मोदी ने कुछ नहीं किया किया तो सिर्फ जुमलेबाज़ी कभी दोस्त रहे मोदी में नीतीश को कई कमियां दिखती है तो कई दशक तक दुश्मन रहे लालू के साथ नीतीश आज दोस्ती की दुहाई दे रहे है नीतीश बता रहे कि राजद जेडीयू एक है एक साथ चुनाव लड़ बीजेपी को हाराएंगे अपने विकास के बल चुनाव में जनता के बीच जाएंगे साझा प्रेस वार्ता में नीतीश ने बिहार की जनता को बता दिया लालू अब नीतीश के साथ है और मोदी के खिलाफ महागठबंधन तैयार है 


देश में राजनीतिक जमीन खो चुकी और बिहार से प्रांसंगिक हो चुकी देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस  भी इस गठबंधन के सहारे जीत का सहरा बांधने को तैयार है बिहार के चुनाव में आज इस गठबंधन ने सीटों की साझेदारी भी तय कर दी नीतीश और लालू 100-100 सीटों पर चुनाव लड़ेगे तो कांग्रेस 40 सीटें पर बिहार में अपना किस्मत आजमाएगी 



जनता परिवार को संजोने, संवारनी वाली और लालू की समधिया समाजवादी पार्टी को लालू-नीतीश ने एक भी सीटे नहीं दिया तो मुलायम के नेता महागठबंधन पर कठोर हो गए नीतीश के प्रति नाराजगी जाहिर कर  दी समाजवादी पार्टी के बिहार अध्यक्ष ने बता दिया को पार्टी को अधिकार नहीं मिला तो नीतीश-लालू खामियाजा भुगतेंगे तो सवाल सिर्फ महागठबंधन का नहीं लालू-मुलायम के समधियाने का भी है नेताजी के नेता इस बात को लेकर निश्चिंत है कि नेताजी सिद्धांत को पहले समधियाने को बाद में रखते है 


जब सिद्दांत की बात हुई तो लालू ने उसी दोस्त के सामने बीजेपी-आरएसएस के खिलाफ अपना इरादा बता दिया जिस दोस्त ने बीजेपी के साथ 17 साल तक साथ निभाया लालू ने नीतीश के सामने ही बता दिया कि वो बीजेपी-आरएसएस को नागपुर पहुंचा देंगे ये सुनते हुए लालू के बगल में बैठे नीतीश मुस्कराते हुए लालू की बातों में सहमति जता रहे थे




लालू मीडिया को बता रहे थे ये बिहार का नहीं बल्कि देश का चुनाव है पूरे देश की नजर हम पर है पूरी ताकत से बीजेपी के खिलाफ 30 अगस्त को पटना के गांधी मैदान से बिहार के लिए स्वाभिमान रैली करेंगे जब सीटों पर फैसला हो गया और सिद्धांत की बात हो ही रही थी जो कांग्रेस के सीपी ठाकुर ने अपने सिद्धांत को सरेआम कर दिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संसदीय लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा बता दिया कांग्रेस के सीपी ठाकुर ने धर्म निरपेक्ष पार्टियों को एक साथ आने का का न्यौता दे दिया सवाल उठता है कि क्या महागठबंधन बनाकर मोदी को हराना ही मकसद है या धर्मनिरपेक्षता का ढोंगकर अपनी राजनीति चमकाना ही सटिक सिद्धांत है          

Saturday, 25 July 2015

मुज़फ्फ़रपुर में मोदी



मुजफ्फरपुर में परिवर्तन रैली के साथ बिहार विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने अपना चुनावी बिगुल शुरु कर दिया जब पीएम नरेंद्र मोदी ने भोजपुरी में बोलते हुए मुजफ्फरपुर रैली में लोगों को संबोधित किया कि बिहार के कोना कोना से आइल हमार भाई बहनो रऊआ सबसे शत-शत प्रणाम के साथ संबोधिक किया तो रैली में बैठे लोगों की आवाज आई तो मोदी-मोदी ठीक उसी तरह जैसे 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी मोदी की गुंज ने ,बिहार में बीजेपी 31 सीटें जीता दी...इन संबोधन के साथ पीएम मोदी ने रैली में आए लोगों को ही पीएम ने 14 करोड़ बिहारियों को अपना  संदेश भेज दिया कि वो बिहार की जनता से क्या चाहते है पीएम ने रेली में लोगों की भीड़ को देखता हुए बोले की मैं कल्पना नहीं कर सकता था कि ऐसा हुजुम देखने को मिलेगे पीएम की नजर जहां-जहां तक गई मोदी को माथे ही माथे दिखे तो पीएम मोदी ने पॉलिटिकल पंडितों को भी आगाह कर दिया कि इस कार्यक्रम को देखे तो नतीजा साफ दिख जाएगा कि अगली सरकार किसकी बनेगी...
नरेंद्र मोदी का मुजफ्फरपुर दौरा

पीएम ने ट्वीट को लेकर सीएम नीतीश पर निशाना साधा कि जब हम  कभी ट्वीट करते थे तो बिहार के एक नेता उनके चहकने , ट्वीट करने का मजाक उड़ाते लेकिन आज उन्होने भी चहकने का रास्ता पसंद किया और मेरे आने पर उन्होने ट्वीट किया कि 14 महीने बाद बिहार आने पर स्वागत है पीएम ने रैली में आए लोगों के सामने नीतीश के स्वागत का जवाब बड़े ही गंभीर स्वर में धन्यवाद दिया मोदी ने नीतीश से  अपनी मित्रता जिक्र यूं किया कि अपनो का विहर कितना परेशान करता है अपनों की दूरी कैसी बेचैन बनाती है पीएम मोदी ने मनमोहन से हमला करते हिए कहा कि 10 सालों में एक बार हवाई निरीक्षण करने आए थे लेकिन मोदी की 14 महीने का विरह भी बिहार के मुख्यमंत्री और मोदी के पुराने दोस्त को कितना परेशान करता है ये बात पीएम मोदी बखुबी जानते है और वो मानते है अपनों की दूरी जरा मुश्किल करती है ये बात मोदी शायद इसलिए कह रहे है कि नीतीश के साथ मोदी भी मित्रता चाहते है दोस्ताना चाहते चुनाव में बिहार को जितना चाहते है
रैली में लोगों की भीड़

मोदी ने परिवर्तन रैली में आए लोगों को विश्वास दिलाया कि कि बिहार की जनता चिंता ना करें मोदी अब आ गए है और देश के अच्छे दिन के बाद अब बिहार के भी अच्छे दिन आएंगे पीएम मोदी के कृषी मंत्री राधामोहन सिंह भी मानते है देश के बाद बिहार के अच्छे दिन जल्द आएंगे
मोदी के संबोधन के साथ ही रैली में आए लोगों के उत्साह बढ़ रहा था मोदी-मोदी के नारे लग रहे थे लोग खुश थे और पीएम उससे ज्यादा  बोल रहे थे जितना मोदी मन में सोच कर आए थे रैली में आए लोगों से मोदी उनके मन की बात जान रहे थे पूंछ रहे थे क्या बिहार में बदलाव में होना चाहिए, हालात बदलना चाहिए, स्थिति बदलना चाहिए, अंधेरे से उजाला होना चाहिए, रोजगार मिलना चाहिए, गुंडागर्दी साफ होनी चाहिए लोगों ने मोदी के मन की बात कही लोगों ने जोर जोर से कहा मोदी मोदी बदलाव होना चाहिए बिहार की जनता को मोदी ने भरोसा दिलाया कि 60  महीने में मैं आपके सपनों को पूरा करुंगा वो सारे सपने मैं साकार करुंगा जो 14 करोड़ बिहारियों ने देखा..बीजेपी से गठबंधन तोड़ने पर मोदी ने अपने पुराने मित्र नीतीश पर निशाना साधते हुए बोले कि मोदी इतना बुरा था तो एक कमरे के आकर एक चांटा मार देते मेरा गला घोंट देते इन बयानों में मोदी की नीतीश से मित्रता मोह दिख रही थी पीएम ने रैली में लोगों से अपील की एक बार हमे सरकार बनाने का मौका दे देश के प्रधान सेवक ने इस बात का भी जिक्र किया कि मेरी सरकार में बड़े विभाग बिहार के नेताओं के पास है इन बयानों और विभागों का जिक्र करना साफ दिखा रहा था पीएम मोदी आगामी बिहार विधानसभा में बड़े वोट को साधने की कोशिश कर रहे है जनता को लुभाना की कोशिश कर रहे है 


लेकिन प्रधान सेवक ने विभाग बताने से पहले 1998 में अटल जी के सरकार में मंत्रिमंडल को याद करना भूल गए जिसमें जार्ज फर्नाडिस रक्षा मंत्री, यशवंत सिन्हा, वित्त मंत्री, मोदी के पुराने दोस्त नीतीश-रेल मंत्री थे लेकिन आज मोदी के मंत्रिमंडल में ये तीनों मंत्रालय गैर बिहारी नेताओं के पास शायद ये बात मोदी के मन में नहीं आई जो बिहार की जनता को पसंद नहीं आएगी.. लेकिन फिर भी पीएम ये भी बताना नहीं भूले के बिहार के नेता पूरे देश को चला रहा है...लोकसभा चुनाव में भारी बहुमत के लिए मोदी ने बिहार की जनता को शत-शत इन बयानों से पीएम के बिहार के मतदाताओं को बताना की कोशिश की आप विधानसभा चुनाव में बीजेपी की सरकार बनाएं...लोकसभा चुनाव के अपने घोषणाओं का जिक्र करते हुए पीएम ने बोला कि मुझे याद है कि मैंने आपसे वादा किया था उन वादों को पूरा करुंगा रैली में आए लोगों को मोदी का वादा तो याद नही था पीएम ने लोगों को अपना वादा याद दिलाया लेकिन सवाल डेढ़ साल गुजरने के बाद भी मोदी सरकार ने बिहार के लिए सरकार पैकेज क्यों नहीं दिया तो जवाब है संसद सत्र खत्म होने के बाद...बिजली नहीं तो वोट नहीं नीतीश के इस वादे पर पीएम निशाना साधते हुए बोले की बिजली नहीं दी लेकिन वोट मांगने लोगों के पास आए उन्होने बिहार के जनता के साथ धोखा दिया पीएम मोदी ने बिहार की जनता को नीतीश के डीएनए के बारे में बताना नहीं भूले कि नीतीश के राजनीतिक डीएनए में दिक्कत है.   



पटना में पीएम

2014 के लोकसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत से चुनाव जीतने के बाद जब नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बनें तो उस चुनाव में बिहार का अहम योगदान रहा बिहार के 40 लोकसभा सीटों में बीजेपी सहित एनडीए गठबंधन को 31 सीटें मिली तो बिहार में सभी विरोधियों का मुंह बंद हो गया उन सभी नेताओं के मुंह पर राजनीतिक तमाचा था जिन लोगों ने धर्मनिरपेक्षता के नाम राजनीतिक धर्म को को भूला दिया अपने दोस्त को दुश्मन बना लिया...धर्मनिरपेक्ष पार्टियां जेडीयू को 2 तो लालू को 4 सीटें मिली तो मोदी विरोधी एकजुट हो गए...प्रधानमंत्री बनने के 15 महीने बाद आज पहली बार नरेंद्र मोदी बिहार के दौरे पर थे जहां पीएम ने 5 योजनाओं की शुरुआत कि ... 

दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना, पटना-मुंबई रेल लाइन, दानियावां-बिहारशरीफ रेल राइन, गैस परियोजना, और IIT पटना कैंपस का शुभारंभ पीएम नरेंद्र मोदी ने किया... 2009 के बाद पहली बार दो पुराने दोस्त और अब राजनीतिक दुश्मन मोदी और नीतीश किसी राजनीतिक मंच पर एक साथ दिखे... 2009 के आम चुनाव में पंजाब में आखिरी बार तब गुजरात के मुख्यमंत्री मोदी और बिहार के सीएम नीतीश कुमार एक साथ एक मंच पर एक दूसरे के होथों में हाथ डाले दोनों एक दूसरे के नेतृत्व को निहार रहे थे दोनों अपने सुशासन का गुणगान कर रहे थे तब मोदी नीतीश के मित्र थे एक अच्छे दोस्त थे उन दिनों नीतीश को गुजरात का मॉडल पसंद था आज मोदी नापंद है तब मोदी विकास पुरुष थे आज समाज को बांटने वाले नेता हैं...तब नीतीश को ना तो मोदी की मित्रता से गुरेज था और नाही आडवाणी की सांप्रादिक पार्टी की आगुवाई से परहेज था...अब मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं और नीतीश बिहार के मुख्यमंत्री है आज मोदी और नीतीश एक साथ एक मंच पर थे पर दोनों के हाथ एक दूसरे के हाथों में नहीं था आज दोनों हस हस के बातें नहीं कर रहें    थे दोनों के हाथ तो उठे पर मिलाने के लिए नहीं बल्कि दिखाने के लिए की हम एक दूसरे का सम्मान करते है अपमान नहीं...
नैना मिलाई ले

पीएम नरेंद्र मोदी-नीतीश कुमार पटना कार्यक्रम में 

पीएम जब वेटनरी कॉलेज में कार्यक्रम के लिए पहुंचे तो वहां बिहार के सीएम नीतीश कुमार भी मौज़ूद थे  कई केंद्रीय मंत्री भी मौज़ूद थे पीएम मोदी और नीतीश एक दूसरे से बातें तो कर रहें थे पर नीतीश पीएम से अपनी नजरे चुरा भी रहे थे मोदी के बिहार पहुंचने से पहले एएनाई को दिए इंटरव्यू सीएम नीतीश कुमार के कहा था कि मैं देश के पीएम का स्वागत करुंगा ना की बीजेपी के नेता का आदर करुंगा नीतीश बोल रहे थे पीएम अपना सर हिलाते हुए नीतीश की बातें सुन रहे थे नीतीश के विकास की बातें मोदी अपने मन में खाली घड़े में पानी भरने के समान भर रहे थे दोनों की बातें बगल में बैठे रामविलास पासवान भी सुन रहे थे और समझ भी रहे थे दो पुराने दोस्तो की बातें...मोदी और नीतीश कई सालों के बाद मिले थे और ऐसे बाते कर रहे थे जैसे कोई बिछड़ा दोस्त वर्षों बाद मिला हो..

पीएम मोदी-सीएम नीतीश कुमार-केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान

पासवान भी तो कभी नीतीश के साथ मंत्री थे आज पासवान मोदी के मंत्री है लेकिन नीतीश अब मोदी और पासवान से काफी दूर है पीएम की नजरे तो नीतीश को निहार रही थी पर नीतीश अपनी नजरे मोदी से चुरा रहे थे...नीतीश और मोदी राजनीतिक विरोधी है तो तंच तो कसना था लिहाजा नीतीश ने पीएम को तंज कसते हुए इस बात का एहसास दिलाया कि अटल सरकार की दनियावां-बिहार शरीफ रेल योजना शुरु करवा दे जो पता नहीं कब शुरु होनी थी नीतीश के इस दर्द से मोदी के मन को पीड़ा हुई तो नीतीश के इस व्यथा के साथ पीएम ने भी अपना शुरु मिलाया लेकिन नीतीश राजनीति विरोधी है तो तंज का जवाब तो देना था तो मोदी ने भी मंझे हुए राजनीति खिलाड़ी की तरह नीतीश को जवाब दिया हमने तो इस रेल लाइन की शुरुआत कर दी हमने तो बिहार की जनता का विकास किया कुछ लोगों ने तो सिर्फ राजनीति किया ...

इतना ही नहीं पीएम ने इशारों इशारों में लालू यादव पर निशाना साधा कि सरकार बदलने के बाद बिहार से ऐसे रेल मंत्री आए जिन्होने दनियावां-बिहारशरीफ रेल परियोजना का काम रोक दिया राजनीतिक द्वेश से बिहार की जनता का नुकसान हुआ राजनीति करने वाले तो राजनीति करें लेकिन बिहार की जनता का विकास ना रोके...बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने परियोजनाएं शुरु करने को लेकर पीएम मोदी का तहेदिल से धन्यवाद किया नीतीश से उस दिल से उस मोदी को धन्यवाद किया जिस दिल की बात सुनकर नीतीश ने मोदी के नाम पर 17 साल पुराना बीजेपी से गठबंधन तोड़ दिया 14 करोड़ बिहरियों के इस उम्मीद को तोड़ दिया जिस उम्मीद के साथ बिहार की जनता ने बीजेपी के साथ के साथ नीतीश को वोट दिया था वो बिहार का विकास करेंगे लेकिन नीतीश ने लालू के साथ हाथ मिलाकर उन वोटों पर चोट किया जो बिहार की जनता ने नीतीश को दिया था.


Sunday, 21 June 2015

21वीं सदी के ‘योगपथ’ पर भारत

कोई आशिक भी अपनी माशुका से खुद के इश्क का इजहार करने को इसकदर बेताब नहीं होता है  जिस तरह भारत सहित विश्व के 177 देश 16 जून 2015 को योग दिवस मनाने के लिए बेताब दिखे पलके बिछाये इस दिन का इंतजार करते रहे...बड़े लंबे और सुखद इंतजार के बाद आज वो तारीख आ गई जिस दिन का पूरी दुनिया को इंतजार था...भारत को इंतजार था देश के प्रधान सेवक नरेंद्र मोदी को इंतजार था देश की राजधानी दिल्ली के राजपथ को इंतजार था जहां प्रधान सेवक के योग करने का प्रोग्राम तय था वो दिन तय था वो समय तय था वो पल तय था जब देश के लोगों को योग करना सिखाये देश के प्रधानमंत्री... आज वो सभी इंतजारे खत्म हो गई जब देश के प्रधानमंत्री ने दिल्ली के दिल की बीचों बीचों राजपथ पर लोगों के साथ योग किया 21वीं सदी में भारत विश्व का योग गुरु बना...मंगल यात्रा, आर्थिक मजबूति वाले आधुनिक 21वीं सदी के 15वें साल के 6 महीने के 21 जून को हिंदूस्तान ने पूरी दूनिया को योग का राज बताया..भारत ने बताया कैसे आज की भागती- दौड़ती जिंदगी, वैश्विक बदलाव,  मिशाइलों के सफल प्रक्षेपण करने वाले युग में भी योग का महत्व है इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि आज हम कितने भी आधुनिक होने का दावा कर ले लेकिन योग से दूर नहीं हो सकते..21 सदी के बदलती दुनिया को भारत ने बताया क्या है योग का धर्म भारत ने बताया योग का फर्ज..इंडिया ने बताया कि योग जिंदगी जीने की कला है योग हमारी परंपराओं की पूंजी है योग महज एक व्यायाम नहीं बल्कि योग हमारे शरीर को आत्मा से बांधता है जैसे हम किसी रेश्ते में बंध जाते है हम उस रिश्ते में खो जाते है जो रिश्ता हमें जीने की कला को सिखाता है जिस रिश्तों को हम जीना चाहता है उससे हमारा अलग लगावा होता है उसी तरह जिंदगी से योग का अलग लगाव है.. जिसे जीने की कला कहते है UNO द्वारा कई दिवस मनाए जाते है आज उन दिवसों की सूची में योग दिवस ने भी जगह बना ली भारत की नजरिये से देखे तो योग दिवस पर भारत की छाप है क्योंकि योग दिवस मनाने की मंशा UNO में भारत ने रखी 2014 में जब देश में बीजेपी की सरकार बनी और पीएम बनने के बाद नरेंद्र मोदी की अमेरिका दौरे के दौरान 27 सितंबर 2014 को  पीएम नरेंद्र मोदी ने UNO को संबोधित करते हुए कहा कि योग हमारी पुरात्तव परांपरिक अमुल्य देन है योग को लेकर पीएम ने कहा कि योग मन, शरीर ,विचार कर्म, संयम. उपल्ब्धि और मानव और पाकृति के बीच सामंजस्य का रुप है...प्रधानमंत्री मानते है कि योग स्वास्थ्य और कल्याण का समग्र दृष्टिकोण है UNO के संबोधन में प्रधानमंत्री योग को केवल का शारीरिक व्यायाम नही मानते है बल्कि प्रधानमंत्री मानते है कि योग पाकृति को प्राप्त करने का माध्यम है देश के प्रधानमंत्री मानते है कि योग हमारे जीवन शैली में बदलाव लाकर हमारे अंदर जागरुकता उत्पन्न करके जलवायु परिवर्तन से लड़ने में सहायक हो सकता है प्रधानमंत्री के योग दिवस मानने के प्रस्ताव को UNO ने माना और फैसला किया गया कि 16 जून को पूरी दुनिया योग दिवस मनाएगी वो दिवस जिस दिन हम अपने आप को पहले से और ज्यादा ऊर्जावान, फुर्तिला और चुस्त महसूस करेंगे... शायद हमारी जिंदगी पहले से और ज्यादा जलवायु परिवर्तन से लड़ने में सहायक होगी.. 16 जून इसलिए चुना क्योंकि यह दिन साल का सबसे बड़ा दिन होता है..

योग तो केवल एक व्यायाम या पाकृति को समझने का जरिए है लेकिन देश में विवाद भी शुरु हुआ इस योग पर... इस जीवन जीने की कला पर खुब राजनीति का रंग चढ़ा..जलवायु परिवर्तन से लड़ने वाली योग पर सियासत तो होना ही था क्योकि इसको किसी धर्म से जोड़ा गया तो किसी समुदाय का विरोधी बताया गया राजानीति तो योग को लेकर खुब हुई इस हद तक सियासत हुई व्यायाम से पहले बयानबाजी शुरू हो गई...नेताओं ने कहा नहीं करना योग तो देश छोड़ दो तो किसी ने कहा मुसलमान विरोधी है योग इस्लाम का विरोधी है योग.. दिल्ली से लेकर देश के कई मंत्रियों ने व्यायाम पर बयान दिया किसी ने योग को नमाज़ से जोड़ा तो किसी ने योग ना करने वालों से बू आने की बात कह दी...तो सवाल  सिर्फ योग को लेकर नहीं कि योग किस धर्म का है या योग किस धर्म का नहीं है या योग किस धर्म का विरोधी या किस धर्म का समर्थक सवाल इस बात को लेकर कि व्यायाम पर बयानबाज़ी क्यो व्यायाम तो केवल एक जीवन जीने की कला है जो हर किसी को जीने का तरीका सिखाता है तो इस कला वाले व्यायाम पर इतना बवाल क्यों.. 16 जून 2015 को पूरे भारत में योग दिवस मनाया गया जनता से खचाखच भरी राजपथ योग दिवस का गवाह  बनने के लिए सज कर तैयार था...लोगों का उत्साह योग को लेकर खुब दिखा इस कदर उत्साह कि जनपथ पर जनता की भीड़ सुबह से ही दिखने लगी थी..क्या बुढ़े क्या बच्चे क्या युवा सब योग के रंग में रंग जाने को बेसब्र थे इन तस्वीरों में राजपथ पर जनता की भीड़ अपने आप में योग के प्रति उत्साह को बयान कर रही थी.. देश की राजधानी दिल्ली में पीएम मोदी और सीएम केजरीवाल ने योग किया को हालिया विवादों में फंसी राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे ने अपने मंत्रिमंडल के साथ जयपुर में योगासन किया बिहार में बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह ने योग तो किया लेकिन उतना नही कर पाए जितना सोच कर किया अमित शाह पटना आए थे शायद शाह के शरीर पर नीतीश का निशाना सही था जिसमे नीतीश ने कहा था शाह योग करते तो ऐसा शरीर नहीं होता...

शाह ने उतना व्यायाम नहीं किया जितना पीएम मोदी ने राजपथ पर किया बिहार  में आगामी विधानसभा चुनाव है ऐसे में राजनीतिक योग को साधने कि लिए कई केंद्रीय मंत्रियों ने अलग अलग जगहों पर योग किया लेकिन मोदी के योग का विरोध कर रहे राजनीतिक पार्टियों में इस  योग से दूरी बनाई रखी बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने भाजपा पर हमला किया तो वही लालू ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि बीजेपी असली मुद्दो से भटकाने के लिए योग का ढोंग कर ही है जनता बीजेपी का असली चेहरा देख रही हैं शाह को शारीरिक नसीहत देने वाले नीतीश के नए दोस्त लालू की शरीर भी शाह जैसा शायद तभी लालू भी व्यायाम नहीं कर पाए और व्यायाम पर बयानबाजी शुरु कर दी...

योद दिवस के मौके पर देश के दूसरे राज्यो के मुख्यमंत्रियों ने भी योग किया झारखंड के सीएम रघुवर दास, महाराष्ट्र के सीएम फड़नवीस, हरियाणा के सीएम खट्टर ने भी प्रधानमंत्री के इस योग दिवस पर योग पूरे देश  ने योग  करके योग दिवस मनाया तो वही कांग्रेस ने ललित मोदी-सुषमा-वसुंधरा प्रकरण को लेकर ललितासन करके इसका विरोध किया जहां कांग्रेस ने योग का विरोध किया वही कांग्रेस शासित राज्य उत्तराखंड के सीएम हरिश रावत ने योग किया...
प्रधानसेवक के योग पहल को पूरी दुनिया ने सराहा ठीक उसी तरह जैसे आज से 8 महीने पहले शुरु हुए स्वच्छता अभियान को सराहा गया लेकिन  स्वच्छता अभियान आज सवालों में है स्वच्छता अभियान झाडू उठाकर सेल्फी लेना एक जरिया बनाकर रह गया इस अभियान की हकीकत और दावे एक दुसरे के विपरित है सफाई अभियान की सच्चाई कुछ और है ऐसे में योग को लेकर सवाल उठने लाजमी है कही योग भी स्वच्छता अभियान की तरह दिखावा बनकर ना रह जाए भारत ने दो विश्व रिकॉर्ड बना 'गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में अपना नाम दर्ज करा लिया है.



Wednesday, 17 June 2015

मोदी का “ललित” आईपीएल

फाइल--सुषमा स्वराज-ललित मोदी 
ललित मोदी वो नाम जिसने क्रिकेट की दुनिया में अपना एक अलग नाम कमाया अपने ललित नाम को भुनाया भारतीय क्रिकेट को एक नए आयाम पर पहुंचाया भारतीय क्रिकेट को आईपीएल का तोहफा दिया  सफेद क्रिकेट को एक नया रंग दिया क्रिकेट के कई रंग लाल, ब्लू, काला, पिला, निला ,क्रिकेट तो दिया लेकिन इस सफेद क्रिकेट को काला कर दिया क्रिकेट के ड्रेसिंग रुम को काला अड्डा बना दिया ..क्रिकेट के पविलिटन को पब का पर्याववाची बना दिया क्रिकेट को कॉरपोरेट से जोड़ दिया 

एक सभ्य खेल को बाजारु गेम बनाकर छोड़ दिया बाजार में नीलाम होने वाला खिलौना बताकर बेच दिया क्रिकेट को कलंकित खेल बनाकर छोड़ दिया इस खेल के तो कई मोहरे थे जिसका बादशाह तो ललित मोदी था जिसने  क्रिकेट के आईपीएल को राजनीति के आईपीएल से जोड़ दिया जी हां राजनीति की आईपीएल यानि इंडियन पॉलिटिकल लीग से जोड़ दिया क्रिकेट के हरे मैदान में राजनीति के सफेदपोश खिलाड़ियों को उतार दिया नेताओं को क्रिकेट की बैंटिंग करना सीखा दिया राजनीति के मैच में आईपीएल का तड़का लगाना समझा दिया ललित मोदी ने राजनेताओं को राजनीति में रन लेना सीखा दिया चौके-छक्के लगाना सीखा दिया लेकिन ललित की सिखाई बैंटिंग के बदौलत शशि थरुर जैसे बड़े राजनीतिक खिलाड़ी आउट हो चुके है अपनी कुर्सी गवां चुके है आज सियासत के कई बड़े खिलाड़ी रन आउट होने के कगार पर खड़े है थर्ड अंपायर के फैसले के इंतजार में खड़े है राजनीति की पीच पर एक जीवनदान पाने के लिए खड़े है क्रिकेट के आईपीएल से लेकर पॉलिटिक्स के आईपीएल तक हर जगह आज मोदी ही मोदी की चर्चा है आज हर नेता के जुबान पर ललित मोह दिख रहा है क्या मोदी के विरोधी या समर्थक सब मोदी के साथ खड़े है या मोदी के साख के साथ खड़े है ये तो पता नहीं पर आज पूरे देश में मोदी की चर्चा है.. चर्चा राजनीति के बादशाह पीएम मोदी की नही बल्कि क्रिकेट के दुनिया के ललित मोदी की है ...


इस ललित मोदी पर क्रिकेट के नाम 700 करोड़ गबन का आरोप है क्रिकेट को कलंकित करने का आरोप है देश का पैसा चुराने का आरोप है आरोप कई है पर नाम एक ललित मोदी ललित मोदी...क्रिकेट वाला मोदी

आईपीएल के विधाता कहे या क्रिकेट का कॉनट्रैक्टर इस ललित मोदी की मदद करने के आरोप में पीएम मोदी की  विदेश मंत्री सुषमा स्वराज फंसी है राजस्थान की रानी सीएम वसुंधरा राजे संकट में पड़ी है आज पूरी मोदी सरकार फंसी है  सरकार सवालों से घिरी है  सरकार  संकट में पड़ी है सुषमा पर सियासी संग्राम शुरु हो गई है मोदी के सांसद आस्तिन के सांप की राजनीति बता रहे है मोदी के बड़े मंत्री इस मामले पर मौन है सवाल कई है जवाब सिर्फ एक सुषमा स्वराज सही है सुषमा पर आरोप है 700 करोड़ के गबन के आरोपी ललित मोदी की सुषमा ने मदद की उस ललित मोदी की मदद की जिसे पूरी दुनिया की पुलिस ने नोटिस जारी कर रखा है जिस पर पर्वतन निदेशालय ने कई मामलों में केस दर्ज कर रखा है सुषमा ने उस ललित की मदद की कांग्रेस का आरोप है सुषमा ने कानून के भगोडे की मदद की सुषमा-ललित संबंधो को लेकर आज सऱकार सवालों से घिरी है कांग्रेस के कई सवाल सरकार क्यों चुप पड़ी है सरकार का जवाब सुषमा ने मनावता के आधार पर ललित मोदी की मदद की है फिर कांग्रेस का सवाल क्य़ा मनावता के आधार पीएम मोदी के मंत्री दाउद की मदद करेंगे सरकार चुप हैं संघ , संगठन और सरकार सुषमा के साथ है सरकार के बड़े मंत्री कहते है कि सुषमा ने जो किया वो सही किया लेकिन सवाल फिर आखिर सुषमा ने सही किया तो आस्तिन की राजनीति किसने किया कौन है जो राजनीति की पिच पर सुषमा को क्लिन बोल्ड करना चाहता है कौन है जो ललित के बहाने सुषमा का स्वराज छीनना चाहता है वो जो भी है पता नहीं लेकिन सुषमा के साथ सरकार,  संघ और संगठन खड़ी है 


सरकार कहती है मोदी की पत्नि बीमार थी मदद कराना मनावता था अगर बीमार के नाते मदद करना था तो सुषमा ने लंदन में अपनी करीबी को एडमिशन कराने में ललित की मदद क्यों ली क्यों सरकार को नहीं बताया कि हां मैनें ललित मोदी की मदद की और ललित मोदी से मदद ली सुषमा पर आरोप है लंदन से पुर्तगाल जाने के लिए सुषमा ने ललित मोदी की माईग्रेशन पेपर पाने में मदद की.. आरोप और बचाव सिर्फ सुषमा की नही बात केवल दिल्ली तक नहीं मामला सिर्फ विदेश मंत्रालय का नहीं चिंता सिर्फ पीएमओ की नहीं बल्कि सुषमा की आंच दिल्ली के रास्ते होते राजस्थान की रानी सीएम वसुंधरा के आंचल तक पहुंत गई वसुंधरा पर आरोप है ललित मोदी को पेपर पाने में राजे ने मदद की राजे ललित की गारंटर बनीं देश के भगोड़े की गवाह बनीं ललित मोदी की राजे ने मदद की राजस्थान की सीएम पर आरोप है जिस अस्पताल में ललित मोदी के पत्नि का इलाज हुआ उस अस्पताल को जयपुर में कैंसर सैंटर बनाना का कॉन्ट्रैक्ट मिला

वसुंधरा-ललित-सुषमा
वसुंधरा के बेटे दुष्यंत की कंपनी में ललित मोदी ने निवेश किया कंपनी तो दुष्यंत की है पर कॉन्ट्रोल तो ललित मोदी के हाथ है  क्रिकेट से लेकर कॉरपोरेट तक हर जगह मोदी का कैप्चर था राजस्थान की सीएम संकट में है पर सीएम की संकट सुषमा से बड़ी है वहज कि सीएम के साथ ना तो संघ ना संगठन और ना सरकार खड़ी है बीजेपी ने साफ किया सीएम अपना रुख खुद साफ करें संगठन सुषमा की तरह सीएम वसुंधरा का वचाव नहीं करेगी  सीएम की संकट सुषमा से आपर  है मामला बढ़ता देख वसुंधरा ने अमित शाह से मिलने की कोशिश की तो शाह ने सीएम राजे को मात देते हुए कह दिया अभी इंतजार करो खेल अभी बाकी है राजनीति के खेल में परिणाम इतनी जल्दी नहीं आते ये बात वसुंधरा को अच्छे से समझ लेना चाहिए क्योंकि सवाल कई है जवाब सिर्फ एक सुषमा स्वराज सही हैं...