Sunday, 8 May 2016

जेडीयू MLC के बेटे ने एक युवक की हत्या की

बिहार के गया में एक युवक की गोली मार कर हत्या कर दी गई... आज एक परिवार का लाल उससे हमेशा के लिए छीन गया...एक परिवार का चिराश सदा के लिए बुझ गया...आज एक मां की कोख सुनी हो गई....एक मां चिल्ला-चिल्ला कर अपनी आवाज सुशासन के कानों तक पहुंचाना चाहती है कि सुन लो सुशासन बाबू मैं इस लाश की बदनशीब मां हूं...जिसको आपके सुशासन में आपके सियासी साथियों मेरे बेटे को आज लाश बना दिया है...आपके सुशासन में मदर्स डे के मौके पर मुझ बदनशीब मां को आपके साथियों ने मुझे उपहार दिया मेरे बेटे की लाश का उपहार....आज घर सुना हो गया...आज एक पिता का प्यार हमेशा के लिए मर गया..मर गया वो बेटा जिसे पिता का प्यार प्यारा था जिसे मां की ममता प्यारी थी...

इस प्यार और ममता का मजाक उड़ा रहे है सुशासन बाबू के जूनियर और बिहार के उप-मुख्यमंत्री के पद पर बैठे लालू के लाल और राबड़ी के दुलारे तेजस्वी यादव जो एक बेटे की हत्या की तुलना गुरुग्राम में चोरी हुई उस गाड़ी से कर रहे जिसे चोरों ने गुरुग्राम से चुरा लिया वो कार किसी और की नहीं बल्कि लालू के जमाई राजा और तेजप्रताव ,तेजस्वी के जीजा की थी...आज गया में एक परिवार गमगीन है क्योंकि उसका बेटा मर गया... एक मां की ममता खुन से लतफत हो गई....एक मां का आंचल बिरान हो गया...और दूसरी तरफ जेतस्वी साहब उस अपने जीजा के चोरी हुई गाड़ी की तुलना उस बेटे से कर रहे जो कल तक अपनी मां के लिए मदर्स डे के लिए सपने देख रहा था..अपनी मां को तौफा देना चाहता था...उसकी मां को तौफा तो मिला लेकिन एक मां को तोफा मिला उसके बेटे की लाश ....सुन रहे है ना सुशासन बाबू और देख भी लीजिए अपने जूनियर की दलील जो सुशासन को कैसे समझा रहे है..एक बेटे की लाश की तुलना एक गाड़ी ....एक मां  की मामता की बराबरी चार पहिया मोटर के रहे है...पिता के प्यार को 10 लाख की गाड़ी से तौला जा रहा है 
ये सब सुनकर आपका सर शर्म से झुक जाएगा कि आपका सुशासन वाला बिहार कैसे कुशासन के सामन घुटने टेक रहा है ....सुशासन में एक बेटे की लाश मां के आंचल का तौफा बन रहा है ....कहते रहिए 5वीं बार नीतीश कुमार ..कहते रहिए बढ़ता रहे बिहार..कहते रहिए सुशासन का राज लेकिन गया की घटना ने जो आपके माथे पर बदनुमा पताखा लहरा दिया उसे आप कैसे मिटाएंगे..कैसे मिटाएंगे आप उस दाग को जो आपके MLC  ने कुशासन का काला धब्बा आपकी चम-चमाती सियासत पर पोत दिया है कैसे अनसुना करेंगे उस मां की ललकार जो चिल्ला-चिल्ला कर आपके सुशासन को खुले समाज में ललकार रही है...सुशासन वाली सरकार ने मदर्स-डे के मौके पर एक मां को उपहार उसके बेटे के लाश के रुप में दिया है....जय हो सुशासन राज।










Friday, 29 April 2016

अपराध के साथ बढ़ता बिहार...

      
पांचवी बार...नीतीशे कुमार... बिहार में बहार हो नीतीश कुमार हो ऐसे नारे जो हमारे कानों को सुकून देने वाले थे...जेडीयू नेताओं के लिए रामायण, वेद से भी ज्यादा पवित्र इस नारे के साथ नीतीश कुमार जब बिहार के सीएम बनें तो लोगों को लगा कि नीतीश अपनी छवी के साथ छल नहीं करेंगे.. बिहार के साथ न्याय करते रहेंगे उनके शासन में सुशासन का राज कायम रहेगा...कानून का राज रहेगा क्योंकि नीतीश कुमार सुशासन के नाम पर ही सियासत के सिहांसन पर विराजमान हुएं है , आज नीतीश की नजर दिल्ली में पीएम की कुर्सी पर है और नीतीश के नजरों के सामने उनका बिहार जल रहा है...नीतीश की जिस छवि को जनता ने छांव देना वाला समझकर वोट दिया था आज नीतीश ने अपनी छवि को बिहार में गड़गड़ाती गोलियों से छल्ली-छल्ली कर दिया है...नीतीश का सुशासन लालू से साथ नए सियासी समीकरण के साथ कुशासन में बदल गया है... आज बिहार के गलियों में, सड़कों पर खुलेआम गोलियों की गुंज आसमान में गड़गड़ात से साथ सुनी जा सकती है... 

12 फरवरी को जब बिहार बीजेपी के उपाध्यक्ष विशेश्वर ओझा की हत्या हुई तो सुशासन का राग अलापते जेडीयू के नेता ने कहा मारे गए लोग धरती के बोझ थेअगर बीजेपी नेता धरती के बोझ थे तो क्या आरा में जिस आरजेडी नेता की बहन की हत्या कर दी गई वो भी बोझ थी...पटना में जिस दारोगा की हत्या कर दी गई क्या वो भी थरती का बोझ था.... जिंदगी से दूर जाता और जिंदगी की जंग हारता हर इंसान अगर धरती का बोझ है तो क्यों नहीं नीतीश कुमार हर किसी को धरती का बोझ हल्का करने की खुली छूट दे दें....क्यों नीतीश कुमार जनता के नाम पर हर हफ्ते जनता दरबार लगाते है..



अगर बिहार में हर महीने औसतन 6 हत्याएं और ज्यादातार सत्ताधारी पार्टी के नेताओं की हत्या सुशासन हैं तो फिर जंगलराज या कुशासन क्या है...देश का प्रधानमंत्री बनने का सपने देख रहे नीतीश कुमार के लिए क्या सुशासन की परिभाषा बदल गई है...या नीतीश कुमार ने हत्या के साथ सुशासन के समीकरण की कोई नई किताब पढ़ ली हैं... या फिर सुशासन को लेकर सुशासन बाबू का टैग लिए नीतीश कुमार की सोच बदल गई है....लेकिन बिहार में सियासी हत्याएं जारी हैं कल बीजेपी के विशेश्वर ओझा धरती के बोझ थे..आज नीतीश के नजरों के सामने लालू के नेता मारे जा रहें हैं.....वाकई में बिहार की धरती का बोझ कम हो रहा है
बिहार में बहार के साथ नीतीश की बदलते छवि के कुछ आंकड़े


5 फरवरी को एलजेपी के नेता बृजनाथी सिंह की एके47 से हत्या
11 फरवरी ATM गार्ड की हत्या, 11 लाख की लूट
11 फरवरी छपरा में बीजेपी नेता की हत्या
12 फरवरी को बिहार बीजेपी के उपाध्यक्ष विशेश्वर ओझा की हत्या, जेडीयू के नेता ने कहा मारे गए लोग धरती के बोझ
16 फरवरी समस्तीपुर में आरेजेडी नेता विरेंद्र यादव के सहित दो लोगों की एके47 से हत्या
22 फरवरी आरा में माले नेता की हत्या

16 मार्च गोपालगंज में चुनावी रंजीश में माले नेता की  हत्या
25 मार्च रणवीर सेना के पूर्व कमांडर की गोलीमार कर हत्या

11 अप्रैल पटना में दवा व्यापारी की गोलीमार हत्या
11 अप्रैल मुजफ्फरपुर कोर्ट परिसर में पेशी के लिए आए कैदी की गोलीमार कर हत्या
12 अप्रैल आरा में राजद विधायक सरोज यादव की बहन को सरेआम छेड़ा, रॉड से पीटकर हत्या

17 अप्रैल को युवा राजद जिलाध्यक्ष श्याम सुंदर दास तांती की गोलीमार कर हत्या
18 अप्रैल छपरा कोर्ट में आत्माघाती हमला
18 अप्रैल- पटन के मरांची थाने बिहार में इंस्पेक्टर सुरेश ठाकुर की हत्या
27 अप्रैल को आरा में युवक की गोलीमार हत्या
28 अप्रैल को सहरसा में निवर्तमान मुखिया व राजद नेता अनिल की गोलीमार कर हत्या

28 अप्रैल को मोतिहारी के जिला आरेजेडी युवा अध्यक्ष हामिद रजा उर्फ राजू पर देर रात हमला , बाल-बाल बचे


Sunday, 27 March 2016

पहाड़ में ‘प्रेसिडेंट’ रुल

कई दिनों के सियासी उठापटक के बाद आज पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में प्रेसिडेंट रुल मतलब राष्ट्रपति शासन लागू हो गया राज्य में अगली सरकार बनने तक पहाड़ में राष्ट्रपति का राज होगा नाकि किसी राजनीतिक पार्टी का...राज्य में अगले 6 महीने में किसी पार्टी को बहुमत साबित करना होगा या फिर चुनाव होगा..उत्तराखंड में अगले साल 2017 में विधानसभा चुनाव होने है..राज्य के सियासी संकट को लेकर कल प्रधानमंत्री ने आनन-फानन में कैबिनेट की बैठक बुलाई थी माना जा रहा है कि इस बैठक में सरकार ने पहाड़ में प्रेसिडेंट रुल लगाने के लिए सिफारिश किया बैठक के 24 घंटे के अंदर राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हो गया...सरकार के इस प्रस्ताव को राष्ट्रपति ने भी मंजूरी दे दी और 16 साल वाले इस राज्य में पहली बार राष्ट्रपति शासन लग गया...प्रेसिडेंट रुल लागू होने के बाद कांग्रेस ने बीजेपी और पीएम पर पलटवार किया और आरोप लगाया कि लोकतंत्र में बीजेपी को भरोसा नहीं है, बीजेपी को लोकतंत्र पर विश्वास नहीं है...पीएम ने लोकतंत्र की हत्या की हैं...28 मार्च को हरिश रावत की कांग्रेस सरकार को सदन में बहुमत साबित करना था उत्तराखंड विधानसभा के 71 सीटों में 36 कांग्रेस के विधायक हैं जिसमें 9 विधायक कांग्रेस का हाथ छोड़कर बाग़ी हो चुके है ऐसे में कांग्रेस के पास सिर्फ 27 विधायकों का समर्थन है जबकि सरकार बनाने के लिए 36 विधायक जरुरी हैं...बाग़ी विधायक जिन्हे रावत की सरकार राज्य हितैषी नहीं लगती है रावत के मंत्रियों को लगता है कि हरिश रावत की सरकार में भरपुर भ्रष्टचार है जिसको हटाना पहाड़ की पॉलिटिक्स के लिए बेहद जरुरी है...हरिश रावत से पहले इस पहाड़ी प्रदेश के सीएम रह चुके विजय बहुगुणा को रावत की सरकार से भ्रष्टाचार की बू आती है क्योंकि विजय बहुगुणा को हटाकर ही हरिश रावत उत्तराखंड के सीएम बनें थें तो विजय बहुगुणा को भी हरिश रावत से अपनी राजनीतिक हिसाब बराबर करना था...उत्तराखंड के सियासी संकट पर बीजेपी ने भी अपनी राजनीतिक चाल को और तेज कर दिया और इस चाल को तेज करने में हरिश रावत के उस स्टिंग ने तेल का काम किया जिसमें हरिश रावत अपनी सरकार को सही सलामत रखने के लिए अपने सर पर ताज बनाए रखने के लिए बाग़ी विधायकों को खरिदने का काम कर रहे हैं उन विधायकों की बोली लगा रहे हैं जो रावत को छोड़कर राज्य में बीजेपी के साथ जाना चाहते है ताकि उनकी सरकार बची रही हरित प्रदेश में हरिश रावत का राज कायम रहे लेकिन केंद्र की बीजेपी सरकार ने पहाड़ में प्रेसिडेंट रुल लागू करा दिया...इससे पहले अरुणाचाल प्रदेश में जहां बीजेपी ने पहले राष्ट्रपति शासन लगाया और बाद में अपनी सरकार बनाने में सफल रहीं लेकिन सवाल है कि क्या अरुणाचल प्रदेश के तर्ज पर ही उत्तराखंड में बीजेपी अपनी सरकार बनाना चाहती है क्या मोदी और अमित शाह वाली बीजेपी राष्ट्रपति से सहारे ही किसी राज्य में राज करना चाहती है? क्या बीजेपी चुनाव से दूर रहकर सत्ता के करीब जाना चाहती है? क्या बीजेपी ऐसी ही कांग्रेस मुक्त भारत का सपना देख रही है? तो क्या बीजेपी का ऐ सपना भारतीय लोकतंत्र की सेहद के लिए ठीक है? क्या बीजेपी पर कांग्रेस का आरोप सही नहीं कि बीजेपी को लोकतंत्र पर भरोसा नहीं है....?
पीएम नरेंद्र मोदी
राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू होने और अपनी हाथ से सत्ता जाने के बाद हरिश रावत अपने दर्द को दबा नहीं पाएं और मीडिया के सामने अपने सियासी दर्द को सरेआम कर दिया..सरेआम कर दिया बीजेपी और पीएम के उस छलावे को जिसने हरिश रावत को सत्ताहीन बना दिया... जिसने हरिश रावत को सत्ता से बेदखल कर दिया... हरिश रावत ने पीएम मोदी पर हमला करते हुए कहा कि देश के प्रधानमंत्री ने जनता के भरोसा का खुन किया  है, मोदी जी ने हमारे सपनों का खुन किया है राज्य में राष्ट्रपति शासन के लिए पीएम ने राज्यपाल को धमकाया...उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन का कांग्रेस विरोध करेगी।   
हरिश रावत-सीएम-उत्तराखंड
उत्तराखंड के पूर्व सीएम विजय बहुगुणा ने केंद्र के राष्ट्रपति शासन लगाने के इस फैसले का स्वागत किया बीजेपी को बहुगुणा का साथ मिला और संभव होगा कि सरकार बनाने में विजय बहुगुणा बीजेपी का साथ देंगे..बहुगुणा ने रावत सरकार पर संगीन आरोप लगाते हुए बोले की राज्य में अवैध खनन जारी है राज्य में भ्रष्टाचार चरम पर है ऐसे में राष्ट्रपति शासन लगना जरुरी था...बहुगुणा ने आर्टिकल 356 का हवाले देते बोले कि जिस राज्य में सीएम असवैधानिक तरीके से अपनी सरकार बचाने के लिए हर हथकंडे अपना रहा हो जिस राज्य में विधानसभा अध्यक्ष अपने अधिकारों को बेजा प्रयोग कर रहा हो उस राज्य राष्ट्रपति शासन लगना जरुरी था..लेकिन बहुगुणा को ऐभी उम्मीद है कि राज्य में सरकार जल्द ही बनेगी चाहे बहुगुणा सरकार बनाने के लिए बीजेपी का साथ दें। फिलहाल उत्तराखंड विधानसभा निलंबित है भंग नहीं।
विजय बहुगुणा-पूर्व सीएम-उत्तराखंड

      

Wednesday, 2 March 2016

'साहब' को बेल

 बिहार में सीवान के चर्चित दोहरे अपहरणकांड और तेजाब कांड में आजीवन कैद की सजा काट रहे है जेल में बंद...बाहुबली आरजेडी के पूर्व सांसद शहाबुद्दीन को आज पटना हाईकोर्ट ने जमानत दे दी...जस्टिस अंजना प्रकाश की बेंच ने मामले की सुनवाई करने के बाद पूर्व सांसद शहाबुद्दीन को जमनात देने का फैसला सुनाया
पिछले साल 11 दिसंबर 2015 को स्पेशल कोर्ट के एडिशनल जज ने शहाबुद्दीन को हत्या, अपहरण और दफा 120बी के तहत पूर्व सांसद को उम्रकैंद की सजा सुनाया गया थी..जब शाहाबुद्दीन को उम्रकैद की सजा हुई की व्यापारी चंदाबाबू को लगा कि हमारे बेटों के हत्यारें को कानून ने सजा दी, मेरे बेटों को इंसाफ मिला..नीतीश के बिहार के कानून का राज है लेकिन आज जब पटना हाईकोर्ट ने शहाबुद्दीन को जमानत देने का फैसला सुनाया तो पीड़ित परिवार टूट गया.. 


चांदबाबू-हत्या कर दी गई बेटों के बांप
छोटे से एक कमरे अपनी जिंदगी काट रहे है दो बेटों के हत्या हो जाने का दर्द झेल रहे बुढ़े मां-बाप के लिए समझ पाने बड़ा मुश्किल था जब उन्हे इस बात की खबर मिली की उनके बेटे के हत्यारे शहाबुद्दीन को पटना उच्च न्यायालय ने बेल दे दिया है..न्यायालय की नजरों में शहाबुद्दीन दोषमुक्त हो गया है...पूर्व सांसद के बेल को मृतक के पिता ने गलत करार दिया है दो बेटों के मौत का दर्द झेल रहे बांप ने कहा कि शहाबुद्दीन को बेल नहीं बल्कि फांसी होनी चाहिए थी, उनके बेटों को मौत की निंद सुलाने वाले को मौत की सजा मिलनी चाहिए थी..बांप का दर्द समाज को लेकर भी था इस बेल से समाज को गलत संदेश जाएगा बुढ़े बांप को गरीब होने का भी दर्द है की उसके पास पैसे नहीं वो कैसे क्या करेगा इस बुढ़े बांप को कुछ समझ नहीं आ रहा है, बुढ़ी मां को भी इस बात का दर्द है जो निचली अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है उसे कैसे बदल दिया गया मेरे तीन बेटों के हत्यारों को केसै छोड़ दिया गया है..
हत्या कर दी गई लड़को की मां
पूर्व सांसद शहाबुद्दीन ने 12 साल पहले 16 अगस्त 2004  में एक व्यापारी चंदा बाबू के के तीन बेटों को अपहरण कर लिया था बाद में दो बेटों सतीश कुमार, गिरीश कुमार का शव तेजाब से जला पाया गया था जबकी चांद बाबू का तीसरा बेटा राजीव रौशन वहां से भागकर अपनी जान को बचाने में कामयाब रहा था...दो युवकों के हत्या का गवाह और चांद बाबू का तीसरा बेटे राजीव रौशन की हत्या 2014 में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
शहाबुद्दाीन-फाईल फोटो



एनकाउंटर 'चक्रव्यूह' में फंसे चिदांबरम

आतंकी इशरत जहां एकाउंटर मामले में पूर्व गृह मंत्री पी चिदांबरम पर अधिकारियों पर दबाब बनाकर हलफनामा बदलवाने का मामला सामने आया है...एनकाउंटर 'चक्रव्यूह' में पी चिदांबरम फंसते नजर आ रहे है कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही है...देश के पूर्व गृह सचिव जीके पिल्लई ने दावा किया  हेै कि यूपीए सरकार में इशरत जहां को लेकर हलफनामा में बदलाव सरकार के दबाब में किया गया था..  पिल्लई ने कहा कि इशरत मामले में हलफनामा चिदांबरम खुद बोलकर लिखवा रहे थे इसलिए किसी अधिकारी ने देश के पूर्व गृहमंत्री का विरोध नहीं किया. तो क्या चिदांबरम अधिकारियों को वैसे ही लिखवा रहे थे, जैसे कोई मास्टर पहली क्लास के बच्चे को बोल-बोल कर लिखता वाता है कि बच्चा लिख 'इ' से 'इमली'  होता है और 'ब' से 'बेल' होता है... मास्टर का दबाव बच्चों पर उनके उज्जल भविष्य से लिए होता है. लेकिन चिदांबरम का अधिकारियों पर दबाव देश को बर्बाद करने वाले आतंकियों के लिए था..चिदांबरम लिखवा रहे थे और अधिकारी लिख रहे थे 'इ' से 'इशरत' ब से 'बेगुनाह' है....

पी-चिदांबरम-फाईल


 पिल्लई ने दावा  कि एनकाउंटर को लेकर जो हलफनामा अधिकारियों ने बनाया था उसमें इसबात का जिक्र था कि इशरत जहां के संबंध आतंकियों के साथ थे और इशरत जहां लश्कर-ए-तयैबा की फिदाय़ीन हमलवार थी जो गुजरात के तत्कालीन सीएम और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या के साजिश में शामिल थी...गृह विभाग के ही एक अधिकारी आरवीएस मणी ने नया खुलासा करते हुए कहा कि मनमोहन सरकार के वक्त पर उन पर इस बात का दबाव था कि हलफनामें में इशरत को आतंकी न बताया जाए... इस बात के लिए मणी को सिगरेट से जलाया गया , सीबीआई उनका पीछा करती थी..मणी को मनमोहन की सरकार अपने मुताबिक चलाने चाहती थी, मनमोहन के मंत्री पी चिदांबरम अधिकारियों को परेशान करते थे, उनको सिगरेट से जलवाते थे अपने मनमाफिक हलफनामा बनवाना चाहते थे ....सवाल उठता है की गृह विभाग के एक बड़े अधिकारी को जलाने वाले अधिकारियों का आका कौन है, कौन उसे मणि को जलाने के लिए आदेश देता था..मणी के आरोपों से देश की सियासत में कांग्रेस की कलई खुल गई है कि कैसे कांग्रेस ने सियासी फायदे के लिए एक आतंकी को आतंकी नहीं बताने के लिए किस तरीके से गृह विभाग के अधिकारियों के भयभीत किया... इशरत जहां मुठभेड़ को लेकर यूपीए सरकार ने एक नहीं दो-दो हलफनामा पेश किया था 6 अगस्त 2009 को पहले हलफनामें में इशरत को आतंकी बताया गया था जबकि 30 सितंबर 2009 दूसरे हलफनामें में यूपीए सरकार ने अपने  पहले ही हलफनामें को गलत बताते हुए इशरत को आंतकी बताने से ही इनकार कर दिया था..सवाल उठता है क्यों सरकार के अलग-अलग दो हलफनामों में इशरत को आतंकी बताने से लेकर इशरत को आतंकी नहीं बताने तक का जिक्र किया गया..आखिर सरकार ने देश को क्यों नहीं बताया कि इशरत आतंकी थी आखिर एक आतंकी पर मनमोहन के मंत्री क्यो मोहित थे ...इशरत  आतंकी थी उसे पी चिदांबरम क्यो बचाने चाहते थे ...अधिकारियों के खुलासे के बाद पी चिदांबरम ने बताया कि देश के गृह मंत्री रहते हुए इशरत को आतंकी न बताने वाला हलफनामा सरकार ने इसलिए बनाया कि वो कानून के सामने सरकार का सही पक्ष रख सके...वो बता सके कि इशरत आतंकी नही थी...चिदांबरम ने पिल्लई की नीयत पर ही सवाल उठा दिया,  2004 में गुजरात पुलिस ने  4 आतंकियों के साथ इशरत जहां का अहमदाबाद में एनकाउंटर किया था.....पुलिस का दावा था इशरत के लश्कर-ए-ताइबा से संबंध थे जो तत्तकालीन गुजरात के सीएम और देश के प्रधानमंत्री की हत्या करने आई थी यूपीए सरकार के वक्त मुबई हमले का मुख्य आरोपी डेविड हेडली ने 2010 में एनआईए से कहा  की इशरत लश्कर-ए-ताइबा की आतंकी है..इस पर कांग्रेस की  अलग राय है और  आज भी कांग्रेस इशरत एनकाउंटर को फर्जी एनकाउंटर बता रही है... 2004 में इस एनकाउंटर को कांग्रेज ने फर्जी एनकाउंटर बताया था और आरोप लगाया था कि मोदी के इशारे पर इशरत को आतंकी बताकर मरवाया गया है कांग्रेस ने इशरत के सहारे सियासी कमाई भी खुब किया ....मोदी को बदनाम करने की कोशिश कांग्रेस ने खुब की लेकिन कांग्रेस आज उसी बदनामी की चौखट पर खड़ी है जिस चौखट पर 12 साल पहले कांग्रेस ने मोदी को खड़ा किया था..जिस इशरत को कांग्रेस ने मोदी के खिलाफ सियासी ढाल बनाया था, आज वही इशरत बीजेपी और मोदी के लिए कांग्रेस के खिलाफ सियासी बाण बन चुकी है जिसकी चोट से कांग्रेस फिलहाल बचती नजर नहीं आ रही है...



 12 साल बाद इशरत जहां एनकाउंटर का सियासी जहां एक बार फिर गरम हो गया..बीजेपी संसद से सड़क तक हल्ला बोल के मूड में है इस मुद्दे पर बीजेपी कांग्रेस का सियासी एनकाउंटर की तैयारी में है... इशरत जहां के एनकाउंटर को लेकर सियासी जहां का पारा खुब चढ़ा इस मसले को लेकर कांग्रेस ने बीजेपी का सियासी एनकाउंटर भी खुब किया आतंकी इशरत को कई पार्टियों ने अपनी बेटी बताया तो किसी ने इशरत को शहीद बताया, लेकिन सियासत के लिए आतंक को संरक्षण देना देश के सुरक्षा के साथ बाड़ा घात है....गृह विभाग के अधिकारियों ने चिदांबरम की पोल खोल दी है तो क्या कांग्रेस सियासी फायदे के लिए मोदी को दोषी साबित करने के लिए बीजेपी को मुस्लिम विरोधी और अपने को मुस्लिम हितैषी बताने कि लिए देश के सुरक्षा के साथ समझौता भी कर सकती है,  12 साल पहले इशरत का एनकाउंटर हुआ था तो क्या अब अधिकारियों के खुलासे के बाद देश के पूर्व गृह मंत्री पी चिदांबरम का  सियासी एनकाउंटर होगा।

Friday, 11 December 2015

बाहुबली शहाबुद्दीन को सजा

बिहार के सीवान में चर्चित तेजाब हत्या कांड में आरजेडी के पूर्व सांसद और बिहार के सियासत में बाहुबली नेता शहाबुद्दीन को तीन युवकों के हत्या के आरोप में आज फैसला आया फैसले में कोर्ट  ने शहाबुद्दीन को दोषी करार देते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई है ये सजा सहाबुद्दीन को स्पेशल कोर्ट की ओर सुनाया गया है... स्पेशल कोर्ट के अडिशनल जिला जज अजय कुमार ने शहाबुद्दीन समेत 3 लोगों को हत्या,अपहरण, सबूतों को नष्ट करने और दफा 120B के तहत ये सजा सुनाई है..शहाबुद्दीन को सभी मामलों में सजा एक साथ चलेगी...एक दशक पहले बिहार के सीवान में 16 अगस्त 2004 को दुकान से एक व्यापारी चंदा बाबू के तीन बेटों को सहाबुद्दीन के तीन लोगों ने अपहरण कर लिया था बाद में दो बेटों सतीश कुमार, गिरीश कुमार का शव तेजाब से जला पाया गया था जबकी चांद बाबू का तीसरा बेटा राजीव रौशन वहां से भागकर अपनी जान को बचाने में कामयाब रहा..पीड़ित की मां कलावती देवी ने अपने बेटों के हत्या के मामले में शहाबुद्दीन और उनके तीन वफादारों पर हत्या का मामला दर्ज कराई थी...

फाईल-कोर्ट

इस पूरे मामले में जिस दिन और जिस समय दो युवकों की हत्या हुई उस दिन बाहुबली पूर्व आरजेडी सांसद सीवान के जेल में बंद थे ऐसा जेल प्रशासन का दावा है लेकिन पीड़ित परिवार और मृतकों के पिता की माने तो जब उनके बेटों को बेरहमी से तेजाब से नहलाकर  मारा जा रहा था उस वक्त आरजेडी सांसद और दो युवकों का हत्यारा सांसद शहाबुद्दीन वही मौजूद थे और चंद्रकेश्वर प्रसाद उर्फ चंदा बाबू के बेटों की मौत का तमासा देख रहा थे कि कोई इंसान तेजाब से जलकर कैसे तिलतिला कर मरता है.. लेकिन इस फैसले के बाद साफ हो गया कि शहाबुद्दीन के पाप के साथ प्रशासन भी था और सांसद साहब को संरक्षण देने की पूरी जुगत में था... 11 साल बाद 9 दिसंबर 2015 को जब सीवान के चर्चित तेजाब कांड का फैसला आया तो जेल में बंद शहाबुद्दीन के जेहन में 11 साल पहले तेजाब कांड की शर्मनाक यादे ताजा हो गई... बाहुबल के नाम पर अपनी सियासत को जिंदा रखना वाले शहाबुद्दीन को करारा झटका लगा शहाबुद्दीन को कोर्ट ने दोषी करार देते हुए तय किया कि 11 दिसंबर 2015 को शहाबुद्दीन के सजा का एलान होगा...जिला न्यायलय ने 11 दिसंबर को शहाबुद्दीन को उम्र कैद की सजा सुना दी ...कभी संसद में बैठकर देश के कानून बनाने और कानून तोड़ने वालों पर चर्चा करने वाले पूर्व सांसद शहाबुद्दीन अब खुली हवा में सांस नहीं ले पाएंगे...शहाबुद्दीन को उम्र कैद की सजा हो गई, लोगों को न्याय से दूर रखने वाले सांसद के साथ न्यायपालिका ने न्याय कर दिया है दो युवकों की हत्या के आरोप में दोषी करार दिया है...दो युवकों के हत्या का गवाह और चांद बाबू का तीसरा बेटा राजीव रौशन की हत्या 2014 में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

फाईल-शहाबुद्दीन

11साल बाद जब जिला जज ने तेजाब कांड में शहाबुद्दीन को उम्रकैद की सजा सुनाई तो पीड़ित परिवार का न्यायपालिका में भरोसा बढ़ गया...फैसले के बाद  मृतक के पिता चंदा बाबू ने कहा कि हम इस फैसला का सम्मान करते है लेकिन ये फैसला भी कम है क्योंकि हमे अभी भी शहाबुद्दीन का भय है..जिला न्यायालय के इस फैसले के बाद शहाबुद्दीन की पत्नी और आरजेडी के टिकट पर कई बार चुनाव लड़ चुकी हिना शहाब ने कहा कि मैं इस फैसले को मैं उच्च न्यायालय में चुनौति दूंगी शहाबुद्दीन की पत्नी शहाब को जिला जज का न्याय मंजूर नहीं अपने पति को न्याय दिलाने के सहाब कई न्यायालयों का दरवाजा खटखटाएंगी जिससे शायद को कोई चमत्कार हो जाए और शहाब के पति शहाबुद्दीन की सजा शायद कम हो जाए...
फाईल-हीना साहाब (शहाबुद्दीन की पत्नी)