Monday, 11 May 2015

अम्मा हुई बरी

19 साल पुराने आय से अधिक संपति के मामले में  तमिलनाडु के पूर्व सीएम जयराम जयललिता को  कर्नाटक हाईकोर्ट ने उन सभी आरोपों से बरी कर दिया जो 19 साल पहले साल 1996 में  अम्मा पर भ्रष्टाचार के आरोप लगें थे आज उन सभी आरोपों का अंत हो गया.. अम्मा आज आजाद हो गई, जेल की जंग जीत गई, राजनीति की राह पर फिर से चलने को तैयार हो गई कर्नाटक हाईकोर्ट के इस अहम फैसला ने  तमिलनाडु के पूर्व सीएम को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया जिससे अम्मा के राजनीतिक राज पर आंच आ रही थी आज वो सभी आरोप आग में जल गए, पानी में घुल गए,  क़ानून की स्याही से मिट गए. अम्मा के आंचल में सारे आरोप छीप गए..

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद उन सभी आरोपों पर विराम लग गया जो जयललिता पर आज तक लगते रहे थे जिस भ्रष्टाचार को लेकर जया की तुलना देश के दूसरे नेताओं से कि जाती आज अम्मा उन नेताओं से परे होकर उन आरोपों से बरी हो गई..एक बार फिर से अम्मा के  तमिलनाडु की सीएम बनने का रास्ता साफ हो गया इस फैसले के बाद जया अब चुनाव लड़ सकती है कोर्ट के फैसले से डीएमके की राजनीति को झटका लगा डीएमके नेताओं ने इस फ़ैसले का विरोध किया , बीजेपी नेता सुब्रामणयम स्वामी ने इस फ़ैसले पर आशचर्य जताया तो फैसले के बाद AIADMK नेताओं ने खुशी जताई क्योंकि आज अम्मा आजाद हैं..

जया के सियासत शक्ति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 2014 आम चुनाव में तमिलनाडु के 39 सीटों में से जया ने 37 सीटों पर जीत दर्ज की इस चुनाव में डीएमके चारों खानों चित हो गई और अम्मा हर बाजी को जीत गई ..आज अम्मा ने एक और बाज़ी जीत ली,  इसी को कहते है सियासत की शक्ति आखिर सत्ता से ही तो कानून बनता है कानून भी तो सत्ता का हि है तो कानून सत्ता से अलग कैसे अलग हो सकता है कर्नाटक हाईकोर्ट के इस फैसले ने बता दिया कि सत्ता और कानून की शक्ति समान है ये एक दूसरे के पूरक है ना कि एक दूसरे से अलग..  अम्मा आज भ्रष्टाचार के आरोपों से मुक्त हो गई तमिलनाडु के पूर्व सीएम पर आरोप 1996 में  लगे थे जिसका फैसला 19 साल बाद आया , 19 साल के फैसले में 19 पड़ाव आये जया से 1339 सवालों के जवाब मांगे गए सवाल कई थे पर जया का जवाब एक मैं निर्दोष हूं मैंने कुछ नहीं किया जया पर आरोपों की सुनवाई होती रही तारीख दर तारीख अम्मा की कोर्ट में पेश होती रही जिरह और सुनवाई जारी  रहे  सवालों और जबावों का दौर चलता रहा इस दौरान जयलिलता तमिलनाडु की तीन बार सीएम बनीं.

इस फैसले से पहले सितंबर 2014 में निचली अदालत ने फैसला सुनते हुए जया को 4 साल की जेल और 100 करोड़ के जुर्माने की सज़ा सुनाई थी  कई आरोपों में घिरी अम्मा राजनीति में आने से पहले जयललिता ने 120 तमिल फ़िल्मों में काम किया अपनी आदाकारी से लोगों को खुब लुभाया मनोरंजन की दुनिया में राज करने के बाद जयलिलता ने राजनीति का रूख किया तो साल 1989 में अम्मा  तमिलनाडु विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनीं सियासत के समाज में जया की ये पहली पारी थी जब अम्मा ने लोगों में एक विकल्प की अलख जगाई जनता की बातों को जनता के साथ की, जनता के लिए जनता के साथ बात करते हुए अम्मा 1991 में पहली बार  सीएम बनीं 1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस गठबंधन के साथ अम्मा सत्ता में आई बंपर बहुमत के साथ 234 में से 225 सीटों पर जीत दर्ज की ये तमिल की राजनीति में अब तक किसी भी पार्टी की सबसे बड़ी जीत थी...ये   प्रदेश की राजनीति में  जया की धमाकेदार जीत थी जब जनता ने जया का भरपूर साथ दिया अम्मा को सरआंंखों पर बैठा लिया जानकी रामचंद्रन के बाद जया AIADMK की दूसरी महिला नेता थी जिसे जनता ने प्रदेश की कमान दी जिसपर तमिल की जनता ने भरोसा दिखाया लेकिन जब जब जनता ने जया पर भरोसा दिखाया तब-तब जया पर गंभीर आरोप लगे...पहले कार्यकाल में जया पर आय से अधिक संपत्ति रखने का मामला आया तो 2001 के दूसरे कार्यकाल में तनसी भूमी घोटाले में नाम आया भूमि मामले में कोर्ट ने फ़ैसला सुनाते हुए जया को 5 साल की सजा सुनाई तो ये दूसरा मौका था जब जया को सीएम रहते कुर्सी छोड़ जेल जाना पड़ा लेकिन तनसी भूमि घोटाले में कोर्ट ने जया को बरी किया और 5 महीने बाद जया फिर से तमिलनाडु की सीएम बनीं जया पर घोटालों के आरोप तो लगते रहे लेकिन उन आरोपों से अम्मा  हमेशा बचती रही और अपने आप को सही साबित करती रही आय से अधिक संपत्ति रखने का मामला हो या तनसी भूमि घोटाले की आंच हर बार अम्मा आरोपों से बचती रही..

 घोटाले के आरोप में जब-जब जया जेल गई ओ पनीरसेलवम जया के उत्तराधिकारी बनें जया के जेल जाने के बाद पनीरसेलवम हर बार सीएम बने.. पनीरसेलवम जया के सबसे करीबियों और वरिष्ठ मंत्रियों में से है,,,तमिलनाडु में जया के जादू  के जलवे का अंदाजा इस बात से लगा सकते है , जनता जया के लिए इसकदर पागल है, जया के लिए जनता जान भी देती है साल 2014 में जयललिता के खिलाफ आए फैसले के बाद जया के कई सर्मथकों ने अपने आप को आग के हवाला किया को कईयों के जहर खाकर जान दी.. अम्मा के आंचल से तमिल के लोगों को इतना प्यार जिसका अंदाजा आप कभी नहीं लगा सकते ..अगर आप लगाने चाहे तो इनके जान की कीमत लगा सकते है जो अम्मा के लिए कुछ भी कर सकते है, जी सकते है,  मर सकते है , अम्मा के लिए कुछ भी कर सकते है आखिर यही तो अम्मा का प्यार है जो जनता जया के लिए दिखाती है अम्मा के लिए प्यार तो होना ही चाहिए क्योंकि अम्मा- अम्मा होती है आखिर जया तमिल की अम्मा हैं...

ये जया थी जिसने डीएमके को सत्ता से बेदखल किया जब तमिल के लोगों को लगा कि अम्मा ही अण्णा का विकल्प हो सकती है जनता ने जया को सत्ता के सिहांसन पर बिठाया पर जयललिता का पहला कार्यकाल ही जया के लिए काल साबित हो गया और 68 करोड़ के भ्रष्टाचार का आरोप लगा,  अम्मा पर आय से अधिक के संपत्ति रखने का आरोप लगा आय  को लेकर जया पर जांच की आच आई सीएम पर गैरतरीके से आय कमाने का आरोप लगा, दो नंबर के पैसे रखने का इल्ज़ाम लगा,  भारत के राजनीति में पहला मौका था जब किसी सीएम के घर पर उसी की पुलिस ने छापा मारा आम्मा के आलीशान बंगले पर पुलिस के छापे में 23 किलों सोना, 1165 किलो चांदी ,91 घड़िया और करीब 12,000 साड़ियों को बरामद किया..जया कि पुलिस ने ही अम्मा की संपत्ति को अपने कब्जे में कर लिया..

आय से अधिक इस मामले में अम्मा के साथ उनकी साथी शशिकला के साथ चार लोगों पर आरोप तय हुआ..अम्मा पर लगे आरोपों की वजह से जया कि राजनीति को भी नुकसान हुआ और 1996 के चुनाव में जया को तमिल की जनता ने सत्ता से हटाकर डीएमके पार्टी के करुणानीधि को प्रदेश की कमान दे दी, 1996 में जब करूणानिधि सत्ता में आए तो अम्मा के घोटालों की जांच हुई,, अम्मा के घोटालों की जांच में कानून से ज्यादा राजनीति हुई ,,साल 1997 में आय से अधिक संपत्ति मामले में अम्मा पर केस दर्ज हुआ सवालों और बयानों का दौर शुरू हुआ तारीख पर तारीख मिलती गई और अम्मा फैसले का इंतज़ार करती रही..जया से जनता का मोह तो भंग हो गया पर अण्णा से ज्यादा  उम्मीदे अम्मा से बनी रही तमिल की जनता ने जयललिता को एकबार फिर सत्ता में बिठाया और 2001 में जया तमिलनाडु की दूसरी बार सीएम बनीं लेकिन विवादों ने जया साथ नहीं छोड़ा और एकबार फिर तनसी भुमि घोटाले में जया का नाम आया तो कुर्सी छोड़नी पड़ी..पनिरसेलवम तमिलनाडु के सीएम बने ,,मामला आगे बढ़ा  और 2002 में सुप्रीम कोर्ट से इस केस को बेंगलुरू भेज दिया.. 19 साल बाद 1339 सवालों के जवाब देने के बाद अम्मा आज आज़ाद है सूत्रो की माने तो 17 मई को जयललिता सीएम पद की शपथ लेंगी





Sunday, 10 May 2015

केजरीवाल के खिलाफ 'खबरनीशों' की खैर नहीं


दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की सरकार ने एक सर्कुलर जारी किया कि वो खबर जो सरकार की साख को धूमिल करने सीएम की सियासत पर सवाल करने या केजरीवाल के सिपाहियों पर संशय करने या अरविंद की अपेक्षाओं से अलग होनी वाली खबर होगी तो  उन खबरनिशों पर खैर नहीं, खबरनिशों की खाल उधेड़लेगे केजरीवाल, केजरीवाल सरकार मानहानि का केस करेगी..जो खबर अरविंद के मुताबिक नहीं होगी  जो खबर केजरीवाल के आखों को सुकून नहीं देगी जो खबर कानों को वैभव की अनुभूति ना दे तो उस खबर के खिलाफ केजरीवाल कर्रवाई करेंगे उस मीडिया के खिलाफ अरविंद मानहानि का केस करेंगे उस मीडिया का अरविंद मुंह बंद कर देंगे जिस मीडिया की भाषा अरविंद की अपेक्षाओं  को पूरा नहीं करेगी जो सीएम पर सवाल खड़ा करेगी उस मीडिया की केजरीवाल खाल खीच लेंगे क्योकि केजरीवाल को सवाल पसंद नहीं जिस  अखबार की सुर्खिया अरविंद के अनुरूप ना होगी टीवी स्क्रीन का  क्रोमा केजरीवाल के माफिक नहीं होगा जिस मैगजीन का कवर पेज केजरीवाल के कैरेक्टर का बखान नहीं करेगी तो उसे केजरीवाल जेल भेज देंगे क्योंकि केजरीवाल को सवाल पसंद नहीं...

दिल्ली के सीएम अरविंद ने अपने अधिकारियों को आदेश दिया कि जो मीडिया हमारे काम पर सवाल खड़ा करे हमारी छवि को धूमिल करे हमारे काम को गलत बताएं हमारे काम को सही ना कहे  उस मीडिया पर मुंह बंद करों उसपर मानहानि का केस  करो केजरीवाल को बदनाम करने वाली मीडिया को सेंसर करो क्योकि केजरीवाल को सवाल   पसंद नहीं सीएम के सियासत पर सवाल पसंद नहीं है दिल्ली के सुल्तान को सवाल पसंद नहीं..आज केजरीवाल उस मीडिया पर सेंसर चाहते है जिस मीडिया ने मुन्ना से केजरीवाल और अरविंद से सीएम अरविंद केजरीवाल बनाया आज उस मीडिया पर अरविंद अंकुश चाहते उस मीडिया पर सेंसर चाहते है क्योंकि आज मीडिया ने अरविंद की आकांक्षाओं पर सवाल किया अरविंद की सियासत पर सवाल किया..अरविंद मीडिया पर अंकुश चाहते है क्योंकि मीडिया ने उन पर सवाल किया एक लोकतांत्रिक हिस्से के हिसाब से जवाब मांगा तो केजरीवाल सवालाें पर कांप गए और मीडिया की पब्लिक ट्रायल की बात पर आ गए क्योंकि अरविंद आज मीडिया पर अंकुश चाहते है आज सावाल से भाग रहे हैं निष्पक्ष की बात कर रहे हैं सत्ता के सिंहासन पर काबिज होने से पहले अपने विरोधियों के खिलाफ रोज नए खुलासे करते समय केजरीवाल भूल जाते थे की शायद मीडिया ही उनकों दिखा रही है तो लोग केजरीवाल को देख रहे है लोग अरविंद को सुन रहे क्योकि मीडिया उनको लोगों को सुना रही है शाय़द केजरीवाल मीडिया को सेंसर तब नहीं करना चाहते थे जब वो सत्ता के वैभव से कोशों दूर थे पर आज अरविंद देश की राजधानी  दिल्ली के मुखिया है भारी बहुमत के साथ दिल्ली के सत्ता पर विराजमान है आज अवरिंद एक मंझे सफेदपोश नेता की तरह मीडिया पर सवाल खड़े कर रहें है तो मीडिया पर सवाल करने पर विरोधी केजरीवाल पर सवाल खड़े कर रहे है जो कभी-कभी खुद भी मीडिया पर सवाल खड़े करते रहे है लेकिन अवरिंद का मीडिया पर अंकुश करने की आकांक्षा अलग है अरविंद उन नेताओं से कई कदम आगे निकल गए और मीडिया पर कार्रवाई करने  तक की सोच गए मीडिया को लेकर उतना सोच और बोल गए जितना सोचकर सत्ता में आए थे आज अरविंद मीडिया पर अंकुश लगाने की सोच रहे है क्योकि सवाल उनसे बहुत हैं पर जवाब सिर्फ एक  मीडिया पर सेंसर ..मीडिया की देन और अन्ना आंदेलन से उपजे और उभरे अरविदं केजरीवाल को लोगों ने जाना क्योंकि मीडिया ने अरविदं को लोगों तक पहुंचाया, लोगों ने केजरीवाल को सुना क्योंकि मीडिया ने देश दुनिया में केजरीवाल को सुनाया साल 2011 अन्ना आंदोलन में अन्ना के साथ मंच पर एक युवक को मीडिया ने देखा जिसे भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने को लेकर बोलते पाया जिसे मीडिया ने बनाया जिसे फर्श से अर्श पर बैठाया जो तिनका था उसे ताड़ बनाया जो मुन्ना था उसे अरविंद केजरीवाल बनाया आज मीडिया पर अरविंद अंकुश चाहते है क्योकि अरविंद की सियासत पर कोई सवाल करे केजरीवाल को  पसंद नहीं वो खबर पसंद नहीं जो केजरीवाल की सरकार पर सवाल खड़े करे..केजरीवाल मीडिया पर अंपनी अक्श चाहते है क्योंकि केजरीवाल की सत्ता पर मीडिया का सवाल अरविंद की सियासी समाज के लिए ठीक नहीं, जिस मीडिया की देेन है अरविंद केजरीवाल आज उस मीडिया पर सेंसर चाहते है शायद मीडिया पर सेंसर ही अरविंद की सियासत के लिए अनुरूप हो..अरविंद का मीडिया पर अंकुश इसलिए क्योंकि केजरीवाल का आरोप मीडिया सरकार की छवी बिगाड़ने की साज़िश कर कर रही है अपनी सरकार पर खड़े हो रहे सवालों पर अरविंद को मीडिया की साज़िश दिखती है लेकिन ये वही मीडिया जो पिछली सरकारों पर सवाल खड़ी करती थी तो अरविंद मीडिया के इन सवालों का सहारा लेकर अपनी राजनीति चमकाते थे और आयदिन किसी ना किसी के खिलाफ खुलाशों का पिटारा खोलते थे जिस मीडिया पर अरविंद आज अंकुश चाहते है सेंसर चाहते है लगाम चाहते है उसी मीडिया के मार्फत सियासी सवाल करते थे मीडिया की खबरों का हवाला देते थे आज मीडिया पर अंकुश चाहते है क्योकि सवाल आज अरविंद से है..केजरीवाल सत्ता  के सिहासन पर बैठे दिल्ली के सुल्तान बनें है तो सवाल तो बनता ही है पर जबाब एक है केजरीवाल के खिलाफ खबरनीशों की खैर नहीं जो सुर्खियां अरविद के अनुरूप नहीं उनकलमवालों के कलम को केजरीवाल 'कलम' कर देंगे उस टीवी चैनल की चैन छीन लेंगे  जो केजरीवाल के खिलाफ हो जो अरविंद के अनुरूप ना हो उन खबरनीशों की केजरीवाल खाल खींच लेंगे क्योंकि केजरीवाल को सवाल पसंद नहीं केजरीवाल मीडिया का पब्लिक ट्रायल चाहते है क्योकि आज सवाल बीजेपी. कांग्रेस पर नहीं बल्कि सबसे अलग राजनीति करने वाली पार्टी आप पर है  ईमानदारी, सच्चाई की कॉपी राइट और फ्रेंनचायजी रखने वाली,  प्रेस पर सेंसर की बात करने वाली  आम आदमी पार्टी  पर है जिसे अपने खिलाफ सवाल पसंद नहीं अपने नापसंद का प्रेसवाला पसंद नहीं अपने सामने सरकार विरोधी सवाल करने वाला पसंद नहीं , पसंद है तो सिर्फ मीडिया पर अंकुश लगाना...आज सवाल केजरीवाल सरकार पर है आप पार्टी पर है केजरीवाल के करिबियों पर है अरविंद के मंत्रियों पर है तो मीडिया पर अंकुश तो बनता है क्योकि सच्चाई और ईमानदारी से केजरीवाल का साथ इसकदर है जैसे आत्मा और रूह तो भला मीडिया ऐसे ईमानदार शासक पर सवाल कैसे कर सकती है...


 मीडिया पर अंकुश लगाने की आकांक्षा अरविंद के मन में क्यों जगी ये बात समझना इतना ही जरूरी है जितना इमानदारी को समझने के लिए अरविंद को समझना...आप ईमानदारी को समझे या ना समझे लेकिन इमानदार होने के लिए अरविंद केजरीवाल को समझे क्योंकि ईमानदारी की कॉपीराईट सिर्फ और सिर्फ अरविंद के पास है..पर सरकार पर तो सवाल बनता है लेकिन केजरीवाल को सरकार पर सवाल पसंद नहीं चाहे बात आप के कुमार विश्वास के संबंधो को लेकर सवाल हो, केजरीवाल सरकार के क़ानून मंत्री की क़ानूनी शिक्षा को लेकर सवाल हो या केजरीवाल के चुनावी वादों को लेकर जिसमे केजरीवाल इस बार पर जोर देते कि पांच साल में 40 फीसदी वादें भी पूरें हो तो ब
ड़ी बात,  लेकिन कोई सरकार से सवाल तो ना करे  नहीं तो उनखबरनीशों की खैर नहीं...क्योंकि केजरीवाल कार्रवाई कर देंगे, दिल्ली के सुल्तान केजरीवाल के सिपहसलाहकार सिसोदिया मीडिया ट्रायल को सही बताते है जो खुद भी खबरनीश रह चुके है लेकिन सिसोदिया अब खबरनीश नहीं सरकार में हैं और सरकार मीडिया पर अंकुश चाहती है पार्टी के  नेता कुमार विश्वास के संबंधों पर मीडिया ने सवाल खड़े किए तो पार्टी के दूत संजय सिंह बोले की मीडिया खबर को बढ़ा-चढ़ा कर दिखा रही है और सुल्तान बोलें हमारे परिवर बच्चों को बख्श दों..केजरीवाल के लाल, कुमार विश्वास पर आरोप की आम चुनाव के दौरान उन्होने पार्टी की एक  महिला कार्यकर्ता के साथ संबंध बनाएं इस पीड़ित महिला की वेदना सुनिए आज जो खास विश्वास की आम पीड़ित है

लेकिन अरविंद महिला के आरोपों से खुद को अलग कर विश्वास का नीजि मामला बता रहे है लेकिन पीड़ित के बारे में कुछ भी नहीं बोल रहे है आज सुल्तान अरविंद मीडिया पर अंकुश चाहता है सवाल बड़े थे जवाब सिर्फ एक मीडिया पर सेंसर क्योकि सरकार को सवाल पसंद नहीं अरविंद के क़ानून मंत्री के शिक्षा पर सवाल उनके फर्जी डिग्री को लेकर  बवाल हुए तो मंत्री जी ने  मोदी सरकार की मंत्री ईरानी के डिग्री का हवाला देते हुए  हुए मोदी पर हमला बोल दिया ठीक उसी तरह जैसे खुद को सही बताने से अच्छा दूसरे को ग़लत बता दो तो मंत्री तोमर जी ने वही किया और ईरानी को ही फर्जी बता दिया...फिर वही सवाल क्या केजरीवाल के कौरव सही हैं इमानदारी की फ्रेंनचाइजी अरविंद के पास ,है तो  क्या  डिग्री छापने वाली मशीन ग़लत है या डिग्री देने वाली विश्वविद्यालय झूठा है तो सही कौन है केजरीवाल के मंत्री, डिग्री छापने वाली मशीन या वो विश्वविद्यालय जिसने तोमर को कानून की डिग्री दी, क्या डिग्री छापनी वाली मशीन की स्याही झूठी है जो केजरीवाल के रंग की तरह अपना रंग नहीं बदल सकती है या फिर केजरीवाल जो सबको अपने रंग में रंग देना चाहते है... सवाल कई है लेकिन सुल्तान को अपने खिलाफ , सत्ता के खिलाफ सवाल पसंद नहीं है 






Sunday, 19 April 2015

मुफ्ती का 'मसर्रत' मोह

मुफ्ती-मसर्रत

मसर्रत आलम अलगाववादी नेता एक अलग दुनिया का नेता देश को बांटने वाला नेता देशद्रोही नेता    जिस नाम से बुला लो अलग-अलग तरीके से एक ही नेता देशद्रोही मसर्रत आलम ..मुफ्ती का मसर्रत और पाकिस्तान मोह किसी से छुपा नहीं मुफ्ती सईद ने सीएम पद की शपथ लेते ही अपने शब्दों से देशद्रोह का आलम जगजाहिर कर दिया और जम्मू में  शांतिपूर्ण चुनाव के लिए अलगाववादियों और पाकिस्तानियों को इसका भरपूर श्रेय दे दिया वो श्रेय जिसका हकदार देश की सेना, चुनाव आयोग और आम जनता है ना कि अलगाववादी  लेकिन सईद मुफ्ती ने इसका पूरा अंक आलगाववादियों को दे दिया मुफ्ती का ये अलगाववादी मोह देख देश हैरान था परेशान था अलगाववादियों को लेकर देश आशंकित भी था लेकिन मुप्ती  आलगाववाद को लेकर अश्वस्त थे  देश के यही असली अंगरक्षक हैं अलगाववादी ही देशप्रेमी है..

 मुफ्ती ने सीएम बनते ही मसर्रत मोह दिखाया और इस देशद्रोही को 17 साल बाद जेल से रिहा कराया कई देशविरोधी गतिविधियों सहित 27 अपराधों में  शामिल मसर्रत आलम जब 17 साल बाद जेल से बाहर आया तो मानो कश्मीरी अलगाववादियों में अलग जान आ गई देशद्रोहियों की पहचान आ गई ये आलम था जो देशद्रोह के लिए जाना जाता था आज मुफ्ती की मोह से आलम आजाद देश हैरान है कश्मीर परेशान है ये कशमीर के लोग है जो जीने की आस के साथ  आज भी जन्नत में जिंदगी को आतूर है लेकिन डर आज भी है कि जीवन की आस किसके साथ लगाएं यहां तो हर कोई रकीब हैं किसको अपना हबीब बनाएं किसको कहे मेरे साथ कौन इनके करीब है  मसर्रत आज आज़ाद है पाकिस्तान से भारतविरोधी गतिविधियां स्वतंत्र है मसर्र्त किसी कि लिए आज साहब है तो किसी के लिए जिहाद है क्योकि भारत का सबसे बड़ा दुश्मन हाफिज सईद मसर्रत के साथ है आज  देशद्रोही   आलम आज़ाद है देश हैरान भारत में रहकर गो-इंडिया गो-इंडिया बोलने वाला आलम आज खुलेआम आग उगल रहा है अलगाववादी आज खुश है क्योंकि आलाम आज आज़ाद है...ये मसर्रत पर मुफ्ती का मोह है कि आलम आज फिर आज़ाद है


मुफ्ती का मसर्रत मोह  पाकिस्तान  प्रेम और अलगाववादियों का आदार एकबार फिर छलक गया कई सालों से छुपें मोह को मुफ्ती ने इसकदर उछाला कि शायद पाकिस्तानी और अलगाववादी भी नहीं संभाल सके और भारत का खाकर तेरी जान मेरी जान पाकिस्तान-पाकिस्तान के नारे अलगाववादियों के आवाज इस देशद्रोही नारे के साथ  आकाश में गूंजने लगा मसर्रत का इतिहास है कि भारत विरोधी को अभियानों को चलाकर पाकिस्तान मोह जता चुका है पाकिस्तान पाकिस्तान मेरी मेरी जान बता चुका है आलम आज आज़ाद है
देशद्रोही  मसर्रत का पाकिस्तान मोह इस कदर दिखा कि आलम भारत के खिलाफ आग उगला कश्मीर भारत का अंग नहीं तक कह डाला अपने आप को भारत का नागरिक नहीं बता डाला मसर्रत का दोशद्रोही आलाम देख आज हमसब हैरान है परेशान है आज आलम आज़ाद है मुफ्ती का मसर्रत मोह आज आलाम आज़ाद है देश हैरान ...

देशद्रोही आलाम को पुलिस ने गिरफ्तार किया देशगद्दार आलगाववादियों ने पुलिस पर पथराव किया अलगाववादियों के आग से घाटी से जल रही थी सुलग रही थी जमीन की जनन्त अपनी जिंदगी के लिए जद्दोजहत कर रही थी अपनी सुंदरता को आलगाववाद के आग तले जलते देख कराह रही थी अपनी खुबसूरती की दुहाई दे रही थी  घाटी  जल रही थी पुलिस मर रही थी..जिंदगी शरीर को छोड़ रही थी आलम गिरफ्तार हुआ बाहर कोहरमा हुआ आलम पर आफत आते देख पाकिस्तान परेशान हुआ हैरान हुआ पाकिस्तान परस्त मसर्रत पर पाकिस्तान में बैठा आतंकी का बयान आया मसर्रत जेहादी मैं उसका साथी हूं ..


मसर्रत आलम के गिरफ्तार होते ही अलगाववादियों ने कश्मीर बंद बुलाया सरकार के प्रति आलम के गिऱफ्तारी को लेकर विरोध जताया मुप्ती को मसर्रत मोह का याद दिलाया लेकिन केंद्र  सरकार का दबाव काम आया और मुफ्ती ने देशद्रोही मसर्रत को गिरफ्तार कराया आलम की गिऱफ्तारी देशद्रोही अलगाववादियों के लिए एक धक्का था इनके देशद्रोही मंशुबों पर लगाम था अलगाववादी आज आज़ाद था देश हैरान था परेशान था मसर्रत की गिरफ्तारी के बाद कश्मीर जल रहा था पुलिस पर पत्थर बरस रहे थे आलगाववादी सेना पर आग बरसा रहे थे मसर्रत के मोह में मुप्ती बैठकर तमासा देख रहे थे आलगाववादी  आग उगल रहे थे पत्थरबाज़ी की तस्वीरों में देखिए पुलिस मसर्रत मोह में प़ड़े इन युवकों को खदेड़ रही थी युवक पुलिस पर दनादना पत्थर बरसा रहे थे पुलिस इन आलगाववादी समर्थकों के आगे बेबस लाचार कर्महीन दिख रही थी पुलिस इन देशद्रोहियों से अपने आप को नहीं बल्कि भारत को बचा रही थी  आवगाववादियों की भारतविरोधी मंशा  साफ नजर आ रही थी आलम आज आज़ाद है..  एक और आलगाववादी नेता गिलानी भी आलम की गिरफ्तारी के गम से गमगिन था पुलिस पर पथराव होते देख गिलानी इसबात से खुश था कि अलगाववाद की आग कश्मीर की घाटी को जला रही है भारत की शान को दफना रही है ये सब देख देशद्रोहियों की शान बढ़ रही थी अलगाववाद के आग से कश्मीर की घाटी जल रही थी..पुलिस पर पथराव की तस्वीरे कश्मीर घाटी की है जहां अलगाववादियों का गढ़ है अलगाववादी इसकी छांव में आग उगलते है कश्मीर को अपने आग से दहकाते है घाटी को जलाते है आज कश्मीर जल रही है क्योकि देशद्रोही मसर्रत की गिरफ्तारी आलगाववादियों को नहीं भा रही है..ये सब देख हमसब हैरान है परेशान घाटी की आग पूरे देश को जला रही ही है अलगाववाद के आग से घाटी जल रही है







Wednesday, 15 April 2015

बिन ‘जनता’ की परिवार

फाइल फोटो

साल के आखिर में होने वाले बिहार विधानसभा चुनावों को देखते हुए मोदी को रोकने बीजेपी को पीछे छोड़ने राजनीति में अपने आप को आगे करने चुनावी जीत में बाज़ी जीतने और सियासत के समाज में जिंदा रहने की  रणनीति बनाते हुए आज बेनाम जनता परिवार के विलय की घोषणा हो गई विलय की घोषणा जेडीयू के अध्यक्ष शरद यादव ने कि जनता परिवार की घोषणा करते समय शरद के चेहरे की मुस्कान लालू के बातों  से सामने ढक रही थी और जनता परिवार से समाजवाद का परदा उठ रहा था..जनता परिवार का विलय एक ऐसा विलय जिस परिवार के लोगों में ना तो लय है ना हि एक दूसरे के लिए मय है और नाही तो पार्टी का संविधान , झंडा, नाम तय हैं फिर भी विलय के साथ राजनीति में जिंदा रहने  की बेइंतेहा आकांक्षा तय है देश की सियासत, राजनीति की अबो हवा, रूप रेखा दिल्ली से तय होती है लिहाजा जनता परिवार के विलय की रणनीति भी सामाजवाद के पथ पर संघर्ष करने वाले समाजवादी पार्टी के सुल्तान मुलायम सिंह के घर दिल्ली के 16 अशोक रोड विलय विचार की जगह तय की गई, मोदी को रोकने के लिए मंथन की जगह तय हुई 16 अशोक रोड ये वो रोड जहा दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी ऑफिस से मजह कुछ दूरी की जगह जहा बीजेपी के 'शाह' को मात देने की मुलायम ने मंत्र दिया...विलय पर मैराथन बैठक हुई इस मैराथन बैठक में 6 पार्टियां जेडीयू, जेडीएस. आरजेडी, आईएनएलडी,सजपा, सपा के सुरमाओं ने मंथन में शिरकत की मोदी को रोकने बीजेपी को सत्ता से बाहर करने परिवार की बात जनता तक पहुंचाने के लिए घंटों बैठक चली, लंबी बैठक चली सांप्रदायिक ताकतों से लड़ने वाली मंथन में तस्वीरें कुछ यूं जनता परिवार के प्रेम को दिखा रही थी मानों 18 साल पहले टूटी पार्टियों का प्रेम मिलन 18 मिनट के पत्रकार वर्ताओं में झलक रही थी ये तस्वीरे 18 साल पुराने रिश्तों को तरो ताजा कर रही थी जब लोहिया के आदर्शों पर चलने वाले सियासतदानों ने लोहिया के आदर्शों को लताड़ते हुए अपनी आकांक्षाओं को पूरी करने के लिए सबने अपनी अलग पार्टी के साथ राजनीति जमीन बनाई..मंथन में बिहार के सुशासन बाबू नीतीश थे, लालू भी थे केसी त्यागी भी थे देश के पूर्व प्रधानमंत्री गौड़ा भी थे लेकिन धर्मनिरपेकक्ष सियासतदानों के बीच लोहिया के आदर्श गायब थे लोहिया का समाजवाद गायाब था मौज़ूद था तो सांप्रादायिक ताकतों के खिलाफ लड़ने का एक राजनीतिक एजेंडा...18 साल पहले एक समाजवाद की पार्टी टूट कर 6 पार्टियों के रूप में उभरी थी आज वो दिन था जब जनताविहिन परिवार एक मंच पर एक साथ एकजुट दिख रही थी तो क्या मान लिया जाए कि लोहिया के आदर्शों को मानने वाले सभी समाजवादी सत्ता के लिए एक साथ आने को आतूर है कमसे कम ये तस्वीरें तो यही बताती है कि सत्ता के सिंहासन पर विराजमान होने के लिए समाजवादियों का एकसाथ आना सियासत के समय की मांग है एक मांग केवल सियासत की नहीं बल्कि मुलायम-लालू के रिश्ते की भी मांग है लालू अब मुलायम के समधी है सत्ता में सहयोगी बनने को बेचैन है अपनी दरकती राजनीतिक जमीन को बचाने के लिए लालू अब नीतीश के साथ है बिहार के सुशासन बाबू को इस विलय से आस है कि लोकसभा चुनाव में 20 से घटकर 2 सीटों पर सिमटने वीली जेडीयू  को समाजवाद का साथ मिले  तो शायद वो सत्ता के सिंहासन पर दूबारा बैठ सके...इस बैठक में इन नताओं के चेहरे की मुस्कान बता रही थी कि इस विलय से समाजवाद जिंदा रहेगा कि समाजवादी पार्टी की साख लेकिन लालू की रट तो बनी रही कि हम सब मिलकर मोदी की सफाया कर देंगे बीजेपी को स्वाहा कर देंगे और जनता परिवार को राजनीति में जिंदा कर देंगे..
इस मंथन में जो मंत्र मिला वो वाकई मुलायम के लिए मनमाफिक था उनके लिए वाजिब था मुलायम ही इस जनता परिवार के संशाह बनें पार्टी के नेता बने एक ऐसा नेता बने जिसमें देश के धुरंधर नेताओं को अपने आप में सहेज लिया और इस बेनाम पार्टी का मुखिया पद अपने नाम कर लिया दो दशक पहले टूटी पार्टियों का संग्रह है जनता परिवार इस परिवार में शामिल सभी नताओं का परिवार ही जनता है क्योकि इनके जनाधार का आधार ही छीन गया...चुनाओं में जनता ने इनसे राजनीति का आधार ही छीन लिया लेकिन राजनीति की नीति तो बनानी थी तो जनता परिवार का विलय ही एक निरस राजनीति की जमीन पर सियासत की फसल पैदा करने की चाहत में जनता परिवार का विलय समाजवादियों के लिए सत्ता का आखिरी संघर्ष है मंथन में मुलायम मंत्र ही सबको रास आया आखिर मुलायम ही विलय में सबसे बड़ी पार्टी के मुखिया हैं लोकतंत्र में असली राजनेता वहीं होता है जिसके पास संसद में संख्या और जनता का जनधार होता इन दोनों ही रूपों में मुलायम फिट क्योकि संसद में जनता परिवार की सबसे बड़ी पार्टी सपा के पास 5 लोकसभा सांसद है और राजनीति में मुलायम  
धुरी भी हिट है क्योकि नीतीश, लालू, देवगौड़ा से ज्यादा जनाधार मुलायम की है मुलायम वेनाम जनता परिवार के मुखिया होंगे..मुलायम की बाजी चलेगी और लालू की लालटेन जलेगी या तीर सही निशाने पर लगेगी अब सबका जनाधार साइकिल से सहारे चलेगी..

Tuesday, 10 March 2015

बीजेपी-पीडीपी में तकरार

फाइल-पीएम मोदी-सीएम मुफ्ती
दिसंबर 2014 के चुनाव में जम्मू में बंपर मतदान के बाद जो परिणाम आए उस परिणाम में जनता ने सरकार के लिए किसी को परिपक्क नहीं समझा और खंडित जनादेश दे दिया , जम्मू की जनता को इस बात का इल्म था कि भ्रष्ट्रचार में लिप्त यूपीए गठबंधन सरकार में नहीं आ रही है , तो जनादेश ऐसा आया कि सरकार बनाने के लिए बीजेपी-पीडीपी दो बड़ी पार्टियों को एक दूसरे का का जतन करना पड़ा, जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कुल 87 सीटें है इस राज्य को 3 भागों में बांटा गया जम्मू में 37, कश्मीर में 46 जबकि लद्दाख में 4 सीटें है, मोदी के रैलियों,प्रचार, और विकास के वादों पर जम्मू में भगवा रुपी भाजपा का परचम लहराया, ये सिर्फ वादा नहीं देशभ्ति का जोश था, जम्मू की जनता को देश के साथ जोड़ने की कोशिश थी ,इसी कोशिश की बदौलत राज्य में बीजेपी के सीटों में जबरजस्त बढ़ोतरी हुई और राज्य में बीजेपी 25 सीटें जीतने में कामयाब हुई, जम्मू की जनता ने जहां बीजेपी को पसंद किया तो वही घाटी में पार्टी खाता भी नहीं खोल पाई,वजह कि घाटी अलगाव वादियों का गढ़ है , जो कि बीजेपी की विचारधारा से मेल नहीं खाते,बीजेपी की सोच अलगाववादियों को नहीं भांती , इन अलगाववादियों को भारत का भाव नहीं भांता, भारत की भूमी नहीं भांती, देश की एकता, अखंडता नहीं भांती, पर जम्मू की जनता को भाजपा भा गई और बीजेपी की 25 सीटें आ गई,

राज्य के इस चुनाव में पीडीपी 28 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी को बनी लेकिन उसे सरकार बनाने के लिए भगवा पार्टी के भाव के साथ जलने के लिए सोचने पर मज़बूर होना पड़ा ये बात इसलिए क्योकि बीजेपी-पीडीपी दो ऐसी पार्टियां है जिनकी सोच,समझ,विचारधारा, राजनीतिक एजेंडा बिल्कुल पृथक है , परिवारवाद की राजनीति को परे रखने वाली बीजेपी को  इस  बात का अहसास हो गया कि जम्मू में सरकार बनाना उसके लिए इतना आसान नहीं जितने देश के दूसरे प्रदेशों में हैं मई 2014 लोकसभा चुनाव को बाद बीजेपी को हर चुनाव में जीत का रथ जारी रखने में कामयाब हुई, महाभारत रुपी चुनाव में बीजेपी के रथ पर सवार हुए पीएम मोदी तो इस रथ के सारथी बने बीजेपी के चाणक्य अमित शाह , जीत की जोड़ी कामयाब तो हुई लेकिन सरकार बनाना आसान नहीं रहा, बीजेपी पीडीपी के साथ सरकार  बनाने के लिए सोचने पर मज़बूर हुई तो अपनी चुप्पी साध संघ ने जनता के हित के लिए बीजेपी का साथ दिया लेकिन हिदायतो के साथ की संघ राष्ट्र की एकता, अखंडता के साथ कोई समझौता नहीं करेगा ,

लगभग दो महिने के जद्दोजहत को बाद दो पृथक विचारधारा वाली पार्टियों का मिलन हुआ और बीजेपी-पीडीपी की सरकार बनी, य़े सरकार उन दो पार्टियों की बनी जिन्होने चुनाव में एक-दूसरे पर खूब राजनीतिक हमले किए, ऐसे हमले जो राजनीति में पार्टिया एक दूसरे पर करती हैं लेकिन खंडित जनादेश के सामने सब झूकने को मज़बूर हुए, नतमस्तक होने को आतुर हुए, CMP के तहत प्रदेश में बीजेपी गठबंधन की सरकार बनी और मुफ्ती प्रदेश के दूसरी बार सीएम बने , सीएम पद की शपथ लेते ही मुफ्ती का अलगाववाद प्रस्त बयान आतंकियों , पाक और हुुर्रियत की वजह से शातिपूर्ण मतदान हुआ, मुफ्ति का ये श्रेय देशद्रोहिओं को श्रेय जो देश को खंडित करने में लगे रहते है मुफ्ति सिर्फ एक बयान नहीं था ये बीजेपी के राष्ट्रिय एजेंडो को धक्का था, मोदी के विकास के एजेंडे पर धक्का था जिसकी व
जह से पार्टी को जम्मू की जनता ने बीजेपी को पसंद किया, बीजेपी की राष्ट्रीय सोच को धक्का था, मुफ्ती के इस बयान के बाद बीजेपी-पीडीपी तकरार इसस कदर बढा कि गठबंधन टूटने तक की बात आ गई , अमित शाह ने साफ किया देश से बड़ा गठबंधन नहीं है लेकिन इस बयान के बाद मुप्ती बीजेपी के लिए गले की हड्डी बन गए है।



   

Wednesday, 7 January 2015

शर्ली एब्दो , कार्टूनिस्ट और क़त्लेआम

पेरिस में पत्रिका के ऑफिस पर आतंकी हमला
फ्रांस की पत्रिका शर्ली एब्दो के दफ़्तर पर आतंकी  हमले में दस पत्रकार  सहित 12 लोगों की मौत हो गई जिसमें पत्रिका के संपादक भी सामिल हैं ..आतंकियों का आतंक, दहशतगर्दों का दहशत फ्रांस की पत्रिका पर इसलिए बरपा क्योंकि इस पत्रिका के कार्टूनिस्ट ने पैंगंबर का कार्टून छापा जिसको लेकर आतंकियों ने फ्रांस की फ़िजा को गमगिन कर दिया ...फ्रांस की राजधानी पेरिस में महज ए आतंकी हमला नहीं बल्कि आतंकियों का क्रूर चेहरा, दहशतगर्दों के नापाक नियत और अल्ला के नाम पर आतंक को ज़िंदा रखने की नाकाम कोशिश है...पेरिस में पत्रिका ऑफिस पर हमला करते समय आतंकियों ने अल्ला हुकबर के नारे लगाए....जिससे साफ पता चलता है कि  ये इंसान नहीं बल्कि अल्ला के नाम पर आतंक की फैक्ट्री में पैदा हुए आतंकी औजार है ...जिन्हे इनके आतंकी आकाओं ने अल्ला के नाम पर आतंक को फैलाकर विश्व में अशांति फैलाने की शिक्षा दी है...

आतंकियों द्वारा ए पत्रिका पर हमला नहीं बल्कि लोकतंत्र पर हमला है ,लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला है प्रेस की आजादी पर हमला है..जनता की अवाज को ज़िदा रखनी वाली मशीनरी पर हमला है समाज के आइने पर पर हमला है ..ए कोई पहली बार नहीं शर्ली एब्दो पत्रिका ऑफिस पर हमला हुआ हो इससे पहले 2011 में भी पत्रिका के ऑफिस पर आतंकियों ने हमले किए जिसमें चार पत्रकारों की जान चली गई थी...ए पत्रकार अपने चाहने वालों से रूकसत हो लिए......इस हमले की निंदा विश्व के सभी देशों ने की ...संयुक्त राष्ट्र संघ के मुखिया बान कि-मून ने कहा कि पत्रिका पर आतंकी हमला निंदनीय है तो वही फ्रांस राष्ट्र के राष्ट्रपति ने देशवासियों को भरोसा दिलाया कि इस दर्द भरे माहौल में सरकार देश की जनता की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह से तैयार है...इस दुख भरे समय में भारत के प्रधानमंत्री ने भी फ्रांस का दूख-दर्द को बांटते हुए कहा कि हम फ्रांस के साथ है और इस आतंकी हमले की पूरी तरह से निंदा करते  है...

मीडियों ख़बरों की माने तो पत्रिका के ऑफिस पर हमला करने वाले फ्रांस के ही रहने वाले दो सगे भाई है....जिन्होने फ्रांस की राजधनी पेरिस में पत्रकारों के साथ  खूनी खेल खेला....काले रंग की कार में काले करतूत को अंजाम देने आए आतंकियों ने पत्रिका ऑफिस में घुसे कार्टूनिस्ट का नाम पूछते ही अंधाधुंध फ़ायरिंग करने लगे, दहशतगर्दों के 50 राउंड की फायरिंग से पेरिस के लोग पूरी तरह से भयभीत और दहशत में आ गए..गोलियों की आवाज कानों में गुंजते ही लोगों की सांसे थम गई..गोलियों की गड़गड़ाहत सुनने से पता चलता है इन दहशतगर्दो की नियत सिर्फ़ पत्रकारों पर हमले की नहीं बल्कि बड़े हमले के फिराक में थे....  

जेहादी नारे लगाते हुए लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के जवानों पर गोेलियों की बैछार करने लगे जिसमें 10 पत्रकारों की मौत हो गई....ये फायरिंग पत्रकारों पर नहीं फ्रांस की ओलांदे सरकार पर है..उन सभी राष्ट्रो पर जो अतंक के ख़िलाफ़ अदा-कदा हुंकार भरते है...उन सुरक्षा एजेंसियों पर जो दहशतगर्दो पर नकेल कसने की कोशिश कर रहे है....उस संयुक्त राष्ट्र संघ पर जिसे विश्व में शांति कायम रखने की जिम्मेदारी है..लेकिन सुरक्षा ऐजेंसिया और सरकार की चुस्ती का अंज़ाम की पत्रिका ऑफिस पर होने वाले कई आतंकी हमलों की तैयारी को नाकाम कर चुकी थी लेकिन इस बार दहशतगर्दो ने अपने कोशिश को पूरा करने में सफल रहे....

पत्रिका ने पैंगंबर का कार्टून छापा जो  आतंकियों को को रास नहीं, दहशतगर्द इस कदर नाराज हुए..अल्ला के नाम पर खूनी खेल पर उतारु हो गए और कार्टूनिस्टों  का  क़त्लेआम कर दिया...
पैंगंबर का अपमान करने वाले कार्टून बताते हुए आतंकियों ने पत्रिका पर हमला किया जिसमें कई पत्रकारो की सांसे छीन ली...इस हमले के बाद फ्रांस के लोगों में भय का माहौल बना हुआ है लेकिन पेरिस में हुए आतंकी हमले से फ्रांस की फीजा तो गमगीन हुई हैं लेकिन प्रांसवासियों ने आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब देते हुए इस आतंकी हमले में मरे लोगों को श्रद्धांजलि देने सड़को पर उतर गए...


Wednesday, 19 November 2014

बाबा, बवाल और बर्बरता

संत के सामने बेबस सराकर

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हिसार के सतलोक आश्रम के संत बाबा रामपाल पर हत्या के आरोप का मामला गहराता जा रहा है और हिसार में हिंसा बढ़ती जा रही है ...तथाकथित बाबा रामपाल की बर्बरता ऐसा दिखा की एक मासूम सहित 6 लोगों की जान ले बैठा,, ये कोई पहला मौका नहीं है जब संत रामपाल के समर्थकों के साथ हुई हिंसा में लोगों की जान गई हो....साल 2006 में रामपाल के समर्थकों और गांव के लोगों के बीच हुई फायरिंग में 3 लोगों की मौत हुई थी जबकि इस घमासान में 125 लोग  घायल हुए थे..तब से रामपाल पर हत्या का मामला दर्ज है इतना ही नही संत रामपाल इस मामले में 21 महीने सलाखों के पीछे रह चुका है..तब से  रामपाल जमानत पर है..


संत रामपाल पर एक हत्या का आरोप है लेकिन रामपाल को रहनुमा मानने वाले संत रामपाल को कबीर का रूप मानते है जबकि पुलिस इसके विपरित रामपाल को आरोपी, दोषी, हत्यारा मानती है और कहती है बाबा को बर्दास्त नहीं किया जाएगा...किसी भी धार्मिक संस्कारों , हिंदू रीति रिवाजोें , पुण्य प्रताप के कामों को ना मानने वाला रामपाल पूरी तरह से हिंदू संस्कारों, सभ्यताओं, संस्कृतियों का विरोध का करता है..... रामपाल पर रार उस समय शुरु हुआ बाबा को कोर्ट द्वारा आदेश आया कि संत को न्यायालय के सामने पेश होना है पर संत ने कोर्ट के समन को सम्मान देने के बाजाय सामाजिक सियासत पर जोर दिया और अपने समर्थकों को पुलिस से भिड़ने के लिए छोड़ दिया..... हालात ऐसे बन गए कि हिसार की हिंसा और हिंसात्मक हो गई..और परिणाम कि संत के सामने एक लोकतांत्रिक सरकार लंगड़ी, रेंगती, बेबस और लाचार दिखनी लगी... सरकार के हजारो बाबू बाबा के सामने के बेबस और बंधुआ नजर आए...

रामपाल को रहनुमा मानने वाले संत के समर्थक सांसे बांध संत की सलामति के लिए आश्रम के सामने पुलिस और बाबा के बीच रोड़ा बन बैठे..इसी बीच आश्रम के अंगद बाबा के प्रवक्ता का बयान आया नहीं बताउंगा कि रामपाल कहा है...इलाज के लिए किसी गुप्त जगह है रामपाल...रामपाल अपने को कबीर का रूप मानता है पर कबीर वाणी को भूल महिलाओं और बच्चों के साथ ये बाबा बर्बरता कर रहा है...

बेकाबू बाबा को काबू करने की जोर लगाती पुलिस प्रशासन ने हिसार की हिंसा को हवा देते हुए आसु गैस के गोले छोड़े तो बाबा के समर्थकों ने आत्मदाह करने कि कोशिश, हवाई फायरिंग करते हुए पुलिस को हद में रहने कि याद दिला दी...एक बार फिर पुलिस बाबा के सामनें बैकफुट पर नजर आई...पर आश्रम में बैठा बाबा फ्रंटफुट पर जोर दार तरीके से पुलिस के चौके-छक्को छुड़ा रहा है...

मामला बढ़ा तो हिसार हिंसा की आग की आंच दिल्ली तक महसूस की गई...इस कदर महसूस की गई कि आनन फानन में मामले को बढ़ता देख  केंद्र  को खट्टर सरकार से जवाब मांगना पड़ा खट्टर का जवाब क्या रहा पता नहीं पर पहली बार  राजनीतिक राह पर चले हिंसक हिसार वाले हरियाणा की सत्ता के सिंहासन पर विराजमान हुए मनोहर लाल को बाबा के बवाल पर बैठक बुलानी पड़ी वो भी आपातकालीन बैठक, एमरजेंसी बैठक ..इस आपातकालीन वाली बैठक में क्या बोला गया मालूम नहीं पर हिसार की हिंसा और भी हिंसात्मक हो गई.. कबीर रूप वाले रामपाल के समर्थकों पर पड़ने वाले लाठी डंडे हिसार हिंसा को कवर करने गए कई टीवी पत्रकारों के हिस्से आ गया पत्रकार पीटे तो क्यों नहीं...आखिर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के दूत तीसरे स्तंभ को दानवों के  करतूतों को कवर जो कर रहे थे.