Saturday, 25 July 2015

मुज़फ्फ़रपुर में मोदी



मुजफ्फरपुर में परिवर्तन रैली के साथ बिहार विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने अपना चुनावी बिगुल शुरु कर दिया जब पीएम नरेंद्र मोदी ने भोजपुरी में बोलते हुए मुजफ्फरपुर रैली में लोगों को संबोधित किया कि बिहार के कोना कोना से आइल हमार भाई बहनो रऊआ सबसे शत-शत प्रणाम के साथ संबोधिक किया तो रैली में बैठे लोगों की आवाज आई तो मोदी-मोदी ठीक उसी तरह जैसे 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी मोदी की गुंज ने ,बिहार में बीजेपी 31 सीटें जीता दी...इन संबोधन के साथ पीएम मोदी ने रैली में आए लोगों को ही पीएम ने 14 करोड़ बिहारियों को अपना  संदेश भेज दिया कि वो बिहार की जनता से क्या चाहते है पीएम ने रेली में लोगों की भीड़ को देखता हुए बोले की मैं कल्पना नहीं कर सकता था कि ऐसा हुजुम देखने को मिलेगे पीएम की नजर जहां-जहां तक गई मोदी को माथे ही माथे दिखे तो पीएम मोदी ने पॉलिटिकल पंडितों को भी आगाह कर दिया कि इस कार्यक्रम को देखे तो नतीजा साफ दिख जाएगा कि अगली सरकार किसकी बनेगी...
नरेंद्र मोदी का मुजफ्फरपुर दौरा

पीएम ने ट्वीट को लेकर सीएम नीतीश पर निशाना साधा कि जब हम  कभी ट्वीट करते थे तो बिहार के एक नेता उनके चहकने , ट्वीट करने का मजाक उड़ाते लेकिन आज उन्होने भी चहकने का रास्ता पसंद किया और मेरे आने पर उन्होने ट्वीट किया कि 14 महीने बाद बिहार आने पर स्वागत है पीएम ने रैली में आए लोगों के सामने नीतीश के स्वागत का जवाब बड़े ही गंभीर स्वर में धन्यवाद दिया मोदी ने नीतीश से  अपनी मित्रता जिक्र यूं किया कि अपनो का विहर कितना परेशान करता है अपनों की दूरी कैसी बेचैन बनाती है पीएम मोदी ने मनमोहन से हमला करते हिए कहा कि 10 सालों में एक बार हवाई निरीक्षण करने आए थे लेकिन मोदी की 14 महीने का विरह भी बिहार के मुख्यमंत्री और मोदी के पुराने दोस्त को कितना परेशान करता है ये बात पीएम मोदी बखुबी जानते है और वो मानते है अपनों की दूरी जरा मुश्किल करती है ये बात मोदी शायद इसलिए कह रहे है कि नीतीश के साथ मोदी भी मित्रता चाहते है दोस्ताना चाहते चुनाव में बिहार को जितना चाहते है
रैली में लोगों की भीड़

मोदी ने परिवर्तन रैली में आए लोगों को विश्वास दिलाया कि कि बिहार की जनता चिंता ना करें मोदी अब आ गए है और देश के अच्छे दिन के बाद अब बिहार के भी अच्छे दिन आएंगे पीएम मोदी के कृषी मंत्री राधामोहन सिंह भी मानते है देश के बाद बिहार के अच्छे दिन जल्द आएंगे
मोदी के संबोधन के साथ ही रैली में आए लोगों के उत्साह बढ़ रहा था मोदी-मोदी के नारे लग रहे थे लोग खुश थे और पीएम उससे ज्यादा  बोल रहे थे जितना मोदी मन में सोच कर आए थे रैली में आए लोगों से मोदी उनके मन की बात जान रहे थे पूंछ रहे थे क्या बिहार में बदलाव में होना चाहिए, हालात बदलना चाहिए, स्थिति बदलना चाहिए, अंधेरे से उजाला होना चाहिए, रोजगार मिलना चाहिए, गुंडागर्दी साफ होनी चाहिए लोगों ने मोदी के मन की बात कही लोगों ने जोर जोर से कहा मोदी मोदी बदलाव होना चाहिए बिहार की जनता को मोदी ने भरोसा दिलाया कि 60  महीने में मैं आपके सपनों को पूरा करुंगा वो सारे सपने मैं साकार करुंगा जो 14 करोड़ बिहारियों ने देखा..बीजेपी से गठबंधन तोड़ने पर मोदी ने अपने पुराने मित्र नीतीश पर निशाना साधते हुए बोले कि मोदी इतना बुरा था तो एक कमरे के आकर एक चांटा मार देते मेरा गला घोंट देते इन बयानों में मोदी की नीतीश से मित्रता मोह दिख रही थी पीएम ने रैली में लोगों से अपील की एक बार हमे सरकार बनाने का मौका दे देश के प्रधान सेवक ने इस बात का भी जिक्र किया कि मेरी सरकार में बड़े विभाग बिहार के नेताओं के पास है इन बयानों और विभागों का जिक्र करना साफ दिखा रहा था पीएम मोदी आगामी बिहार विधानसभा में बड़े वोट को साधने की कोशिश कर रहे है जनता को लुभाना की कोशिश कर रहे है 


लेकिन प्रधान सेवक ने विभाग बताने से पहले 1998 में अटल जी के सरकार में मंत्रिमंडल को याद करना भूल गए जिसमें जार्ज फर्नाडिस रक्षा मंत्री, यशवंत सिन्हा, वित्त मंत्री, मोदी के पुराने दोस्त नीतीश-रेल मंत्री थे लेकिन आज मोदी के मंत्रिमंडल में ये तीनों मंत्रालय गैर बिहारी नेताओं के पास शायद ये बात मोदी के मन में नहीं आई जो बिहार की जनता को पसंद नहीं आएगी.. लेकिन फिर भी पीएम ये भी बताना नहीं भूले के बिहार के नेता पूरे देश को चला रहा है...लोकसभा चुनाव में भारी बहुमत के लिए मोदी ने बिहार की जनता को शत-शत इन बयानों से पीएम के बिहार के मतदाताओं को बताना की कोशिश की आप विधानसभा चुनाव में बीजेपी की सरकार बनाएं...लोकसभा चुनाव के अपने घोषणाओं का जिक्र करते हुए पीएम ने बोला कि मुझे याद है कि मैंने आपसे वादा किया था उन वादों को पूरा करुंगा रैली में आए लोगों को मोदी का वादा तो याद नही था पीएम ने लोगों को अपना वादा याद दिलाया लेकिन सवाल डेढ़ साल गुजरने के बाद भी मोदी सरकार ने बिहार के लिए सरकार पैकेज क्यों नहीं दिया तो जवाब है संसद सत्र खत्म होने के बाद...बिजली नहीं तो वोट नहीं नीतीश के इस वादे पर पीएम निशाना साधते हुए बोले की बिजली नहीं दी लेकिन वोट मांगने लोगों के पास आए उन्होने बिहार के जनता के साथ धोखा दिया पीएम मोदी ने बिहार की जनता को नीतीश के डीएनए के बारे में बताना नहीं भूले कि नीतीश के राजनीतिक डीएनए में दिक्कत है.   



पटना में पीएम

2014 के लोकसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत से चुनाव जीतने के बाद जब नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बनें तो उस चुनाव में बिहार का अहम योगदान रहा बिहार के 40 लोकसभा सीटों में बीजेपी सहित एनडीए गठबंधन को 31 सीटें मिली तो बिहार में सभी विरोधियों का मुंह बंद हो गया उन सभी नेताओं के मुंह पर राजनीतिक तमाचा था जिन लोगों ने धर्मनिरपेक्षता के नाम राजनीतिक धर्म को को भूला दिया अपने दोस्त को दुश्मन बना लिया...धर्मनिरपेक्ष पार्टियां जेडीयू को 2 तो लालू को 4 सीटें मिली तो मोदी विरोधी एकजुट हो गए...प्रधानमंत्री बनने के 15 महीने बाद आज पहली बार नरेंद्र मोदी बिहार के दौरे पर थे जहां पीएम ने 5 योजनाओं की शुरुआत कि ... 

दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना, पटना-मुंबई रेल लाइन, दानियावां-बिहारशरीफ रेल राइन, गैस परियोजना, और IIT पटना कैंपस का शुभारंभ पीएम नरेंद्र मोदी ने किया... 2009 के बाद पहली बार दो पुराने दोस्त और अब राजनीतिक दुश्मन मोदी और नीतीश किसी राजनीतिक मंच पर एक साथ दिखे... 2009 के आम चुनाव में पंजाब में आखिरी बार तब गुजरात के मुख्यमंत्री मोदी और बिहार के सीएम नीतीश कुमार एक साथ एक मंच पर एक दूसरे के होथों में हाथ डाले दोनों एक दूसरे के नेतृत्व को निहार रहे थे दोनों अपने सुशासन का गुणगान कर रहे थे तब मोदी नीतीश के मित्र थे एक अच्छे दोस्त थे उन दिनों नीतीश को गुजरात का मॉडल पसंद था आज मोदी नापंद है तब मोदी विकास पुरुष थे आज समाज को बांटने वाले नेता हैं...तब नीतीश को ना तो मोदी की मित्रता से गुरेज था और नाही आडवाणी की सांप्रादिक पार्टी की आगुवाई से परहेज था...अब मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं और नीतीश बिहार के मुख्यमंत्री है आज मोदी और नीतीश एक साथ एक मंच पर थे पर दोनों के हाथ एक दूसरे के हाथों में नहीं था आज दोनों हस हस के बातें नहीं कर रहें    थे दोनों के हाथ तो उठे पर मिलाने के लिए नहीं बल्कि दिखाने के लिए की हम एक दूसरे का सम्मान करते है अपमान नहीं...
नैना मिलाई ले

पीएम नरेंद्र मोदी-नीतीश कुमार पटना कार्यक्रम में 

पीएम जब वेटनरी कॉलेज में कार्यक्रम के लिए पहुंचे तो वहां बिहार के सीएम नीतीश कुमार भी मौज़ूद थे  कई केंद्रीय मंत्री भी मौज़ूद थे पीएम मोदी और नीतीश एक दूसरे से बातें तो कर रहें थे पर नीतीश पीएम से अपनी नजरे चुरा भी रहे थे मोदी के बिहार पहुंचने से पहले एएनाई को दिए इंटरव्यू सीएम नीतीश कुमार के कहा था कि मैं देश के पीएम का स्वागत करुंगा ना की बीजेपी के नेता का आदर करुंगा नीतीश बोल रहे थे पीएम अपना सर हिलाते हुए नीतीश की बातें सुन रहे थे नीतीश के विकास की बातें मोदी अपने मन में खाली घड़े में पानी भरने के समान भर रहे थे दोनों की बातें बगल में बैठे रामविलास पासवान भी सुन रहे थे और समझ भी रहे थे दो पुराने दोस्तो की बातें...मोदी और नीतीश कई सालों के बाद मिले थे और ऐसे बाते कर रहे थे जैसे कोई बिछड़ा दोस्त वर्षों बाद मिला हो..

पीएम मोदी-सीएम नीतीश कुमार-केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान

पासवान भी तो कभी नीतीश के साथ मंत्री थे आज पासवान मोदी के मंत्री है लेकिन नीतीश अब मोदी और पासवान से काफी दूर है पीएम की नजरे तो नीतीश को निहार रही थी पर नीतीश अपनी नजरे मोदी से चुरा रहे थे...नीतीश और मोदी राजनीतिक विरोधी है तो तंच तो कसना था लिहाजा नीतीश ने पीएम को तंज कसते हुए इस बात का एहसास दिलाया कि अटल सरकार की दनियावां-बिहार शरीफ रेल योजना शुरु करवा दे जो पता नहीं कब शुरु होनी थी नीतीश के इस दर्द से मोदी के मन को पीड़ा हुई तो नीतीश के इस व्यथा के साथ पीएम ने भी अपना शुरु मिलाया लेकिन नीतीश राजनीति विरोधी है तो तंज का जवाब तो देना था तो मोदी ने भी मंझे हुए राजनीति खिलाड़ी की तरह नीतीश को जवाब दिया हमने तो इस रेल लाइन की शुरुआत कर दी हमने तो बिहार की जनता का विकास किया कुछ लोगों ने तो सिर्फ राजनीति किया ...

इतना ही नहीं पीएम ने इशारों इशारों में लालू यादव पर निशाना साधा कि सरकार बदलने के बाद बिहार से ऐसे रेल मंत्री आए जिन्होने दनियावां-बिहारशरीफ रेल परियोजना का काम रोक दिया राजनीतिक द्वेश से बिहार की जनता का नुकसान हुआ राजनीति करने वाले तो राजनीति करें लेकिन बिहार की जनता का विकास ना रोके...बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने परियोजनाएं शुरु करने को लेकर पीएम मोदी का तहेदिल से धन्यवाद किया नीतीश से उस दिल से उस मोदी को धन्यवाद किया जिस दिल की बात सुनकर नीतीश ने मोदी के नाम पर 17 साल पुराना बीजेपी से गठबंधन तोड़ दिया 14 करोड़ बिहरियों के इस उम्मीद को तोड़ दिया जिस उम्मीद के साथ बिहार की जनता ने बीजेपी के साथ के साथ नीतीश को वोट दिया था वो बिहार का विकास करेंगे लेकिन नीतीश ने लालू के साथ हाथ मिलाकर उन वोटों पर चोट किया जो बिहार की जनता ने नीतीश को दिया था.


Sunday, 21 June 2015

21वीं सदी के ‘योगपथ’ पर भारत

कोई आशिक भी अपनी माशुका से खुद के इश्क का इजहार करने को इसकदर बेताब नहीं होता है  जिस तरह भारत सहित विश्व के 177 देश 16 जून 2015 को योग दिवस मनाने के लिए बेताब दिखे पलके बिछाये इस दिन का इंतजार करते रहे...बड़े लंबे और सुखद इंतजार के बाद आज वो तारीख आ गई जिस दिन का पूरी दुनिया को इंतजार था...भारत को इंतजार था देश के प्रधान सेवक नरेंद्र मोदी को इंतजार था देश की राजधानी दिल्ली के राजपथ को इंतजार था जहां प्रधान सेवक के योग करने का प्रोग्राम तय था वो दिन तय था वो समय तय था वो पल तय था जब देश के लोगों को योग करना सिखाये देश के प्रधानमंत्री... आज वो सभी इंतजारे खत्म हो गई जब देश के प्रधानमंत्री ने दिल्ली के दिल की बीचों बीचों राजपथ पर लोगों के साथ योग किया 21वीं सदी में भारत विश्व का योग गुरु बना...मंगल यात्रा, आर्थिक मजबूति वाले आधुनिक 21वीं सदी के 15वें साल के 6 महीने के 21 जून को हिंदूस्तान ने पूरी दूनिया को योग का राज बताया..भारत ने बताया कैसे आज की भागती- दौड़ती जिंदगी, वैश्विक बदलाव,  मिशाइलों के सफल प्रक्षेपण करने वाले युग में भी योग का महत्व है इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि आज हम कितने भी आधुनिक होने का दावा कर ले लेकिन योग से दूर नहीं हो सकते..21 सदी के बदलती दुनिया को भारत ने बताया क्या है योग का धर्म भारत ने बताया योग का फर्ज..इंडिया ने बताया कि योग जिंदगी जीने की कला है योग हमारी परंपराओं की पूंजी है योग महज एक व्यायाम नहीं बल्कि योग हमारे शरीर को आत्मा से बांधता है जैसे हम किसी रेश्ते में बंध जाते है हम उस रिश्ते में खो जाते है जो रिश्ता हमें जीने की कला को सिखाता है जिस रिश्तों को हम जीना चाहता है उससे हमारा अलग लगावा होता है उसी तरह जिंदगी से योग का अलग लगाव है.. जिसे जीने की कला कहते है UNO द्वारा कई दिवस मनाए जाते है आज उन दिवसों की सूची में योग दिवस ने भी जगह बना ली भारत की नजरिये से देखे तो योग दिवस पर भारत की छाप है क्योंकि योग दिवस मनाने की मंशा UNO में भारत ने रखी 2014 में जब देश में बीजेपी की सरकार बनी और पीएम बनने के बाद नरेंद्र मोदी की अमेरिका दौरे के दौरान 27 सितंबर 2014 को  पीएम नरेंद्र मोदी ने UNO को संबोधित करते हुए कहा कि योग हमारी पुरात्तव परांपरिक अमुल्य देन है योग को लेकर पीएम ने कहा कि योग मन, शरीर ,विचार कर्म, संयम. उपल्ब्धि और मानव और पाकृति के बीच सामंजस्य का रुप है...प्रधानमंत्री मानते है कि योग स्वास्थ्य और कल्याण का समग्र दृष्टिकोण है UNO के संबोधन में प्रधानमंत्री योग को केवल का शारीरिक व्यायाम नही मानते है बल्कि प्रधानमंत्री मानते है कि योग पाकृति को प्राप्त करने का माध्यम है देश के प्रधानमंत्री मानते है कि योग हमारे जीवन शैली में बदलाव लाकर हमारे अंदर जागरुकता उत्पन्न करके जलवायु परिवर्तन से लड़ने में सहायक हो सकता है प्रधानमंत्री के योग दिवस मानने के प्रस्ताव को UNO ने माना और फैसला किया गया कि 16 जून को पूरी दुनिया योग दिवस मनाएगी वो दिवस जिस दिन हम अपने आप को पहले से और ज्यादा ऊर्जावान, फुर्तिला और चुस्त महसूस करेंगे... शायद हमारी जिंदगी पहले से और ज्यादा जलवायु परिवर्तन से लड़ने में सहायक होगी.. 16 जून इसलिए चुना क्योंकि यह दिन साल का सबसे बड़ा दिन होता है..

योग तो केवल एक व्यायाम या पाकृति को समझने का जरिए है लेकिन देश में विवाद भी शुरु हुआ इस योग पर... इस जीवन जीने की कला पर खुब राजनीति का रंग चढ़ा..जलवायु परिवर्तन से लड़ने वाली योग पर सियासत तो होना ही था क्योकि इसको किसी धर्म से जोड़ा गया तो किसी समुदाय का विरोधी बताया गया राजानीति तो योग को लेकर खुब हुई इस हद तक सियासत हुई व्यायाम से पहले बयानबाजी शुरू हो गई...नेताओं ने कहा नहीं करना योग तो देश छोड़ दो तो किसी ने कहा मुसलमान विरोधी है योग इस्लाम का विरोधी है योग.. दिल्ली से लेकर देश के कई मंत्रियों ने व्यायाम पर बयान दिया किसी ने योग को नमाज़ से जोड़ा तो किसी ने योग ना करने वालों से बू आने की बात कह दी...तो सवाल  सिर्फ योग को लेकर नहीं कि योग किस धर्म का है या योग किस धर्म का नहीं है या योग किस धर्म का विरोधी या किस धर्म का समर्थक सवाल इस बात को लेकर कि व्यायाम पर बयानबाज़ी क्यो व्यायाम तो केवल एक जीवन जीने की कला है जो हर किसी को जीने का तरीका सिखाता है तो इस कला वाले व्यायाम पर इतना बवाल क्यों.. 16 जून 2015 को पूरे भारत में योग दिवस मनाया गया जनता से खचाखच भरी राजपथ योग दिवस का गवाह  बनने के लिए सज कर तैयार था...लोगों का उत्साह योग को लेकर खुब दिखा इस कदर उत्साह कि जनपथ पर जनता की भीड़ सुबह से ही दिखने लगी थी..क्या बुढ़े क्या बच्चे क्या युवा सब योग के रंग में रंग जाने को बेसब्र थे इन तस्वीरों में राजपथ पर जनता की भीड़ अपने आप में योग के प्रति उत्साह को बयान कर रही थी.. देश की राजधानी दिल्ली में पीएम मोदी और सीएम केजरीवाल ने योग किया को हालिया विवादों में फंसी राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे ने अपने मंत्रिमंडल के साथ जयपुर में योगासन किया बिहार में बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह ने योग तो किया लेकिन उतना नही कर पाए जितना सोच कर किया अमित शाह पटना आए थे शायद शाह के शरीर पर नीतीश का निशाना सही था जिसमे नीतीश ने कहा था शाह योग करते तो ऐसा शरीर नहीं होता...

शाह ने उतना व्यायाम नहीं किया जितना पीएम मोदी ने राजपथ पर किया बिहार  में आगामी विधानसभा चुनाव है ऐसे में राजनीतिक योग को साधने कि लिए कई केंद्रीय मंत्रियों ने अलग अलग जगहों पर योग किया लेकिन मोदी के योग का विरोध कर रहे राजनीतिक पार्टियों में इस  योग से दूरी बनाई रखी बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने भाजपा पर हमला किया तो वही लालू ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि बीजेपी असली मुद्दो से भटकाने के लिए योग का ढोंग कर ही है जनता बीजेपी का असली चेहरा देख रही हैं शाह को शारीरिक नसीहत देने वाले नीतीश के नए दोस्त लालू की शरीर भी शाह जैसा शायद तभी लालू भी व्यायाम नहीं कर पाए और व्यायाम पर बयानबाजी शुरु कर दी...

योद दिवस के मौके पर देश के दूसरे राज्यो के मुख्यमंत्रियों ने भी योग किया झारखंड के सीएम रघुवर दास, महाराष्ट्र के सीएम फड़नवीस, हरियाणा के सीएम खट्टर ने भी प्रधानमंत्री के इस योग दिवस पर योग पूरे देश  ने योग  करके योग दिवस मनाया तो वही कांग्रेस ने ललित मोदी-सुषमा-वसुंधरा प्रकरण को लेकर ललितासन करके इसका विरोध किया जहां कांग्रेस ने योग का विरोध किया वही कांग्रेस शासित राज्य उत्तराखंड के सीएम हरिश रावत ने योग किया...
प्रधानसेवक के योग पहल को पूरी दुनिया ने सराहा ठीक उसी तरह जैसे आज से 8 महीने पहले शुरु हुए स्वच्छता अभियान को सराहा गया लेकिन  स्वच्छता अभियान आज सवालों में है स्वच्छता अभियान झाडू उठाकर सेल्फी लेना एक जरिया बनाकर रह गया इस अभियान की हकीकत और दावे एक दुसरे के विपरित है सफाई अभियान की सच्चाई कुछ और है ऐसे में योग को लेकर सवाल उठने लाजमी है कही योग भी स्वच्छता अभियान की तरह दिखावा बनकर ना रह जाए भारत ने दो विश्व रिकॉर्ड बना 'गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में अपना नाम दर्ज करा लिया है.



Wednesday, 17 June 2015

मोदी का “ललित” आईपीएल

फाइल--सुषमा स्वराज-ललित मोदी 
ललित मोदी वो नाम जिसने क्रिकेट की दुनिया में अपना एक अलग नाम कमाया अपने ललित नाम को भुनाया भारतीय क्रिकेट को एक नए आयाम पर पहुंचाया भारतीय क्रिकेट को आईपीएल का तोहफा दिया  सफेद क्रिकेट को एक नया रंग दिया क्रिकेट के कई रंग लाल, ब्लू, काला, पिला, निला ,क्रिकेट तो दिया लेकिन इस सफेद क्रिकेट को काला कर दिया क्रिकेट के ड्रेसिंग रुम को काला अड्डा बना दिया ..क्रिकेट के पविलिटन को पब का पर्याववाची बना दिया क्रिकेट को कॉरपोरेट से जोड़ दिया 

एक सभ्य खेल को बाजारु गेम बनाकर छोड़ दिया बाजार में नीलाम होने वाला खिलौना बताकर बेच दिया क्रिकेट को कलंकित खेल बनाकर छोड़ दिया इस खेल के तो कई मोहरे थे जिसका बादशाह तो ललित मोदी था जिसने  क्रिकेट के आईपीएल को राजनीति के आईपीएल से जोड़ दिया जी हां राजनीति की आईपीएल यानि इंडियन पॉलिटिकल लीग से जोड़ दिया क्रिकेट के हरे मैदान में राजनीति के सफेदपोश खिलाड़ियों को उतार दिया नेताओं को क्रिकेट की बैंटिंग करना सीखा दिया राजनीति के मैच में आईपीएल का तड़का लगाना समझा दिया ललित मोदी ने राजनेताओं को राजनीति में रन लेना सीखा दिया चौके-छक्के लगाना सीखा दिया लेकिन ललित की सिखाई बैंटिंग के बदौलत शशि थरुर जैसे बड़े राजनीतिक खिलाड़ी आउट हो चुके है अपनी कुर्सी गवां चुके है आज सियासत के कई बड़े खिलाड़ी रन आउट होने के कगार पर खड़े है थर्ड अंपायर के फैसले के इंतजार में खड़े है राजनीति की पीच पर एक जीवनदान पाने के लिए खड़े है क्रिकेट के आईपीएल से लेकर पॉलिटिक्स के आईपीएल तक हर जगह आज मोदी ही मोदी की चर्चा है आज हर नेता के जुबान पर ललित मोह दिख रहा है क्या मोदी के विरोधी या समर्थक सब मोदी के साथ खड़े है या मोदी के साख के साथ खड़े है ये तो पता नहीं पर आज पूरे देश में मोदी की चर्चा है.. चर्चा राजनीति के बादशाह पीएम मोदी की नही बल्कि क्रिकेट के दुनिया के ललित मोदी की है ...


इस ललित मोदी पर क्रिकेट के नाम 700 करोड़ गबन का आरोप है क्रिकेट को कलंकित करने का आरोप है देश का पैसा चुराने का आरोप है आरोप कई है पर नाम एक ललित मोदी ललित मोदी...क्रिकेट वाला मोदी

आईपीएल के विधाता कहे या क्रिकेट का कॉनट्रैक्टर इस ललित मोदी की मदद करने के आरोप में पीएम मोदी की  विदेश मंत्री सुषमा स्वराज फंसी है राजस्थान की रानी सीएम वसुंधरा राजे संकट में पड़ी है आज पूरी मोदी सरकार फंसी है  सरकार सवालों से घिरी है  सरकार  संकट में पड़ी है सुषमा पर सियासी संग्राम शुरु हो गई है मोदी के सांसद आस्तिन के सांप की राजनीति बता रहे है मोदी के बड़े मंत्री इस मामले पर मौन है सवाल कई है जवाब सिर्फ एक सुषमा स्वराज सही है सुषमा पर आरोप है 700 करोड़ के गबन के आरोपी ललित मोदी की सुषमा ने मदद की उस ललित मोदी की मदद की जिसे पूरी दुनिया की पुलिस ने नोटिस जारी कर रखा है जिस पर पर्वतन निदेशालय ने कई मामलों में केस दर्ज कर रखा है सुषमा ने उस ललित की मदद की कांग्रेस का आरोप है सुषमा ने कानून के भगोडे की मदद की सुषमा-ललित संबंधो को लेकर आज सऱकार सवालों से घिरी है कांग्रेस के कई सवाल सरकार क्यों चुप पड़ी है सरकार का जवाब सुषमा ने मनावता के आधार पर ललित मोदी की मदद की है फिर कांग्रेस का सवाल क्य़ा मनावता के आधार पीएम मोदी के मंत्री दाउद की मदद करेंगे सरकार चुप हैं संघ , संगठन और सरकार सुषमा के साथ है सरकार के बड़े मंत्री कहते है कि सुषमा ने जो किया वो सही किया लेकिन सवाल फिर आखिर सुषमा ने सही किया तो आस्तिन की राजनीति किसने किया कौन है जो राजनीति की पिच पर सुषमा को क्लिन बोल्ड करना चाहता है कौन है जो ललित के बहाने सुषमा का स्वराज छीनना चाहता है वो जो भी है पता नहीं लेकिन सुषमा के साथ सरकार,  संघ और संगठन खड़ी है 


सरकार कहती है मोदी की पत्नि बीमार थी मदद कराना मनावता था अगर बीमार के नाते मदद करना था तो सुषमा ने लंदन में अपनी करीबी को एडमिशन कराने में ललित की मदद क्यों ली क्यों सरकार को नहीं बताया कि हां मैनें ललित मोदी की मदद की और ललित मोदी से मदद ली सुषमा पर आरोप है लंदन से पुर्तगाल जाने के लिए सुषमा ने ललित मोदी की माईग्रेशन पेपर पाने में मदद की.. आरोप और बचाव सिर्फ सुषमा की नही बात केवल दिल्ली तक नहीं मामला सिर्फ विदेश मंत्रालय का नहीं चिंता सिर्फ पीएमओ की नहीं बल्कि सुषमा की आंच दिल्ली के रास्ते होते राजस्थान की रानी सीएम वसुंधरा के आंचल तक पहुंत गई वसुंधरा पर आरोप है ललित मोदी को पेपर पाने में राजे ने मदद की राजे ललित की गारंटर बनीं देश के भगोड़े की गवाह बनीं ललित मोदी की राजे ने मदद की राजस्थान की सीएम पर आरोप है जिस अस्पताल में ललित मोदी के पत्नि का इलाज हुआ उस अस्पताल को जयपुर में कैंसर सैंटर बनाना का कॉन्ट्रैक्ट मिला

वसुंधरा-ललित-सुषमा
वसुंधरा के बेटे दुष्यंत की कंपनी में ललित मोदी ने निवेश किया कंपनी तो दुष्यंत की है पर कॉन्ट्रोल तो ललित मोदी के हाथ है  क्रिकेट से लेकर कॉरपोरेट तक हर जगह मोदी का कैप्चर था राजस्थान की सीएम संकट में है पर सीएम की संकट सुषमा से बड़ी है वहज कि सीएम के साथ ना तो संघ ना संगठन और ना सरकार खड़ी है बीजेपी ने साफ किया सीएम अपना रुख खुद साफ करें संगठन सुषमा की तरह सीएम वसुंधरा का वचाव नहीं करेगी  सीएम की संकट सुषमा से आपर  है मामला बढ़ता देख वसुंधरा ने अमित शाह से मिलने की कोशिश की तो शाह ने सीएम राजे को मात देते हुए कह दिया अभी इंतजार करो खेल अभी बाकी है राजनीति के खेल में परिणाम इतनी जल्दी नहीं आते ये बात वसुंधरा को अच्छे से समझ लेना चाहिए क्योंकि सवाल कई है जवाब सिर्फ एक सुषमा स्वराज सही हैं...



Monday, 11 May 2015

अम्मा हुई बरी

19 साल पुराने आय से अधिक संपति के मामले में  तमिलनाडु के पूर्व सीएम जयराम जयललिता को  कर्नाटक हाईकोर्ट ने उन सभी आरोपों से बरी कर दिया जो 19 साल पहले साल 1996 में  अम्मा पर भ्रष्टाचार के आरोप लगें थे आज उन सभी आरोपों का अंत हो गया.. अम्मा आज आजाद हो गई, जेल की जंग जीत गई, राजनीति की राह पर फिर से चलने को तैयार हो गई कर्नाटक हाईकोर्ट के इस अहम फैसला ने  तमिलनाडु के पूर्व सीएम को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया जिससे अम्मा के राजनीतिक राज पर आंच आ रही थी आज वो सभी आरोप आग में जल गए, पानी में घुल गए,  क़ानून की स्याही से मिट गए. अम्मा के आंचल में सारे आरोप छीप गए..

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद उन सभी आरोपों पर विराम लग गया जो जयललिता पर आज तक लगते रहे थे जिस भ्रष्टाचार को लेकर जया की तुलना देश के दूसरे नेताओं से कि जाती आज अम्मा उन नेताओं से परे होकर उन आरोपों से बरी हो गई..एक बार फिर से अम्मा के  तमिलनाडु की सीएम बनने का रास्ता साफ हो गया इस फैसले के बाद जया अब चुनाव लड़ सकती है कोर्ट के फैसले से डीएमके की राजनीति को झटका लगा डीएमके नेताओं ने इस फ़ैसले का विरोध किया , बीजेपी नेता सुब्रामणयम स्वामी ने इस फ़ैसले पर आशचर्य जताया तो फैसले के बाद AIADMK नेताओं ने खुशी जताई क्योंकि आज अम्मा आजाद हैं..

जया के सियासत शक्ति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 2014 आम चुनाव में तमिलनाडु के 39 सीटों में से जया ने 37 सीटों पर जीत दर्ज की इस चुनाव में डीएमके चारों खानों चित हो गई और अम्मा हर बाजी को जीत गई ..आज अम्मा ने एक और बाज़ी जीत ली,  इसी को कहते है सियासत की शक्ति आखिर सत्ता से ही तो कानून बनता है कानून भी तो सत्ता का हि है तो कानून सत्ता से अलग कैसे अलग हो सकता है कर्नाटक हाईकोर्ट के इस फैसले ने बता दिया कि सत्ता और कानून की शक्ति समान है ये एक दूसरे के पूरक है ना कि एक दूसरे से अलग..  अम्मा आज भ्रष्टाचार के आरोपों से मुक्त हो गई तमिलनाडु के पूर्व सीएम पर आरोप 1996 में  लगे थे जिसका फैसला 19 साल बाद आया , 19 साल के फैसले में 19 पड़ाव आये जया से 1339 सवालों के जवाब मांगे गए सवाल कई थे पर जया का जवाब एक मैं निर्दोष हूं मैंने कुछ नहीं किया जया पर आरोपों की सुनवाई होती रही तारीख दर तारीख अम्मा की कोर्ट में पेश होती रही जिरह और सुनवाई जारी  रहे  सवालों और जबावों का दौर चलता रहा इस दौरान जयलिलता तमिलनाडु की तीन बार सीएम बनीं.

इस फैसले से पहले सितंबर 2014 में निचली अदालत ने फैसला सुनते हुए जया को 4 साल की जेल और 100 करोड़ के जुर्माने की सज़ा सुनाई थी  कई आरोपों में घिरी अम्मा राजनीति में आने से पहले जयललिता ने 120 तमिल फ़िल्मों में काम किया अपनी आदाकारी से लोगों को खुब लुभाया मनोरंजन की दुनिया में राज करने के बाद जयलिलता ने राजनीति का रूख किया तो साल 1989 में अम्मा  तमिलनाडु विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनीं सियासत के समाज में जया की ये पहली पारी थी जब अम्मा ने लोगों में एक विकल्प की अलख जगाई जनता की बातों को जनता के साथ की, जनता के लिए जनता के साथ बात करते हुए अम्मा 1991 में पहली बार  सीएम बनीं 1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस गठबंधन के साथ अम्मा सत्ता में आई बंपर बहुमत के साथ 234 में से 225 सीटों पर जीत दर्ज की ये तमिल की राजनीति में अब तक किसी भी पार्टी की सबसे बड़ी जीत थी...ये   प्रदेश की राजनीति में  जया की धमाकेदार जीत थी जब जनता ने जया का भरपूर साथ दिया अम्मा को सरआंंखों पर बैठा लिया जानकी रामचंद्रन के बाद जया AIADMK की दूसरी महिला नेता थी जिसे जनता ने प्रदेश की कमान दी जिसपर तमिल की जनता ने भरोसा दिखाया लेकिन जब जब जनता ने जया पर भरोसा दिखाया तब-तब जया पर गंभीर आरोप लगे...पहले कार्यकाल में जया पर आय से अधिक संपत्ति रखने का मामला आया तो 2001 के दूसरे कार्यकाल में तनसी भूमी घोटाले में नाम आया भूमि मामले में कोर्ट ने फ़ैसला सुनाते हुए जया को 5 साल की सजा सुनाई तो ये दूसरा मौका था जब जया को सीएम रहते कुर्सी छोड़ जेल जाना पड़ा लेकिन तनसी भूमि घोटाले में कोर्ट ने जया को बरी किया और 5 महीने बाद जया फिर से तमिलनाडु की सीएम बनीं जया पर घोटालों के आरोप तो लगते रहे लेकिन उन आरोपों से अम्मा  हमेशा बचती रही और अपने आप को सही साबित करती रही आय से अधिक संपत्ति रखने का मामला हो या तनसी भूमि घोटाले की आंच हर बार अम्मा आरोपों से बचती रही..

 घोटाले के आरोप में जब-जब जया जेल गई ओ पनीरसेलवम जया के उत्तराधिकारी बनें जया के जेल जाने के बाद पनीरसेलवम हर बार सीएम बने.. पनीरसेलवम जया के सबसे करीबियों और वरिष्ठ मंत्रियों में से है,,,तमिलनाडु में जया के जादू  के जलवे का अंदाजा इस बात से लगा सकते है , जनता जया के लिए इसकदर पागल है, जया के लिए जनता जान भी देती है साल 2014 में जयललिता के खिलाफ आए फैसले के बाद जया के कई सर्मथकों ने अपने आप को आग के हवाला किया को कईयों के जहर खाकर जान दी.. अम्मा के आंचल से तमिल के लोगों को इतना प्यार जिसका अंदाजा आप कभी नहीं लगा सकते ..अगर आप लगाने चाहे तो इनके जान की कीमत लगा सकते है जो अम्मा के लिए कुछ भी कर सकते है, जी सकते है,  मर सकते है , अम्मा के लिए कुछ भी कर सकते है आखिर यही तो अम्मा का प्यार है जो जनता जया के लिए दिखाती है अम्मा के लिए प्यार तो होना ही चाहिए क्योंकि अम्मा- अम्मा होती है आखिर जया तमिल की अम्मा हैं...

ये जया थी जिसने डीएमके को सत्ता से बेदखल किया जब तमिल के लोगों को लगा कि अम्मा ही अण्णा का विकल्प हो सकती है जनता ने जया को सत्ता के सिहांसन पर बिठाया पर जयललिता का पहला कार्यकाल ही जया के लिए काल साबित हो गया और 68 करोड़ के भ्रष्टाचार का आरोप लगा,  अम्मा पर आय से अधिक के संपत्ति रखने का आरोप लगा आय  को लेकर जया पर जांच की आच आई सीएम पर गैरतरीके से आय कमाने का आरोप लगा, दो नंबर के पैसे रखने का इल्ज़ाम लगा,  भारत के राजनीति में पहला मौका था जब किसी सीएम के घर पर उसी की पुलिस ने छापा मारा आम्मा के आलीशान बंगले पर पुलिस के छापे में 23 किलों सोना, 1165 किलो चांदी ,91 घड़िया और करीब 12,000 साड़ियों को बरामद किया..जया कि पुलिस ने ही अम्मा की संपत्ति को अपने कब्जे में कर लिया..

आय से अधिक इस मामले में अम्मा के साथ उनकी साथी शशिकला के साथ चार लोगों पर आरोप तय हुआ..अम्मा पर लगे आरोपों की वजह से जया कि राजनीति को भी नुकसान हुआ और 1996 के चुनाव में जया को तमिल की जनता ने सत्ता से हटाकर डीएमके पार्टी के करुणानीधि को प्रदेश की कमान दे दी, 1996 में जब करूणानिधि सत्ता में आए तो अम्मा के घोटालों की जांच हुई,, अम्मा के घोटालों की जांच में कानून से ज्यादा राजनीति हुई ,,साल 1997 में आय से अधिक संपत्ति मामले में अम्मा पर केस दर्ज हुआ सवालों और बयानों का दौर शुरू हुआ तारीख पर तारीख मिलती गई और अम्मा फैसले का इंतज़ार करती रही..जया से जनता का मोह तो भंग हो गया पर अण्णा से ज्यादा  उम्मीदे अम्मा से बनी रही तमिल की जनता ने जयललिता को एकबार फिर सत्ता में बिठाया और 2001 में जया तमिलनाडु की दूसरी बार सीएम बनीं लेकिन विवादों ने जया साथ नहीं छोड़ा और एकबार फिर तनसी भुमि घोटाले में जया का नाम आया तो कुर्सी छोड़नी पड़ी..पनिरसेलवम तमिलनाडु के सीएम बने ,,मामला आगे बढ़ा  और 2002 में सुप्रीम कोर्ट से इस केस को बेंगलुरू भेज दिया.. 19 साल बाद 1339 सवालों के जवाब देने के बाद अम्मा आज आज़ाद है सूत्रो की माने तो 17 मई को जयललिता सीएम पद की शपथ लेंगी





Sunday, 10 May 2015

केजरीवाल के खिलाफ 'खबरनीशों' की खैर नहीं


दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की सरकार ने एक सर्कुलर जारी किया कि वो खबर जो सरकार की साख को धूमिल करने सीएम की सियासत पर सवाल करने या केजरीवाल के सिपाहियों पर संशय करने या अरविंद की अपेक्षाओं से अलग होनी वाली खबर होगी तो  उन खबरनिशों पर खैर नहीं, खबरनिशों की खाल उधेड़लेगे केजरीवाल, केजरीवाल सरकार मानहानि का केस करेगी..जो खबर अरविंद के मुताबिक नहीं होगी  जो खबर केजरीवाल के आखों को सुकून नहीं देगी जो खबर कानों को वैभव की अनुभूति ना दे तो उस खबर के खिलाफ केजरीवाल कर्रवाई करेंगे उस मीडिया के खिलाफ अरविंद मानहानि का केस करेंगे उस मीडिया का अरविंद मुंह बंद कर देंगे जिस मीडिया की भाषा अरविंद की अपेक्षाओं  को पूरा नहीं करेगी जो सीएम पर सवाल खड़ा करेगी उस मीडिया की केजरीवाल खाल खीच लेंगे क्योकि केजरीवाल को सवाल पसंद नहीं जिस  अखबार की सुर्खिया अरविंद के अनुरूप ना होगी टीवी स्क्रीन का  क्रोमा केजरीवाल के माफिक नहीं होगा जिस मैगजीन का कवर पेज केजरीवाल के कैरेक्टर का बखान नहीं करेगी तो उसे केजरीवाल जेल भेज देंगे क्योंकि केजरीवाल को सवाल पसंद नहीं...

दिल्ली के सीएम अरविंद ने अपने अधिकारियों को आदेश दिया कि जो मीडिया हमारे काम पर सवाल खड़ा करे हमारी छवि को धूमिल करे हमारे काम को गलत बताएं हमारे काम को सही ना कहे  उस मीडिया पर मुंह बंद करों उसपर मानहानि का केस  करो केजरीवाल को बदनाम करने वाली मीडिया को सेंसर करो क्योकि केजरीवाल को सवाल   पसंद नहीं सीएम के सियासत पर सवाल पसंद नहीं है दिल्ली के सुल्तान को सवाल पसंद नहीं..आज केजरीवाल उस मीडिया पर सेंसर चाहते है जिस मीडिया ने मुन्ना से केजरीवाल और अरविंद से सीएम अरविंद केजरीवाल बनाया आज उस मीडिया पर अरविंद अंकुश चाहते उस मीडिया पर सेंसर चाहते है क्योंकि आज मीडिया ने अरविंद की आकांक्षाओं पर सवाल किया अरविंद की सियासत पर सवाल किया..अरविंद मीडिया पर अंकुश चाहते है क्योंकि मीडिया ने उन पर सवाल किया एक लोकतांत्रिक हिस्से के हिसाब से जवाब मांगा तो केजरीवाल सवालाें पर कांप गए और मीडिया की पब्लिक ट्रायल की बात पर आ गए क्योंकि अरविंद आज मीडिया पर अंकुश चाहते है आज सावाल से भाग रहे हैं निष्पक्ष की बात कर रहे हैं सत्ता के सिंहासन पर काबिज होने से पहले अपने विरोधियों के खिलाफ रोज नए खुलासे करते समय केजरीवाल भूल जाते थे की शायद मीडिया ही उनकों दिखा रही है तो लोग केजरीवाल को देख रहे है लोग अरविंद को सुन रहे क्योकि मीडिया उनको लोगों को सुना रही है शाय़द केजरीवाल मीडिया को सेंसर तब नहीं करना चाहते थे जब वो सत्ता के वैभव से कोशों दूर थे पर आज अरविंद देश की राजधानी  दिल्ली के मुखिया है भारी बहुमत के साथ दिल्ली के सत्ता पर विराजमान है आज अवरिंद एक मंझे सफेदपोश नेता की तरह मीडिया पर सवाल खड़े कर रहें है तो मीडिया पर सवाल करने पर विरोधी केजरीवाल पर सवाल खड़े कर रहे है जो कभी-कभी खुद भी मीडिया पर सवाल खड़े करते रहे है लेकिन अवरिंद का मीडिया पर अंकुश करने की आकांक्षा अलग है अरविंद उन नेताओं से कई कदम आगे निकल गए और मीडिया पर कार्रवाई करने  तक की सोच गए मीडिया को लेकर उतना सोच और बोल गए जितना सोचकर सत्ता में आए थे आज अरविंद मीडिया पर अंकुश लगाने की सोच रहे है क्योकि सवाल उनसे बहुत हैं पर जवाब सिर्फ एक  मीडिया पर सेंसर ..मीडिया की देन और अन्ना आंदेलन से उपजे और उभरे अरविदं केजरीवाल को लोगों ने जाना क्योंकि मीडिया ने अरविदं को लोगों तक पहुंचाया, लोगों ने केजरीवाल को सुना क्योंकि मीडिया ने देश दुनिया में केजरीवाल को सुनाया साल 2011 अन्ना आंदोलन में अन्ना के साथ मंच पर एक युवक को मीडिया ने देखा जिसे भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने को लेकर बोलते पाया जिसे मीडिया ने बनाया जिसे फर्श से अर्श पर बैठाया जो तिनका था उसे ताड़ बनाया जो मुन्ना था उसे अरविंद केजरीवाल बनाया आज मीडिया पर अरविंद अंकुश चाहते है क्योकि अरविंद की सियासत पर कोई सवाल करे केजरीवाल को  पसंद नहीं वो खबर पसंद नहीं जो केजरीवाल की सरकार पर सवाल खड़े करे..केजरीवाल मीडिया पर अंपनी अक्श चाहते है क्योंकि केजरीवाल की सत्ता पर मीडिया का सवाल अरविंद की सियासी समाज के लिए ठीक नहीं, जिस मीडिया की देेन है अरविंद केजरीवाल आज उस मीडिया पर सेंसर चाहते है शायद मीडिया पर सेंसर ही अरविंद की सियासत के लिए अनुरूप हो..अरविंद का मीडिया पर अंकुश इसलिए क्योंकि केजरीवाल का आरोप मीडिया सरकार की छवी बिगाड़ने की साज़िश कर कर रही है अपनी सरकार पर खड़े हो रहे सवालों पर अरविंद को मीडिया की साज़िश दिखती है लेकिन ये वही मीडिया जो पिछली सरकारों पर सवाल खड़ी करती थी तो अरविंद मीडिया के इन सवालों का सहारा लेकर अपनी राजनीति चमकाते थे और आयदिन किसी ना किसी के खिलाफ खुलाशों का पिटारा खोलते थे जिस मीडिया पर अरविंद आज अंकुश चाहते है सेंसर चाहते है लगाम चाहते है उसी मीडिया के मार्फत सियासी सवाल करते थे मीडिया की खबरों का हवाला देते थे आज मीडिया पर अंकुश चाहते है क्योकि सवाल आज अरविंद से है..केजरीवाल सत्ता  के सिहासन पर बैठे दिल्ली के सुल्तान बनें है तो सवाल तो बनता ही है पर जबाब एक है केजरीवाल के खिलाफ खबरनीशों की खैर नहीं जो सुर्खियां अरविद के अनुरूप नहीं उनकलमवालों के कलम को केजरीवाल 'कलम' कर देंगे उस टीवी चैनल की चैन छीन लेंगे  जो केजरीवाल के खिलाफ हो जो अरविंद के अनुरूप ना हो उन खबरनीशों की केजरीवाल खाल खींच लेंगे क्योंकि केजरीवाल को सवाल पसंद नहीं केजरीवाल मीडिया का पब्लिक ट्रायल चाहते है क्योकि आज सवाल बीजेपी. कांग्रेस पर नहीं बल्कि सबसे अलग राजनीति करने वाली पार्टी आप पर है  ईमानदारी, सच्चाई की कॉपी राइट और फ्रेंनचायजी रखने वाली,  प्रेस पर सेंसर की बात करने वाली  आम आदमी पार्टी  पर है जिसे अपने खिलाफ सवाल पसंद नहीं अपने नापसंद का प्रेसवाला पसंद नहीं अपने सामने सरकार विरोधी सवाल करने वाला पसंद नहीं , पसंद है तो सिर्फ मीडिया पर अंकुश लगाना...आज सवाल केजरीवाल सरकार पर है आप पार्टी पर है केजरीवाल के करिबियों पर है अरविंद के मंत्रियों पर है तो मीडिया पर अंकुश तो बनता है क्योकि सच्चाई और ईमानदारी से केजरीवाल का साथ इसकदर है जैसे आत्मा और रूह तो भला मीडिया ऐसे ईमानदार शासक पर सवाल कैसे कर सकती है...


 मीडिया पर अंकुश लगाने की आकांक्षा अरविंद के मन में क्यों जगी ये बात समझना इतना ही जरूरी है जितना इमानदारी को समझने के लिए अरविंद को समझना...आप ईमानदारी को समझे या ना समझे लेकिन इमानदार होने के लिए अरविंद केजरीवाल को समझे क्योंकि ईमानदारी की कॉपीराईट सिर्फ और सिर्फ अरविंद के पास है..पर सरकार पर तो सवाल बनता है लेकिन केजरीवाल को सरकार पर सवाल पसंद नहीं चाहे बात आप के कुमार विश्वास के संबंधो को लेकर सवाल हो, केजरीवाल सरकार के क़ानून मंत्री की क़ानूनी शिक्षा को लेकर सवाल हो या केजरीवाल के चुनावी वादों को लेकर जिसमे केजरीवाल इस बार पर जोर देते कि पांच साल में 40 फीसदी वादें भी पूरें हो तो ब
ड़ी बात,  लेकिन कोई सरकार से सवाल तो ना करे  नहीं तो उनखबरनीशों की खैर नहीं...क्योंकि केजरीवाल कार्रवाई कर देंगे, दिल्ली के सुल्तान केजरीवाल के सिपहसलाहकार सिसोदिया मीडिया ट्रायल को सही बताते है जो खुद भी खबरनीश रह चुके है लेकिन सिसोदिया अब खबरनीश नहीं सरकार में हैं और सरकार मीडिया पर अंकुश चाहती है पार्टी के  नेता कुमार विश्वास के संबंधों पर मीडिया ने सवाल खड़े किए तो पार्टी के दूत संजय सिंह बोले की मीडिया खबर को बढ़ा-चढ़ा कर दिखा रही है और सुल्तान बोलें हमारे परिवर बच्चों को बख्श दों..केजरीवाल के लाल, कुमार विश्वास पर आरोप की आम चुनाव के दौरान उन्होने पार्टी की एक  महिला कार्यकर्ता के साथ संबंध बनाएं इस पीड़ित महिला की वेदना सुनिए आज जो खास विश्वास की आम पीड़ित है

लेकिन अरविंद महिला के आरोपों से खुद को अलग कर विश्वास का नीजि मामला बता रहे है लेकिन पीड़ित के बारे में कुछ भी नहीं बोल रहे है आज सुल्तान अरविंद मीडिया पर अंकुश चाहता है सवाल बड़े थे जवाब सिर्फ एक मीडिया पर सेंसर क्योकि सरकार को सवाल पसंद नहीं अरविंद के क़ानून मंत्री के शिक्षा पर सवाल उनके फर्जी डिग्री को लेकर  बवाल हुए तो मंत्री जी ने  मोदी सरकार की मंत्री ईरानी के डिग्री का हवाला देते हुए  हुए मोदी पर हमला बोल दिया ठीक उसी तरह जैसे खुद को सही बताने से अच्छा दूसरे को ग़लत बता दो तो मंत्री तोमर जी ने वही किया और ईरानी को ही फर्जी बता दिया...फिर वही सवाल क्या केजरीवाल के कौरव सही हैं इमानदारी की फ्रेंनचाइजी अरविंद के पास ,है तो  क्या  डिग्री छापने वाली मशीन ग़लत है या डिग्री देने वाली विश्वविद्यालय झूठा है तो सही कौन है केजरीवाल के मंत्री, डिग्री छापने वाली मशीन या वो विश्वविद्यालय जिसने तोमर को कानून की डिग्री दी, क्या डिग्री छापनी वाली मशीन की स्याही झूठी है जो केजरीवाल के रंग की तरह अपना रंग नहीं बदल सकती है या फिर केजरीवाल जो सबको अपने रंग में रंग देना चाहते है... सवाल कई है लेकिन सुल्तान को अपने खिलाफ , सत्ता के खिलाफ सवाल पसंद नहीं है 






Sunday, 19 April 2015

मुफ्ती का 'मसर्रत' मोह

मुफ्ती-मसर्रत

मसर्रत आलम अलगाववादी नेता एक अलग दुनिया का नेता देश को बांटने वाला नेता देशद्रोही नेता    जिस नाम से बुला लो अलग-अलग तरीके से एक ही नेता देशद्रोही मसर्रत आलम ..मुफ्ती का मसर्रत और पाकिस्तान मोह किसी से छुपा नहीं मुफ्ती सईद ने सीएम पद की शपथ लेते ही अपने शब्दों से देशद्रोह का आलम जगजाहिर कर दिया और जम्मू में  शांतिपूर्ण चुनाव के लिए अलगाववादियों और पाकिस्तानियों को इसका भरपूर श्रेय दे दिया वो श्रेय जिसका हकदार देश की सेना, चुनाव आयोग और आम जनता है ना कि अलगाववादी  लेकिन सईद मुफ्ती ने इसका पूरा अंक आलगाववादियों को दे दिया मुफ्ती का ये अलगाववादी मोह देख देश हैरान था परेशान था अलगाववादियों को लेकर देश आशंकित भी था लेकिन मुप्ती  आलगाववाद को लेकर अश्वस्त थे  देश के यही असली अंगरक्षक हैं अलगाववादी ही देशप्रेमी है..

 मुफ्ती ने सीएम बनते ही मसर्रत मोह दिखाया और इस देशद्रोही को 17 साल बाद जेल से रिहा कराया कई देशविरोधी गतिविधियों सहित 27 अपराधों में  शामिल मसर्रत आलम जब 17 साल बाद जेल से बाहर आया तो मानो कश्मीरी अलगाववादियों में अलग जान आ गई देशद्रोहियों की पहचान आ गई ये आलम था जो देशद्रोह के लिए जाना जाता था आज मुफ्ती की मोह से आलम आजाद देश हैरान है कश्मीर परेशान है ये कशमीर के लोग है जो जीने की आस के साथ  आज भी जन्नत में जिंदगी को आतूर है लेकिन डर आज भी है कि जीवन की आस किसके साथ लगाएं यहां तो हर कोई रकीब हैं किसको अपना हबीब बनाएं किसको कहे मेरे साथ कौन इनके करीब है  मसर्रत आज आज़ाद है पाकिस्तान से भारतविरोधी गतिविधियां स्वतंत्र है मसर्र्त किसी कि लिए आज साहब है तो किसी के लिए जिहाद है क्योकि भारत का सबसे बड़ा दुश्मन हाफिज सईद मसर्रत के साथ है आज  देशद्रोही   आलम आज़ाद है देश हैरान भारत में रहकर गो-इंडिया गो-इंडिया बोलने वाला आलम आज खुलेआम आग उगल रहा है अलगाववादी आज खुश है क्योंकि आलाम आज आज़ाद है...ये मसर्रत पर मुफ्ती का मोह है कि आलम आज फिर आज़ाद है


मुफ्ती का मसर्रत मोह  पाकिस्तान  प्रेम और अलगाववादियों का आदार एकबार फिर छलक गया कई सालों से छुपें मोह को मुफ्ती ने इसकदर उछाला कि शायद पाकिस्तानी और अलगाववादी भी नहीं संभाल सके और भारत का खाकर तेरी जान मेरी जान पाकिस्तान-पाकिस्तान के नारे अलगाववादियों के आवाज इस देशद्रोही नारे के साथ  आकाश में गूंजने लगा मसर्रत का इतिहास है कि भारत विरोधी को अभियानों को चलाकर पाकिस्तान मोह जता चुका है पाकिस्तान पाकिस्तान मेरी मेरी जान बता चुका है आलम आज आज़ाद है
देशद्रोही  मसर्रत का पाकिस्तान मोह इस कदर दिखा कि आलम भारत के खिलाफ आग उगला कश्मीर भारत का अंग नहीं तक कह डाला अपने आप को भारत का नागरिक नहीं बता डाला मसर्रत का दोशद्रोही आलाम देख आज हमसब हैरान है परेशान है आज आलम आज़ाद है मुफ्ती का मसर्रत मोह आज आलाम आज़ाद है देश हैरान ...

देशद्रोही आलाम को पुलिस ने गिरफ्तार किया देशगद्दार आलगाववादियों ने पुलिस पर पथराव किया अलगाववादियों के आग से घाटी से जल रही थी सुलग रही थी जमीन की जनन्त अपनी जिंदगी के लिए जद्दोजहत कर रही थी अपनी सुंदरता को आलगाववाद के आग तले जलते देख कराह रही थी अपनी खुबसूरती की दुहाई दे रही थी  घाटी  जल रही थी पुलिस मर रही थी..जिंदगी शरीर को छोड़ रही थी आलम गिरफ्तार हुआ बाहर कोहरमा हुआ आलम पर आफत आते देख पाकिस्तान परेशान हुआ हैरान हुआ पाकिस्तान परस्त मसर्रत पर पाकिस्तान में बैठा आतंकी का बयान आया मसर्रत जेहादी मैं उसका साथी हूं ..


मसर्रत आलम के गिरफ्तार होते ही अलगाववादियों ने कश्मीर बंद बुलाया सरकार के प्रति आलम के गिऱफ्तारी को लेकर विरोध जताया मुप्ती को मसर्रत मोह का याद दिलाया लेकिन केंद्र  सरकार का दबाव काम आया और मुफ्ती ने देशद्रोही मसर्रत को गिरफ्तार कराया आलम की गिऱफ्तारी देशद्रोही अलगाववादियों के लिए एक धक्का था इनके देशद्रोही मंशुबों पर लगाम था अलगाववादी आज आज़ाद था देश हैरान था परेशान था मसर्रत की गिरफ्तारी के बाद कश्मीर जल रहा था पुलिस पर पत्थर बरस रहे थे आलगाववादी सेना पर आग बरसा रहे थे मसर्रत के मोह में मुप्ती बैठकर तमासा देख रहे थे आलगाववादी  आग उगल रहे थे पत्थरबाज़ी की तस्वीरों में देखिए पुलिस मसर्रत मोह में प़ड़े इन युवकों को खदेड़ रही थी युवक पुलिस पर दनादना पत्थर बरसा रहे थे पुलिस इन आलगाववादी समर्थकों के आगे बेबस लाचार कर्महीन दिख रही थी पुलिस इन देशद्रोहियों से अपने आप को नहीं बल्कि भारत को बचा रही थी  आवगाववादियों की भारतविरोधी मंशा  साफ नजर आ रही थी आलम आज आज़ाद है..  एक और आलगाववादी नेता गिलानी भी आलम की गिरफ्तारी के गम से गमगिन था पुलिस पर पथराव होते देख गिलानी इसबात से खुश था कि अलगाववाद की आग कश्मीर की घाटी को जला रही है भारत की शान को दफना रही है ये सब देख देशद्रोहियों की शान बढ़ रही थी अलगाववाद के आग से कश्मीर की घाटी जल रही थी..पुलिस पर पथराव की तस्वीरे कश्मीर घाटी की है जहां अलगाववादियों का गढ़ है अलगाववादी इसकी छांव में आग उगलते है कश्मीर को अपने आग से दहकाते है घाटी को जलाते है आज कश्मीर जल रही है क्योकि देशद्रोही मसर्रत की गिरफ्तारी आलगाववादियों को नहीं भा रही है..ये सब देख हमसब हैरान है परेशान घाटी की आग पूरे देश को जला रही ही है अलगाववाद के आग से घाटी जल रही है