Sunday, 11 October 2015

बिहार विधानसभा चुनाव 2015

मतदान तारीख--12 अक्टूबर
10 जिलों की 49 सीटों पर वोटिंग
समस्तीपुर- कल्याणपुर (एससी), वारिसपुर, समस्तीपुर, उजियारपुर, मोरवा, सरायरंज, मोहीउद्दीन नगर, विभूतीपुर , रोसड़ा (एससी), हसनपुर , 10 सीट-136 प्रत्य़ाशी
बेगूसराय-चेरियाबरियार, तेघड़ा, बछवाड़ा, मटिहानी, साहेबपुरकमाल, बेगूसराय, बखरी, 7 सीट -68 प्रत्याशी
खगड़िया-अलौली, खगड़िया, बेलदौर, परबत्ता, 4 सीट-48 प्रत्याशी
भागलपुर-बिहपुर, गोपालपुर, पीरपैंती, कहलगांव, भागलपुर, सुल्तानगंज, नाथनगर, सीट-7 प्रत्याशी 87
बांका-अमरपुर, बांका, धुरैया, कटोरिया, बेलहर, 5 सीट-53 प्रत्याशी
मुंगेर-तारापुर, मुंगेर जमालपुर, 3 सीट-39 प्रत्याशी
लखीसराय-सूर्यागढ़ा, लकीसराय, 2 सीट-26 प्रत्याशी
शेखपूरा-, शेखपुरा, बरबीघा, 2 सीट-27 प्रत्याशी
नवादा-रजौली (एससी), हिसुआ, नवादा, गोविंदपुर, वारसलिगंज, 5 सीट-49 प्रत्याशी
जमुई-सिकंदर, जमुई, चकई, झांझा, 4 सीट-50 प्रत्याशी

कुल 49 सीट 583 प्रत्याशी
पहले चरण के लिए 583 प्रत्याशी
49 सीटों पर मतदाताओं की संख्या 1 करोड़, 35 लाख, 35 हजार, 586
पुरुष मतदाता-72 लाख 27 हजार 835
महिला मतदाता-63 लाख 7 बजार 345
थर्ड जेंडर मतदाता-406
मतदान केंद्र-12 हजार 686
मतदान भवन-9301
49 सीट के लिए 1 लाख 20 हजार पारा मिलिट्री और बिहार पुलिस तैनात
मतदान केंद्रों पारा मिलिट्री की तैनाती, और पेट्रोलिंग में बिहार पुलिस
85-90 हजार सिविल अधिकारी की तैनाती
फाइल फोटो

583 प्रत्याशियों में 174 (30 फीसदी) आपराधिक मामले दर्ज
174 में से 130(22 फीसदी) प्रत्याशियों पर किडनैपिंग, मर्डर, हत्या की कोशिश, महिलाओं के प्रति अपराध जैसे गंभीर मामले दर्ज
16 प्रत्याशियों पर IPC की धारा 302 के मामले दर्ज
नवादा जिलें वारसलिगंज से जेडीयू के प्रत्याशी प्रदीप कुमार पर हत्या से जुड़े 4 केस दर्ज
307 प्रत्याशियों पर IPC 307 के तहत मामला दर्ज
BSP का एक प्रत्याशी, BJP के एक, JDU के 3, JAP के 1 और निर्दलीय के 1 प्रत्याशी पर हत्या की कोशिश के मामले दर्ज
11 प्रत्याशियों पर महिलाओ से जुड़े आपराधिक मामले दर्ज
 
फाइल फोटो
संपत्ति
583 में से 146 (25 फीसदी) प्रत्याशी करोड़पति
पहले चरण के लिए 583 प्रत्याशियों में से औसतन संपत्ति 1.44 करोड़

सबसे ज्यादा संपत्ति वाले उम्मीदवार
वारिसनगर सीट से निर्दलीय विनोद कुमार सिंह 74, 73, 83, 190
खगड़िया से जेडीयू की पूनम देवी यादव 41,34,45,969
भागलपुर से कांग्रेस के अजीत कुमार 40,57,35,981

सबसे कम संपत्ति वाले उम्मीदवार
बखरी से भारतीय जनहित दल के सुरेश सादा-जीरों
हिसुआ से मूलनिवासी समाज पार्टी के प्रदीप राजबंशी --जीरों
बरबीघा से निर्दलीय योगेश्वर मांझी 1000 रु की संप्त्ति( आयोग के अनुसार इन्होने पूरी संपत्ती की डिटेल एफीडेविट में नहीं दिया

जिन प्रत्याशियों ने आयकर डिटेल नहीं दिया

अलौली से बहुजन मुक्ति पार्टी के उदय प्रकाश सादा कुल संपत्ति 10, 30,70, 500

जमुई से किसान अल्पसंख्यक मोर्चा के बलदेव प्रसाद भगत कुल संपत्ति 7,16,05, 559

लखीसराय से जेडीयू के रामानंद मंडल 2,40,66,100

पार्टी में आपराधिक प्रत्याशी
BSP के 41 में 8-20 फीसदी

BJP के 27 में14-52 फीसदी

CPI के 25 में 14-56 फीसदी

JDU के 24 में 44 46 फीसदी

सपा के 18 में 9-50 फीसदी

आरजेडी में 17 में 8-47 फीसदी

जेएपी में 16 में 9-56 फीसदी

एलजेपी में 13 में 8-62 फीसदी

कांग्रेस में 8 में 6-75 फीसदी

आरएलएसपी में 6 में 4-67 फीसदी

हम में 3 में 2 67 फीसदी

पार्टी में करोड़पति उम्मीदवार

जेडीयू में 24 में 19-79 फीसदी

बीजेपी में 27 में 18-67 फीसदी

आरजेडी में 17 में 11-68 फीसदी

एलजेपी में 13 में 8-62 फीसदी

कांग्रेस में 8 में 6-75 फीसदी

जेएपी में 16 में 5-31 फीसदी

टॉप 10 ज्यादा संपत्ति वाले प्रत्याशी

वारिसनगर सीट से निर्दलीय विनोद कुमार सिंह 74, 73, 83, 190
खगड़िया से जेडीयू की पूनम देवी यादव 41,34,45,969
भागलपुर से कांग्रेस के अजीत कुमार 40,57,35,981
सिकंदरा से बीएसपी की रेखा देवी 39, 03,05,000
झांझा से किसान अल्पसंख्यक मोर्चा के उमाशंकर भगत  37,8812,596
तेघड़ा से आरजेडी के बीरेंद्र कुमार 19,0674,731
बांका से बीएसपी के अजीत कुमार-17,01,26,748
हिसुआ से जेडीयू के कौशल यादव 16,14,86,483
गोविंदपुर से कांग्रेस की पूर्णिया यादव 16,14,86,183
लखीसराय से बीजेपी के विजय कुमार सिन्हा 15,64, 10,626


टॉप 10 कम संपत्ति वाले प्रत्याशी

बखरी से भारतीय जनहित दल के सुरेश सादा-जीरों
हिसुआ से मूलनिवासी समाज पार्टी के प्रदीप राजबंशी --जीरों
बरबीघा से निर्दलीय योगेश्वर मांझी 1000 रु की संप्त्ति( आयोग के अनुसार इन्होने पूरी संपत्ती की डिटेल एफीडेविट में नहीं दिया

हिसुआ से बीएसपी के लव कुमार सिंह 2500 रु
बिहपुर से निर्दलीय सुमन कुमार 4,000
नाथनगर से गरीब जनता दल के संदीप कुमार शर्मा-5,000
लखीसराय से बीएसपी के मनोज कुमार 15000
मटिहानी से बहुजन मुक्ति पार्टी के रणवीर कुमार 15,300
बेगूसराय ने निर्दलीय अमरजीत शाह 15,500

बांका से निर्दलीय राजेंद्र राय 15,500

Thursday, 8 October 2015

दादरी का दर्द ना समझे कोय !

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा के दादरी के विसहेड़ा गांव के रोता-विलखता ये परिवार इकलाख का परिवार है जिस इकलाख को गांव वालों ने पीट-पीट कर मार डाला इकलाख की मौत नहीं हुई उसे मार दिया गया उसकी मौत का निमंत्रण विसहेड़ा गांव के मंदिर के लाउडस्पीकर से आया जिस मंदिर से  एलान हुआ कि इकलाख का परिवार बीफ खाता है और अपने घर में बीफ रखता है इस लाउड स्पीकर से एलान के बाद गांव के लोग लाल हो गए और गांव में अफवाह फैला कि इकलाख का परिवार बीफ खाता है और इस अफवाह के आधार पर ग्रामीणों ने इकलाख को उसके घर से निकालकर उसे पीट-पीट कर मार डाला और मौत के मुंह में डाल दिया एक अफवाह से इकलाख की हत्या हो गई और बिसहेड़ा गांव उसकी मौत का तमासा देखता रहा...देखता रहा कि इकलाख की मौत कैसे होती है बिसहेड़ा गांव के बेदर्द लोगों ने इकलाख के बेटे को पीट-पीट कर अधमरा कर दिया आज अस्पताल में वो अपनी जिंदगी मौत के बीच झूल रहा है और राजनेता उसे अपने बयानों से झूला रहे है आज सियासत के दूल्हे बताने पर उतारु है कि मैं समाजवादी हूं , धर्मनिरपेक्ष हूं और तूं सांम्प्रादिक है ऐ बताने के लिए राजनेता दादरी का दर्द समझे बिना बिसहेड़ा गांव में बसने पर तूल गए है और सभी बताने की हर कोशिश कर रहे है हम दादरी के दर्द में हमदर्द हैं... दादरी में पुलिस प्रशासन है मगर इस गांव आज भी आशंति है...

सियासतदान कहते है सियासत ना हो लेकिन ऐसे-कैसे हो सकता है कोई राजनेता किसी के शव पर अपनी सियासत की चिंगारी को न भड़काए ये कैसे हो सकता है कोई राजनेता किसी के खून से अपनी राजनीति को रसदार ना बनाएं आखिर क्यों नहीं समाजवाद की सरकार दंगों पर काबू पाती है क्या मान लिया जाय कि राजा अखिलेश के राज में उत्तर प्रदेश दंगा प्रदेश बन गया है ये सवाल इसलिए क्योकिं मुजफ्फरनगर से दादरी तक समाजवाद के आंचल तले कई कई मांओं की आंचल उजड़ गई कई सुहागिने बेरंग हो गई और कई बच्चे अनाथ हो गए और अखिलेश कहते प्रदेश में सब प्रसन्न हैं...दादरी के दर्द में कोई हमदर्द तो नहीं बना लेकिन राजनीति सबने की अपने बयानों से राजनेताओं ने दादरी के दर्द और बढ़ा दिया दर्द को नासूर बना दिया ऐसा दर्द दिया जो कभी भर न सके...राजनेताओं ने इकलाख के परिवार के जख्मों पर मरहम तो नहीं लगाया लेकिन बेसहेड़ा गांव में जा-जाकर दादरी , बिसहेड़ा और इकलाख के परिवार के दर्द को दोगुना कर दिया..दादरी का दर्द ना जाने कोय


दादरी के दर्द को न जाने न समझे बिना कोई इसे हादसा बताता है कोई इसे हिंदू राष्ट्र बनाने की साजिश तो कोई गाय को माता बताकर मरने और मारने पर तुला है इन नेताओं के बयानों को सुन लें तो आपका और हमारा सर शर्म से थोड़ा और झुक जाए..


लेकिन यूपी के सामजवाद की सरकार को इन बयानों से शर्म नहीं आती बल्कि सियासत तेज हो जाती  है..दादरी आज ग्रेटर नोएडा का छोटा सा गांव नहीं रह गया बल्कि राजनीतिक पर्यटन स्थल बन गया है देश से बड़े से बड़े नेता आज दादरी जाने को ललाइत है जैसे दो माह का बच्चा अपनी मां का दुध पीने को छछनता है लेकिन दादरी का दर्द कोई नहीं समझता है जैसे किसी गांव में जानवर के मार जाने पर उसे खाने के लिए गिद्धों का तांता लग जाता है वैसे ही इकलाख के शव पर सियासत करने के लिए सियासी गिद्दों की लाइन लगी है..

देश का कोई नेता नहीं बचा है जिसने दादरी का दौरा ना किया हो लेकिन दर्द तो किसी ने नहीं समझा सियासत सभी ने की कोई विदेश से आता है बिहार चुनाव प्रचार छोड़कर दादरी का दौरा करता है अखिलेश के मंत्री ही अखिलेश को आंखें दिखा रहे है दादरी दंगे को मुलायम की नाकामी बता रहे है लेकिन अखिलेश ने अपनी नाकामी को छुपाने के लिए 40 लाख का मरहम लगाते है ताकि दादरी के दर्द तले अपनी नाकामी को छुपा सकें...दादरी का दर्द ना समझे कोय


Thursday, 24 September 2015

जातिवाद के साथ विकास की बात

शयद किसी राजा ने राज-धर्म पालन के लिए अपनी प्रजा का जात-पात नहीं पूछा होगा, उससे उसका नाम नहीं पूछा होगा, उससे उसका DNA नहीं जाना होगा, लेकिन बिहार की सियासत में पाटलीपुत्र राजा नीतीश कुमार बिहार की जनता का विकास उसके जातिगत आंकड़े से मानते है...बिहार की सियासत में विकास भारी या जातिवाद ये तो आने वाला समय ही बताएगा लेकिन चुनावी माहौल में विकास के पीछे-पीछे जातिवाद भी अपने परछाई को दिखा रहा है और आने वाले समय में दिखाएगा कि बिहार की राजनीति में विकास की बात करने वाले सियासत दान जातिवाद के जाल में फंस कर कैसे अपनी जात-पात को, नाम को, सम्मान को और अपने राजनीतिक प्रतिष्ठा को आगे कर बढ़ता रहे बिहार के रास्ते से विकास को हटा देंगे...

लेकिन सियासत की सही समझदारी ही वो है जो सही समय पर सही तरीके से सही तजुर्बें से साथ उस नीति को अपनाएं जिसके सहारे राजनेता धुंधले सियासत की जमात में अपने आप को , अपनी राजनीति को, अपनी चमचमाती सफेद कपड़ो को, अपनी प्रतिष्ठा को जनता की जलते चेहरे के रौशनी की चमक से अपनी राजनीति को चमका सकें..लेकिन जिस जनता के सराहे नेता अपनी राजनीति को उठाते है जो जनता एक झटके में इन नेताओं को फर्श से अर्श तक दूरी तय करने में सियासी समझदारी दिखाती है उस जनता को ये नेता विकास मशीन, विकासशील जनता के रुप में नहीं बल्कि जात-पात, धर्म, ये मेरी जात, ये तेरी जात ये मेरा DNA ये तेरा  DNA के आधार पर हमारे विकास पुरुष नेता देश की जनता सौदा करते है..ये सियासत का सौदा ही है कि जिस जात की जितनी आबादी उसे लोकतंत्र में लोकतांत्रिक लड़ाई लड़ने का मौका उसके जात के आधार पर मिलेगा..ये जरुरी नहीं कि वो जनता का विकास करेगा की नहीं, वो नेता जनता के हक की बात करेगा की नहीं, वो जनता के लिए लड़ाई लड़ेगा की नहीं बल्कि उसे बताने होगा कि वो किस जात से आता है उसे किस जाति का कितना वोट मिलेगा..वो सेक्यूलर है कम्युनल इस बात पर उस नेता के जनाधार का फैसला होगा और तय होगा कि उसे टिकट मिलेगा की नहीं...


शायद किसी सिनेमा घर के खिड़की फिलम के टिकट के लिए इतना हो हल्ला नहीं होते देखा होगा जितना कि बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टियों के टिकट को टिकट पाने वाले हर दावं को लगाते देखा...पीएम मोदी के खिलाफ लामबंद महागठबंन ने आखिर अपने प्रत्याशियों का एलान कर दिया मुस्कराते हुए सीएम नीतीश ने मीडिया को बताया कि टिकट बंटवारे में अपने सभी जातियों का ध्यान रखा, हमने सबके सम्मान किया है . हमने बिहार के सुशासन राज कायम किया है.. महागठबंधन में सीटों का बंटवारे हुआ तो विकास पुरुष की नीतीश कुमार की नजरे जाति के आकंडे पर गई नीतीश ने बताया कि उनके गठबंधन ने बैकवार्ड को 55 फीसदी, जनरल (अपर कास्ट को 16 फीसदी), मुसलमान को 14 फीसदी,  एससी-एसटी को 15 फीसदी टिकट दिया गया..नीतीश ने टिकट बांटे हो सकता है कि वो सभी जातियों का ध्यान रखते हो लेकिन जिन आकंडो पर नीतीश की चुनावी नजरे है वो साफ-साफ दिखाते है कि ये विकास की नहीं बल्कि जात-पात, धर्म की राजनतीति करने के आंकड़े है बिहार में अपर कास्ट के वोटर 15 फीसदी है, 51 फीसदी बैकवार्ड वोटर, 17 फीसदी मुसलमान वोटर, एससी-एसटी वोटर (16 एससी-1.3 एसटी वोटर) ये वो आंकड़े है जिन आकंड़ो पर नीतीश की आंखे टिकी है और नीतीश को उम्मीद है कि वो विकास से सहारे जातिवाद की राजनीति कर तीसरी बार सत्ता पर काबिज हो सकते है


इन आकंड़ो पर ध्यान दें और नीतीश जिन आंकड़ो के सहारे सियासत कर रहे है उन दोनों में मेल करे तो साफ दिखेगा बिहार की सियासत में और लालू वाले महागबंधन में जातिवाद का बोल बाला है... लालू ने 101 में से ज्यादातर उम्मीदवार अपने पारंपरिक वोट को देखते हुए MY समीकरण पर ध्यान दिया है खास बात कि टिकट बंटवारे में लालू ने गौर उपर कास्ट और नीतीश ने उपर कास्ट को साधने की कोशिश की है तो वही कांग्रेस लालू के लालटेन और नीतीश के तीर के सहारे अपनी गुम हो चुकी राजनीतिक जीवन में ज्योति कर राजनीतिक जंग में सही निशाना लगाना चाहती है 

Sunday, 30 August 2015

मोदी के खिलाफ महागठबंधन की 'स्वाभिमान रैली'

सियासत में समय पर समझदारी ही सही समझौता होता है इसी समझदारी वाली समझौता के बल पर बीजेपी को हराने के लिए लालू-नीतीश और सोनिया की स्वाभिमान रैली पटना के गांधी मैदान में आयोजित हुई इस स्वाभिमान रैली में बिहार के स्वाभिमान की दुहाई दी गई उस बिहार की दुहाई दी जिसे पीएम मोदी बीमारु कहते है जिसे पीएम गरीब बताते है अर्थव्यवस्था में सबसे पिछड़ा राज्य बताते है उस बिहार के स्वाभिमान को जगाने के लिए लालू ने अपने स्वाभिमान को मार डाला नीतीश ने अपने नीति को सोनिया के सहारे  छोड़ दिया उस कांग्रेस के सहारे बिहार को आगे बढ़ाने का सोच लिया जिस कांग्रेस ने अपने 40 साल के कार्यकाल में बिहार को 40 कदम भी आगे नहीं बढ़ाया...


नीतीश ने बिहार में लालू के उस सुशासन के सहारे सरकार बनाने का सोच लिया जिस सुशासन के सहारे बिहार में जंगलराज और गुंडागर्दी का राज होता है इस बिहार का स्वाभिमान जंगलराज और गुंडागर्दी के सहारे नहीं बल्कि जनादेश के सहारे जगेगा.इस स्वाभिमान रैली में लालू-नीतीश-सोनिया पहली बार एक मंच पर एक साथ दिखे पहली बार बीजेपी और मोदी के तीन ध्रुव विरोधी एक दूसरे के साथ एक दूसरे के सुर में सुर मिलाते हुए नजर आए... महागठबंधन को सजाने संवारने वाली समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह ने लालू-नीतीश के स्वाभिमान से अपने स्वाभिमान को दूर रखा और अपने समधी की स्वाभिमान रैली में अपने भाई शिवपाल को भेज कर मुलायम ने बता दिया कि लालू के स्वाभिमान से मुलायम का स्वाभिमान बड़ा हैं



स्वाभिमान रैली में सबसे पहले बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने बोलना शुरु किया तो राबड़ी के निशाने पर पीएम मोदी और कभी लालू के करीबी, RJD से सांसद रहे पप्पू यादव को राबड़ी ने मारकर भगाने की बात कही तो पीएम मोदी को झूठा बता दिया बिहार की पूर्व सीएम राबड़ी ने नीतीश को बिहार का सबसे बेहतर सीएम बता दिया अगर नीतीश की नीति अच्छी है और नीतीश के राज में बिहार में रामराज आया तो क्या लालू और खुद की सरकार को राबड़ी अच्छा नहीं मानती है  क्या 15 साल की लालू- राबड़ी की सरकार नीतिहिन और जंगलराज का था और अगर लालू-राबड़ी की सरकार अच्छी थी बेहतर थी, और सुशासन वाली थी तो नीतीश कुमार बिहार के सबसे बेहतर सीएम और नीतीश की सरकार सुशासन वाली कैसी हुई राबड़ी के लिए बेहतर सीएम कौन लालू या नीतीश?

बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने रैली को संबोधित करना शुरु किया तो नीतीश के निशाने पर पुराने दोस्त और नए दुश्मन पीएम मोदी थे नीतीश ने बिहार में बढ़ते अपराध वाले पीएम के बयान पर पलटवार करते हुए नीतीश ने बीजेपी शासित राज्यों में बढ़ते अपराध के बहाने बीजेपी और पीएम मोदी पर प्रहार किया नीतीश ने अपने पुराने दोस्त को बिहार का इतिहास बताया, बुद्ध को ग्यान देने वाला राज्य बताया, लेकिन नीतीश ने बिहार के सबसे बड़े आंदोलन और देश की राजनीति को बदल देने वाले जेपी आंदोलन का चंदन कुमार ने जिक्र तक नहीं किया...नीतीश को जेपी आंदोलन भूला दिया जैसे कोई बुरे सपने को भूल जाता है लेकिन नीतीश जेपी आंदोलन का जिक्र करते भी कैसे बगल में धर्मनिरपेक्षता की देवी सोनिया गांधी बैठी थी जिनकी सास ने जेपी को जेल भेज दिया था आंदोलन का जिक्र करते तो नीतीश को कांग्रेस के नीयत पर शक होता जो सोनिया को पसंद नहीं आता..सोनिया के सामने जेपी का जिक्र मोदी विरोधी महागठबंधन के लिए ठीक नहीं होता जो कांग्रसियों को रास नहीं आता..


मंच से नीतीश ने विरोधियों के सहारे लालू के नेतृत्व पर सवाल खड़ा किया कि विरोधी कहते है कि लालू का राज जंगलराज था मंच पर बैठे लालू मुस्कराते हुए नीतीश की नियत को समझ रहे थे जंगलराज किसका है मेरा या नीतीश का...


नीतीश ने लैंड बिल पर पीएम मोदी पर निशाना साधा उस बिल को लेकर पीएम मोदी नीतीश के निशाने पर थे नीतीश ने कांग्रेस के भूमि बिल को किसानों का बिल बताया तो मोदी के बिल को किसान विरोधी बताया अपने पुराने दोस्त के भूमि बिल से नीतीश नाराज है जो बिल किसानों के जमीन को छीन लेना आसान कर देती है इस बात को बोलते हुए नीतीश मुस्करा रहे थे पीएम के झुकने की बात कर रहे थे आज दिन को नीतीश खुशी का दिन बता रहे हैं क्योंकि पीएम आज नीतीश की नजरों में झुक गए है..


.देश की सियासत में अपनी राजनीति को चमकाने के लिए नीतीश किसानों के लिए आज भूखे बैठने की बात कर रहे है जिस राज्य में नीतीश के नाकोतले किसान मरने को मजबूर है पांच लीटर किरोसिन और एक डब्बा डीजल के लिए किसान भटक रहे हैं लेकिन आज नीतीश किसानों के लिए भूखा बैठने की बात कर रहे हैं..लालू सुशासन की बात कर रहै है...ये ही बिहार का स्वाभिमान है ? जिस स्वाभिमान की लड़ाई लड़ रहे लालू-नीतीश पीएम को ललकार रहे हैं बार-बार DNA की दुहाई दे रहे है  उस स्वाभिमान का DNA सैंपल भेजने वाले लिफाफे रोड पर लोगों के पैरों तले कुचलते नजर आए...ये बिहार का नहीं बल्कि लालू, नीतीश, सोनिया  का स्वाभिमान था जिसे लोगों ने पैरों तले कुचल दिया। 



Wednesday, 12 August 2015

मोदी के मुकाबले महागठबंधन तैयार

समय के मारे दो सियासी दुश्मन आज एक हो गए है या एक दिख रहे है एक मंच पर लालू नीतीश प्रेस को संबोधित कर कर रहे हैं मीडिया को बता रहे हैं कि कैसे महागठबंधन ने मोदी का काट तैयार किया है मोदी को हराने का रोडमैप बना लिया है हमने सीटों को बंटवारा कर लिया हम दुश्मन नहीं दोस्त बन गए है लालू का अपना सियासी अंदाज है वो बता रहे है कि कैसे नीतीश के पुराने दोस्त और नए दुश्मन मोदी का बिहार के चुनावों में बंटाधार करेंगे लालू- नीतीश जिन्होने एक दूसरे का सियासी विरोध कर अपनी राजनीतिक हैसियत को तैयार किया जो लंबे समय तक एक दूसरे के कमियों को जनता के बीच गिनाते रहे आज वो सियासत मे नए दोस्त बन गए है आज कमियां नहीं एक दूसरे की खुबियां बता रहे हैं



जंगलराज और गुंडाराज को भूला कर बिहार की जनता को अपने विकास राज की याद दिला रहे है नीतीश के सुशासन वाली सरकार को जीताने की बात करे रहे है आज लालू यादव नीतीश को बिहार का कस्टडीयन बता रहे है नीतीश इस सुशासन का हाल बता रहे है जिस सुशासन में रोज कई आम लोगों की हत्या होती है आम आदमी परेशान है पटना में एक पॉलिटिकल मर्डर हो जाता है प्रदेश में नीतीश की प्रजा परेशान है और नीतीश अपने विकास और सुशासन की बात करते हुए मीडिया को बता रहे है कैसे उन्होने बिहार में विकास किया कुछ लोगों ने तो सिर्फ जुमलेबाजी कि है नीतीश का सवाल मोदी की सरकार ने एक साल में क्या काम किया अपने पुराने दोस्त और नए दुश्मन से नीतीश का सवाल है कि मोदी ने कुछ नहीं किया किया तो सिर्फ जुमलेबाज़ी कभी दोस्त रहे मोदी में नीतीश को कई कमियां दिखती है तो कई दशक तक दुश्मन रहे लालू के साथ नीतीश आज दोस्ती की दुहाई दे रहे है नीतीश बता रहे कि राजद जेडीयू एक है एक साथ चुनाव लड़ बीजेपी को हाराएंगे अपने विकास के बल चुनाव में जनता के बीच जाएंगे साझा प्रेस वार्ता में नीतीश ने बिहार की जनता को बता दिया लालू अब नीतीश के साथ है और मोदी के खिलाफ महागठबंधन तैयार है 


देश में राजनीतिक जमीन खो चुकी और बिहार से प्रांसंगिक हो चुकी देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस  भी इस गठबंधन के सहारे जीत का सहरा बांधने को तैयार है बिहार के चुनाव में आज इस गठबंधन ने सीटों की साझेदारी भी तय कर दी नीतीश और लालू 100-100 सीटों पर चुनाव लड़ेगे तो कांग्रेस 40 सीटें पर बिहार में अपना किस्मत आजमाएगी 



जनता परिवार को संजोने, संवारनी वाली और लालू की समधिया समाजवादी पार्टी को लालू-नीतीश ने एक भी सीटे नहीं दिया तो मुलायम के नेता महागठबंधन पर कठोर हो गए नीतीश के प्रति नाराजगी जाहिर कर  दी समाजवादी पार्टी के बिहार अध्यक्ष ने बता दिया को पार्टी को अधिकार नहीं मिला तो नीतीश-लालू खामियाजा भुगतेंगे तो सवाल सिर्फ महागठबंधन का नहीं लालू-मुलायम के समधियाने का भी है नेताजी के नेता इस बात को लेकर निश्चिंत है कि नेताजी सिद्धांत को पहले समधियाने को बाद में रखते है 


जब सिद्दांत की बात हुई तो लालू ने उसी दोस्त के सामने बीजेपी-आरएसएस के खिलाफ अपना इरादा बता दिया जिस दोस्त ने बीजेपी के साथ 17 साल तक साथ निभाया लालू ने नीतीश के सामने ही बता दिया कि वो बीजेपी-आरएसएस को नागपुर पहुंचा देंगे ये सुनते हुए लालू के बगल में बैठे नीतीश मुस्कराते हुए लालू की बातों में सहमति जता रहे थे




लालू मीडिया को बता रहे थे ये बिहार का नहीं बल्कि देश का चुनाव है पूरे देश की नजर हम पर है पूरी ताकत से बीजेपी के खिलाफ 30 अगस्त को पटना के गांधी मैदान से बिहार के लिए स्वाभिमान रैली करेंगे जब सीटों पर फैसला हो गया और सिद्धांत की बात हो ही रही थी जो कांग्रेस के सीपी ठाकुर ने अपने सिद्धांत को सरेआम कर दिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संसदीय लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा बता दिया कांग्रेस के सीपी ठाकुर ने धर्म निरपेक्ष पार्टियों को एक साथ आने का का न्यौता दे दिया सवाल उठता है कि क्या महागठबंधन बनाकर मोदी को हराना ही मकसद है या धर्मनिरपेक्षता का ढोंगकर अपनी राजनीति चमकाना ही सटिक सिद्धांत है          

Saturday, 25 July 2015

मुज़फ्फ़रपुर में मोदी



मुजफ्फरपुर में परिवर्तन रैली के साथ बिहार विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने अपना चुनावी बिगुल शुरु कर दिया जब पीएम नरेंद्र मोदी ने भोजपुरी में बोलते हुए मुजफ्फरपुर रैली में लोगों को संबोधित किया कि बिहार के कोना कोना से आइल हमार भाई बहनो रऊआ सबसे शत-शत प्रणाम के साथ संबोधिक किया तो रैली में बैठे लोगों की आवाज आई तो मोदी-मोदी ठीक उसी तरह जैसे 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी मोदी की गुंज ने ,बिहार में बीजेपी 31 सीटें जीता दी...इन संबोधन के साथ पीएम मोदी ने रैली में आए लोगों को ही पीएम ने 14 करोड़ बिहारियों को अपना  संदेश भेज दिया कि वो बिहार की जनता से क्या चाहते है पीएम ने रेली में लोगों की भीड़ को देखता हुए बोले की मैं कल्पना नहीं कर सकता था कि ऐसा हुजुम देखने को मिलेगे पीएम की नजर जहां-जहां तक गई मोदी को माथे ही माथे दिखे तो पीएम मोदी ने पॉलिटिकल पंडितों को भी आगाह कर दिया कि इस कार्यक्रम को देखे तो नतीजा साफ दिख जाएगा कि अगली सरकार किसकी बनेगी...
नरेंद्र मोदी का मुजफ्फरपुर दौरा

पीएम ने ट्वीट को लेकर सीएम नीतीश पर निशाना साधा कि जब हम  कभी ट्वीट करते थे तो बिहार के एक नेता उनके चहकने , ट्वीट करने का मजाक उड़ाते लेकिन आज उन्होने भी चहकने का रास्ता पसंद किया और मेरे आने पर उन्होने ट्वीट किया कि 14 महीने बाद बिहार आने पर स्वागत है पीएम ने रैली में आए लोगों के सामने नीतीश के स्वागत का जवाब बड़े ही गंभीर स्वर में धन्यवाद दिया मोदी ने नीतीश से  अपनी मित्रता जिक्र यूं किया कि अपनो का विहर कितना परेशान करता है अपनों की दूरी कैसी बेचैन बनाती है पीएम मोदी ने मनमोहन से हमला करते हिए कहा कि 10 सालों में एक बार हवाई निरीक्षण करने आए थे लेकिन मोदी की 14 महीने का विरह भी बिहार के मुख्यमंत्री और मोदी के पुराने दोस्त को कितना परेशान करता है ये बात पीएम मोदी बखुबी जानते है और वो मानते है अपनों की दूरी जरा मुश्किल करती है ये बात मोदी शायद इसलिए कह रहे है कि नीतीश के साथ मोदी भी मित्रता चाहते है दोस्ताना चाहते चुनाव में बिहार को जितना चाहते है
रैली में लोगों की भीड़

मोदी ने परिवर्तन रैली में आए लोगों को विश्वास दिलाया कि कि बिहार की जनता चिंता ना करें मोदी अब आ गए है और देश के अच्छे दिन के बाद अब बिहार के भी अच्छे दिन आएंगे पीएम मोदी के कृषी मंत्री राधामोहन सिंह भी मानते है देश के बाद बिहार के अच्छे दिन जल्द आएंगे
मोदी के संबोधन के साथ ही रैली में आए लोगों के उत्साह बढ़ रहा था मोदी-मोदी के नारे लग रहे थे लोग खुश थे और पीएम उससे ज्यादा  बोल रहे थे जितना मोदी मन में सोच कर आए थे रैली में आए लोगों से मोदी उनके मन की बात जान रहे थे पूंछ रहे थे क्या बिहार में बदलाव में होना चाहिए, हालात बदलना चाहिए, स्थिति बदलना चाहिए, अंधेरे से उजाला होना चाहिए, रोजगार मिलना चाहिए, गुंडागर्दी साफ होनी चाहिए लोगों ने मोदी के मन की बात कही लोगों ने जोर जोर से कहा मोदी मोदी बदलाव होना चाहिए बिहार की जनता को मोदी ने भरोसा दिलाया कि 60  महीने में मैं आपके सपनों को पूरा करुंगा वो सारे सपने मैं साकार करुंगा जो 14 करोड़ बिहारियों ने देखा..बीजेपी से गठबंधन तोड़ने पर मोदी ने अपने पुराने मित्र नीतीश पर निशाना साधते हुए बोले कि मोदी इतना बुरा था तो एक कमरे के आकर एक चांटा मार देते मेरा गला घोंट देते इन बयानों में मोदी की नीतीश से मित्रता मोह दिख रही थी पीएम ने रैली में लोगों से अपील की एक बार हमे सरकार बनाने का मौका दे देश के प्रधान सेवक ने इस बात का भी जिक्र किया कि मेरी सरकार में बड़े विभाग बिहार के नेताओं के पास है इन बयानों और विभागों का जिक्र करना साफ दिखा रहा था पीएम मोदी आगामी बिहार विधानसभा में बड़े वोट को साधने की कोशिश कर रहे है जनता को लुभाना की कोशिश कर रहे है 


लेकिन प्रधान सेवक ने विभाग बताने से पहले 1998 में अटल जी के सरकार में मंत्रिमंडल को याद करना भूल गए जिसमें जार्ज फर्नाडिस रक्षा मंत्री, यशवंत सिन्हा, वित्त मंत्री, मोदी के पुराने दोस्त नीतीश-रेल मंत्री थे लेकिन आज मोदी के मंत्रिमंडल में ये तीनों मंत्रालय गैर बिहारी नेताओं के पास शायद ये बात मोदी के मन में नहीं आई जो बिहार की जनता को पसंद नहीं आएगी.. लेकिन फिर भी पीएम ये भी बताना नहीं भूले के बिहार के नेता पूरे देश को चला रहा है...लोकसभा चुनाव में भारी बहुमत के लिए मोदी ने बिहार की जनता को शत-शत इन बयानों से पीएम के बिहार के मतदाताओं को बताना की कोशिश की आप विधानसभा चुनाव में बीजेपी की सरकार बनाएं...लोकसभा चुनाव के अपने घोषणाओं का जिक्र करते हुए पीएम ने बोला कि मुझे याद है कि मैंने आपसे वादा किया था उन वादों को पूरा करुंगा रैली में आए लोगों को मोदी का वादा तो याद नही था पीएम ने लोगों को अपना वादा याद दिलाया लेकिन सवाल डेढ़ साल गुजरने के बाद भी मोदी सरकार ने बिहार के लिए सरकार पैकेज क्यों नहीं दिया तो जवाब है संसद सत्र खत्म होने के बाद...बिजली नहीं तो वोट नहीं नीतीश के इस वादे पर पीएम निशाना साधते हुए बोले की बिजली नहीं दी लेकिन वोट मांगने लोगों के पास आए उन्होने बिहार के जनता के साथ धोखा दिया पीएम मोदी ने बिहार की जनता को नीतीश के डीएनए के बारे में बताना नहीं भूले कि नीतीश के राजनीतिक डीएनए में दिक्कत है.