Sunday, 27 March 2016

पहाड़ में ‘प्रेसिडेंट’ रुल

कई दिनों के सियासी उठापटक के बाद आज पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में प्रेसिडेंट रुल मतलब राष्ट्रपति शासन लागू हो गया राज्य में अगली सरकार बनने तक पहाड़ में राष्ट्रपति का राज होगा नाकि किसी राजनीतिक पार्टी का...राज्य में अगले 6 महीने में किसी पार्टी को बहुमत साबित करना होगा या फिर चुनाव होगा..उत्तराखंड में अगले साल 2017 में विधानसभा चुनाव होने है..राज्य के सियासी संकट को लेकर कल प्रधानमंत्री ने आनन-फानन में कैबिनेट की बैठक बुलाई थी माना जा रहा है कि इस बैठक में सरकार ने पहाड़ में प्रेसिडेंट रुल लगाने के लिए सिफारिश किया बैठक के 24 घंटे के अंदर राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हो गया...सरकार के इस प्रस्ताव को राष्ट्रपति ने भी मंजूरी दे दी और 16 साल वाले इस राज्य में पहली बार राष्ट्रपति शासन लग गया...प्रेसिडेंट रुल लागू होने के बाद कांग्रेस ने बीजेपी और पीएम पर पलटवार किया और आरोप लगाया कि लोकतंत्र में बीजेपी को भरोसा नहीं है, बीजेपी को लोकतंत्र पर विश्वास नहीं है...पीएम ने लोकतंत्र की हत्या की हैं...28 मार्च को हरिश रावत की कांग्रेस सरकार को सदन में बहुमत साबित करना था उत्तराखंड विधानसभा के 71 सीटों में 36 कांग्रेस के विधायक हैं जिसमें 9 विधायक कांग्रेस का हाथ छोड़कर बाग़ी हो चुके है ऐसे में कांग्रेस के पास सिर्फ 27 विधायकों का समर्थन है जबकि सरकार बनाने के लिए 36 विधायक जरुरी हैं...बाग़ी विधायक जिन्हे रावत की सरकार राज्य हितैषी नहीं लगती है रावत के मंत्रियों को लगता है कि हरिश रावत की सरकार में भरपुर भ्रष्टचार है जिसको हटाना पहाड़ की पॉलिटिक्स के लिए बेहद जरुरी है...हरिश रावत से पहले इस पहाड़ी प्रदेश के सीएम रह चुके विजय बहुगुणा को रावत की सरकार से भ्रष्टाचार की बू आती है क्योंकि विजय बहुगुणा को हटाकर ही हरिश रावत उत्तराखंड के सीएम बनें थें तो विजय बहुगुणा को भी हरिश रावत से अपनी राजनीतिक हिसाब बराबर करना था...उत्तराखंड के सियासी संकट पर बीजेपी ने भी अपनी राजनीतिक चाल को और तेज कर दिया और इस चाल को तेज करने में हरिश रावत के उस स्टिंग ने तेल का काम किया जिसमें हरिश रावत अपनी सरकार को सही सलामत रखने के लिए अपने सर पर ताज बनाए रखने के लिए बाग़ी विधायकों को खरिदने का काम कर रहे हैं उन विधायकों की बोली लगा रहे हैं जो रावत को छोड़कर राज्य में बीजेपी के साथ जाना चाहते है ताकि उनकी सरकार बची रही हरित प्रदेश में हरिश रावत का राज कायम रहे लेकिन केंद्र की बीजेपी सरकार ने पहाड़ में प्रेसिडेंट रुल लागू करा दिया...इससे पहले अरुणाचाल प्रदेश में जहां बीजेपी ने पहले राष्ट्रपति शासन लगाया और बाद में अपनी सरकार बनाने में सफल रहीं लेकिन सवाल है कि क्या अरुणाचल प्रदेश के तर्ज पर ही उत्तराखंड में बीजेपी अपनी सरकार बनाना चाहती है क्या मोदी और अमित शाह वाली बीजेपी राष्ट्रपति से सहारे ही किसी राज्य में राज करना चाहती है? क्या बीजेपी चुनाव से दूर रहकर सत्ता के करीब जाना चाहती है? क्या बीजेपी ऐसी ही कांग्रेस मुक्त भारत का सपना देख रही है? तो क्या बीजेपी का ऐ सपना भारतीय लोकतंत्र की सेहद के लिए ठीक है? क्या बीजेपी पर कांग्रेस का आरोप सही नहीं कि बीजेपी को लोकतंत्र पर भरोसा नहीं है....?
पीएम नरेंद्र मोदी
राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू होने और अपनी हाथ से सत्ता जाने के बाद हरिश रावत अपने दर्द को दबा नहीं पाएं और मीडिया के सामने अपने सियासी दर्द को सरेआम कर दिया..सरेआम कर दिया बीजेपी और पीएम के उस छलावे को जिसने हरिश रावत को सत्ताहीन बना दिया... जिसने हरिश रावत को सत्ता से बेदखल कर दिया... हरिश रावत ने पीएम मोदी पर हमला करते हुए कहा कि देश के प्रधानमंत्री ने जनता के भरोसा का खुन किया  है, मोदी जी ने हमारे सपनों का खुन किया है राज्य में राष्ट्रपति शासन के लिए पीएम ने राज्यपाल को धमकाया...उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन का कांग्रेस विरोध करेगी।   
हरिश रावत-सीएम-उत्तराखंड
उत्तराखंड के पूर्व सीएम विजय बहुगुणा ने केंद्र के राष्ट्रपति शासन लगाने के इस फैसले का स्वागत किया बीजेपी को बहुगुणा का साथ मिला और संभव होगा कि सरकार बनाने में विजय बहुगुणा बीजेपी का साथ देंगे..बहुगुणा ने रावत सरकार पर संगीन आरोप लगाते हुए बोले की राज्य में अवैध खनन जारी है राज्य में भ्रष्टाचार चरम पर है ऐसे में राष्ट्रपति शासन लगना जरुरी था...बहुगुणा ने आर्टिकल 356 का हवाले देते बोले कि जिस राज्य में सीएम असवैधानिक तरीके से अपनी सरकार बचाने के लिए हर हथकंडे अपना रहा हो जिस राज्य में विधानसभा अध्यक्ष अपने अधिकारों को बेजा प्रयोग कर रहा हो उस राज्य राष्ट्रपति शासन लगना जरुरी था..लेकिन बहुगुणा को ऐभी उम्मीद है कि राज्य में सरकार जल्द ही बनेगी चाहे बहुगुणा सरकार बनाने के लिए बीजेपी का साथ दें। फिलहाल उत्तराखंड विधानसभा निलंबित है भंग नहीं।
विजय बहुगुणा-पूर्व सीएम-उत्तराखंड

      

Wednesday, 2 March 2016

'साहब' को बेल

 बिहार में सीवान के चर्चित दोहरे अपहरणकांड और तेजाब कांड में आजीवन कैद की सजा काट रहे है जेल में बंद...बाहुबली आरजेडी के पूर्व सांसद शहाबुद्दीन को आज पटना हाईकोर्ट ने जमानत दे दी...जस्टिस अंजना प्रकाश की बेंच ने मामले की सुनवाई करने के बाद पूर्व सांसद शहाबुद्दीन को जमनात देने का फैसला सुनाया
पिछले साल 11 दिसंबर 2015 को स्पेशल कोर्ट के एडिशनल जज ने शहाबुद्दीन को हत्या, अपहरण और दफा 120बी के तहत पूर्व सांसद को उम्रकैंद की सजा सुनाया गया थी..जब शाहाबुद्दीन को उम्रकैद की सजा हुई की व्यापारी चंदाबाबू को लगा कि हमारे बेटों के हत्यारें को कानून ने सजा दी, मेरे बेटों को इंसाफ मिला..नीतीश के बिहार के कानून का राज है लेकिन आज जब पटना हाईकोर्ट ने शहाबुद्दीन को जमानत देने का फैसला सुनाया तो पीड़ित परिवार टूट गया.. 


चांदबाबू-हत्या कर दी गई बेटों के बांप
छोटे से एक कमरे अपनी जिंदगी काट रहे है दो बेटों के हत्या हो जाने का दर्द झेल रहे बुढ़े मां-बाप के लिए समझ पाने बड़ा मुश्किल था जब उन्हे इस बात की खबर मिली की उनके बेटे के हत्यारे शहाबुद्दीन को पटना उच्च न्यायालय ने बेल दे दिया है..न्यायालय की नजरों में शहाबुद्दीन दोषमुक्त हो गया है...पूर्व सांसद के बेल को मृतक के पिता ने गलत करार दिया है दो बेटों के मौत का दर्द झेल रहे बांप ने कहा कि शहाबुद्दीन को बेल नहीं बल्कि फांसी होनी चाहिए थी, उनके बेटों को मौत की निंद सुलाने वाले को मौत की सजा मिलनी चाहिए थी..बांप का दर्द समाज को लेकर भी था इस बेल से समाज को गलत संदेश जाएगा बुढ़े बांप को गरीब होने का भी दर्द है की उसके पास पैसे नहीं वो कैसे क्या करेगा इस बुढ़े बांप को कुछ समझ नहीं आ रहा है, बुढ़ी मां को भी इस बात का दर्द है जो निचली अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है उसे कैसे बदल दिया गया मेरे तीन बेटों के हत्यारों को केसै छोड़ दिया गया है..
हत्या कर दी गई लड़को की मां
पूर्व सांसद शहाबुद्दीन ने 12 साल पहले 16 अगस्त 2004  में एक व्यापारी चंदा बाबू के के तीन बेटों को अपहरण कर लिया था बाद में दो बेटों सतीश कुमार, गिरीश कुमार का शव तेजाब से जला पाया गया था जबकी चांद बाबू का तीसरा बेटा राजीव रौशन वहां से भागकर अपनी जान को बचाने में कामयाब रहा था...दो युवकों के हत्या का गवाह और चांद बाबू का तीसरा बेटे राजीव रौशन की हत्या 2014 में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
शहाबुद्दाीन-फाईल फोटो



एनकाउंटर 'चक्रव्यूह' में फंसे चिदांबरम

आतंकी इशरत जहां एकाउंटर मामले में पूर्व गृह मंत्री पी चिदांबरम पर अधिकारियों पर दबाब बनाकर हलफनामा बदलवाने का मामला सामने आया है...एनकाउंटर 'चक्रव्यूह' में पी चिदांबरम फंसते नजर आ रहे है कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही है...देश के पूर्व गृह सचिव जीके पिल्लई ने दावा किया  हेै कि यूपीए सरकार में इशरत जहां को लेकर हलफनामा में बदलाव सरकार के दबाब में किया गया था..  पिल्लई ने कहा कि इशरत मामले में हलफनामा चिदांबरम खुद बोलकर लिखवा रहे थे इसलिए किसी अधिकारी ने देश के पूर्व गृहमंत्री का विरोध नहीं किया. तो क्या चिदांबरम अधिकारियों को वैसे ही लिखवा रहे थे, जैसे कोई मास्टर पहली क्लास के बच्चे को बोल-बोल कर लिखता वाता है कि बच्चा लिख 'इ' से 'इमली'  होता है और 'ब' से 'बेल' होता है... मास्टर का दबाव बच्चों पर उनके उज्जल भविष्य से लिए होता है. लेकिन चिदांबरम का अधिकारियों पर दबाव देश को बर्बाद करने वाले आतंकियों के लिए था..चिदांबरम लिखवा रहे थे और अधिकारी लिख रहे थे 'इ' से 'इशरत' ब से 'बेगुनाह' है....

पी-चिदांबरम-फाईल


 पिल्लई ने दावा  कि एनकाउंटर को लेकर जो हलफनामा अधिकारियों ने बनाया था उसमें इसबात का जिक्र था कि इशरत जहां के संबंध आतंकियों के साथ थे और इशरत जहां लश्कर-ए-तयैबा की फिदाय़ीन हमलवार थी जो गुजरात के तत्कालीन सीएम और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या के साजिश में शामिल थी...गृह विभाग के ही एक अधिकारी आरवीएस मणी ने नया खुलासा करते हुए कहा कि मनमोहन सरकार के वक्त पर उन पर इस बात का दबाव था कि हलफनामें में इशरत को आतंकी न बताया जाए... इस बात के लिए मणी को सिगरेट से जलाया गया , सीबीआई उनका पीछा करती थी..मणी को मनमोहन की सरकार अपने मुताबिक चलाने चाहती थी, मनमोहन के मंत्री पी चिदांबरम अधिकारियों को परेशान करते थे, उनको सिगरेट से जलवाते थे अपने मनमाफिक हलफनामा बनवाना चाहते थे ....सवाल उठता है की गृह विभाग के एक बड़े अधिकारी को जलाने वाले अधिकारियों का आका कौन है, कौन उसे मणि को जलाने के लिए आदेश देता था..मणी के आरोपों से देश की सियासत में कांग्रेस की कलई खुल गई है कि कैसे कांग्रेस ने सियासी फायदे के लिए एक आतंकी को आतंकी नहीं बताने के लिए किस तरीके से गृह विभाग के अधिकारियों के भयभीत किया... इशरत जहां मुठभेड़ को लेकर यूपीए सरकार ने एक नहीं दो-दो हलफनामा पेश किया था 6 अगस्त 2009 को पहले हलफनामें में इशरत को आतंकी बताया गया था जबकि 30 सितंबर 2009 दूसरे हलफनामें में यूपीए सरकार ने अपने  पहले ही हलफनामें को गलत बताते हुए इशरत को आंतकी बताने से ही इनकार कर दिया था..सवाल उठता है क्यों सरकार के अलग-अलग दो हलफनामों में इशरत को आतंकी बताने से लेकर इशरत को आतंकी नहीं बताने तक का जिक्र किया गया..आखिर सरकार ने देश को क्यों नहीं बताया कि इशरत आतंकी थी आखिर एक आतंकी पर मनमोहन के मंत्री क्यो मोहित थे ...इशरत  आतंकी थी उसे पी चिदांबरम क्यो बचाने चाहते थे ...अधिकारियों के खुलासे के बाद पी चिदांबरम ने बताया कि देश के गृह मंत्री रहते हुए इशरत को आतंकी न बताने वाला हलफनामा सरकार ने इसलिए बनाया कि वो कानून के सामने सरकार का सही पक्ष रख सके...वो बता सके कि इशरत आतंकी नही थी...चिदांबरम ने पिल्लई की नीयत पर ही सवाल उठा दिया,  2004 में गुजरात पुलिस ने  4 आतंकियों के साथ इशरत जहां का अहमदाबाद में एनकाउंटर किया था.....पुलिस का दावा था इशरत के लश्कर-ए-ताइबा से संबंध थे जो तत्तकालीन गुजरात के सीएम और देश के प्रधानमंत्री की हत्या करने आई थी यूपीए सरकार के वक्त मुबई हमले का मुख्य आरोपी डेविड हेडली ने 2010 में एनआईए से कहा  की इशरत लश्कर-ए-ताइबा की आतंकी है..इस पर कांग्रेस की  अलग राय है और  आज भी कांग्रेस इशरत एनकाउंटर को फर्जी एनकाउंटर बता रही है... 2004 में इस एनकाउंटर को कांग्रेज ने फर्जी एनकाउंटर बताया था और आरोप लगाया था कि मोदी के इशारे पर इशरत को आतंकी बताकर मरवाया गया है कांग्रेस ने इशरत के सहारे सियासी कमाई भी खुब किया ....मोदी को बदनाम करने की कोशिश कांग्रेस ने खुब की लेकिन कांग्रेस आज उसी बदनामी की चौखट पर खड़ी है जिस चौखट पर 12 साल पहले कांग्रेस ने मोदी को खड़ा किया था..जिस इशरत को कांग्रेस ने मोदी के खिलाफ सियासी ढाल बनाया था, आज वही इशरत बीजेपी और मोदी के लिए कांग्रेस के खिलाफ सियासी बाण बन चुकी है जिसकी चोट से कांग्रेस फिलहाल बचती नजर नहीं आ रही है...



 12 साल बाद इशरत जहां एनकाउंटर का सियासी जहां एक बार फिर गरम हो गया..बीजेपी संसद से सड़क तक हल्ला बोल के मूड में है इस मुद्दे पर बीजेपी कांग्रेस का सियासी एनकाउंटर की तैयारी में है... इशरत जहां के एनकाउंटर को लेकर सियासी जहां का पारा खुब चढ़ा इस मसले को लेकर कांग्रेस ने बीजेपी का सियासी एनकाउंटर भी खुब किया आतंकी इशरत को कई पार्टियों ने अपनी बेटी बताया तो किसी ने इशरत को शहीद बताया, लेकिन सियासत के लिए आतंक को संरक्षण देना देश के सुरक्षा के साथ बाड़ा घात है....गृह विभाग के अधिकारियों ने चिदांबरम की पोल खोल दी है तो क्या कांग्रेस सियासी फायदे के लिए मोदी को दोषी साबित करने के लिए बीजेपी को मुस्लिम विरोधी और अपने को मुस्लिम हितैषी बताने कि लिए देश के सुरक्षा के साथ समझौता भी कर सकती है,  12 साल पहले इशरत का एनकाउंटर हुआ था तो क्या अब अधिकारियों के खुलासे के बाद देश के पूर्व गृह मंत्री पी चिदांबरम का  सियासी एनकाउंटर होगा।

Friday, 11 December 2015

बाहुबली शहाबुद्दीन को सजा

बिहार के सीवान में चर्चित तेजाब हत्या कांड में आरजेडी के पूर्व सांसद और बिहार के सियासत में बाहुबली नेता शहाबुद्दीन को तीन युवकों के हत्या के आरोप में आज फैसला आया फैसले में कोर्ट  ने शहाबुद्दीन को दोषी करार देते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई है ये सजा सहाबुद्दीन को स्पेशल कोर्ट की ओर सुनाया गया है... स्पेशल कोर्ट के अडिशनल जिला जज अजय कुमार ने शहाबुद्दीन समेत 3 लोगों को हत्या,अपहरण, सबूतों को नष्ट करने और दफा 120B के तहत ये सजा सुनाई है..शहाबुद्दीन को सभी मामलों में सजा एक साथ चलेगी...एक दशक पहले बिहार के सीवान में 16 अगस्त 2004 को दुकान से एक व्यापारी चंदा बाबू के तीन बेटों को सहाबुद्दीन के तीन लोगों ने अपहरण कर लिया था बाद में दो बेटों सतीश कुमार, गिरीश कुमार का शव तेजाब से जला पाया गया था जबकी चांद बाबू का तीसरा बेटा राजीव रौशन वहां से भागकर अपनी जान को बचाने में कामयाब रहा..पीड़ित की मां कलावती देवी ने अपने बेटों के हत्या के मामले में शहाबुद्दीन और उनके तीन वफादारों पर हत्या का मामला दर्ज कराई थी...

फाईल-कोर्ट

इस पूरे मामले में जिस दिन और जिस समय दो युवकों की हत्या हुई उस दिन बाहुबली पूर्व आरजेडी सांसद सीवान के जेल में बंद थे ऐसा जेल प्रशासन का दावा है लेकिन पीड़ित परिवार और मृतकों के पिता की माने तो जब उनके बेटों को बेरहमी से तेजाब से नहलाकर  मारा जा रहा था उस वक्त आरजेडी सांसद और दो युवकों का हत्यारा सांसद शहाबुद्दीन वही मौजूद थे और चंद्रकेश्वर प्रसाद उर्फ चंदा बाबू के बेटों की मौत का तमासा देख रहा थे कि कोई इंसान तेजाब से जलकर कैसे तिलतिला कर मरता है.. लेकिन इस फैसले के बाद साफ हो गया कि शहाबुद्दीन के पाप के साथ प्रशासन भी था और सांसद साहब को संरक्षण देने की पूरी जुगत में था... 11 साल बाद 9 दिसंबर 2015 को जब सीवान के चर्चित तेजाब कांड का फैसला आया तो जेल में बंद शहाबुद्दीन के जेहन में 11 साल पहले तेजाब कांड की शर्मनाक यादे ताजा हो गई... बाहुबल के नाम पर अपनी सियासत को जिंदा रखना वाले शहाबुद्दीन को करारा झटका लगा शहाबुद्दीन को कोर्ट ने दोषी करार देते हुए तय किया कि 11 दिसंबर 2015 को शहाबुद्दीन के सजा का एलान होगा...जिला न्यायलय ने 11 दिसंबर को शहाबुद्दीन को उम्र कैद की सजा सुना दी ...कभी संसद में बैठकर देश के कानून बनाने और कानून तोड़ने वालों पर चर्चा करने वाले पूर्व सांसद शहाबुद्दीन अब खुली हवा में सांस नहीं ले पाएंगे...शहाबुद्दीन को उम्र कैद की सजा हो गई, लोगों को न्याय से दूर रखने वाले सांसद के साथ न्यायपालिका ने न्याय कर दिया है दो युवकों की हत्या के आरोप में दोषी करार दिया है...दो युवकों के हत्या का गवाह और चांद बाबू का तीसरा बेटा राजीव रौशन की हत्या 2014 में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

फाईल-शहाबुद्दीन

11साल बाद जब जिला जज ने तेजाब कांड में शहाबुद्दीन को उम्रकैद की सजा सुनाई तो पीड़ित परिवार का न्यायपालिका में भरोसा बढ़ गया...फैसले के बाद  मृतक के पिता चंदा बाबू ने कहा कि हम इस फैसला का सम्मान करते है लेकिन ये फैसला भी कम है क्योंकि हमे अभी भी शहाबुद्दीन का भय है..जिला न्यायालय के इस फैसले के बाद शहाबुद्दीन की पत्नी और आरजेडी के टिकट पर कई बार चुनाव लड़ चुकी हिना शहाब ने कहा कि मैं इस फैसले को मैं उच्च न्यायालय में चुनौति दूंगी शहाबुद्दीन की पत्नी शहाब को जिला जज का न्याय मंजूर नहीं अपने पति को न्याय दिलाने के सहाब कई न्यायालयों का दरवाजा खटखटाएंगी जिससे शायद को कोई चमत्कार हो जाए और शहाब के पति शहाबुद्दीन की सजा शायद कम हो जाए...
फाईल-हीना साहाब (शहाबुद्दीन की पत्नी)


   

Saturday, 14 November 2015

पेरिस आतंकी हमले में 160 की मौत


फ्रांस की राजधानी पेरिस में अबतक का सबसे बड़ा आतंकी हमला हुआ है पेरिस के 6 जगहों पर एक साथ आतंकी हमला हुआ...देखते-देखते पूरा फ्रांस दहल गया और पेरिस में दहशत फैल गया दुनिया के लिए तो 14 नवंबर का सबेरा रौशनी लाया लेकिन यूरोप के इस देश फ्रांस में अंधेरा छा गया...आतंक के परछाई से पेरिस में 14 नवंबर का दिन काला दिन साबित हुआ...दुनिया के लिए फ्राइडे पेरिस के लिए ब्लैक फ्राइडे बन गया...इस क्रूर आतंकी हमले में 160 लोगों की मौत हो गई है..160 परिवारों में मातम में छा गया है कई बच्चे आनाथ हो गए है कई औरते बेरंग हो गई है... लोग सड़को पर तड़पते नजर आए...सैकड़ो लोग अस्पताल में भर्ती हो गए चमचमाते इस शहर में अचानक अंधेरा छा गया है पेरिस की गलिया खून से लाल हो गई है और फ्रांस की फिजा गमगीन हो गई पूरी दुनिया में बेचैनी छा गई कि फ्रांस में आतंकी हमला हुआ है...

इस बर्बर आतंकी हमले की जिम्मेदारी भी उस ISIS ने ली है जिसने पूरी दुनिया में आतंक फैला रखा है आय दिन ISIS का क्रूर चेहरा हम देखते है आतंक की फैक्ट्री  ISIS ने इस बार फ्रांस की फिजा को गमगीन कर दिया है... हमलावर  हमला करते वक्त सीरिया का बदला लेने की बात कर कर रहे है..सीरिया में पिछले कुछ महीनों से ISIS ने कत्लेआम मचा रखा है।

पेरिस की पुलिस ने आतंकियों को उनकी औकात दिखाते हुए सेना ने 8 हमलावरों को मार गिराया पुलिस ने अपना काम बखूबी किया और आतंकियों को मार उनके आकाओं को बता कि आतंकवाद को फ्रांस और दुनिया कभी बर्दास्त नहीं करेगी..जो दहशतदगर्दी को बढ़ावा देता उसे दुनिया मार देगी.. ISIS ने इस हमले को अपने सर नाम किया है अब तक ISIS को किसी का सर कलम करते उसका क्रूर चेहरा हमने देखा था लेकिन आज किसी ने उसका सर कलम किया है...पिछले कई महीने में हमने और आपने ISIS के कई वीडियों को देखा होगा जिसमें किसी ना किसी का ISIS ने सिर कलम किया है या किसी को जिंदा जला दिया है।




पेरिस हमला फ्रांस में इस साल का तीसरा आतंकी हमला है साल के शुरुआत में जनवरी महीने में शर्ली एब्दो मैगजीन ने मुहम्मद का कार्टून छापा था जो अल्ला के नाम पर आतंकवाद को जिंदा रखने वालों को रास नहीं आया और मैगजीन ऑफिस पर हमला कर दिया जिसमें 12 लोगों की मौत हो गई इसमें एक पत्रकार भी मारा गया था दूसरा आतंकी हमला जून 2015 में हुआ सेंट क्वेंटिन फैलेवर में गैस फैक्ट्री पर हमला इस हमले  आतंकी ने एक शख्स का सिर कलम किया था और आज तीसरा हमला जिसमें 160 लोगों की जान चली गई...पेरिस में हुए इस आतंकी हमले की निंदा पूरी दुनिया ने की है, अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हमले की निंदा की है पीएम मोदी विदेश दौरे पर है आज ही (14 नवंबर) को G-20 सम्मेलन में शामिल होंगे...लेकिन इस हमले के बाद फ्रांस के राष्ट्रपति फांनकोइस होलांदो ने सम्मेलन का कार्यक्रम को रद्द कर दिया।

Sunday, 8 November 2015

बीजेपी की शर्म 'नाक' हार


बिहार विधानसभा के 243 सीटों पर हुए चुनाव का परिणाम आ गया परिणाम में बीजेपी की हार हुई है बिहार में बीजेपी मुंह के बल गिर गई है और ऐसी गिरी की चाह कर भी बीजेपी अपने आप को बिहार में नहीं खड़ा कर पाएगी...और नहीं सही मुंह से बिहार की जनता से बात कर पाएगी की उसे बिहार की जनता ने क्यों नकार दिया.. क्यों प्रधान सेवक को बिहार की जनता सेवा का मौका नहीं दिया...क्यों बिहार की जनता ने बीजेपी को बिहार ने बाहर कर दिया... क्यों बिहार की जनता को भगवा पार्टी पर भरोसा नहीं हुआ...बिहार में बीजेपी तीसरे नंबर की पार्टी बन गई है दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी बिहार में थर्ड क्लास की पार्टी बन गई है ज्य़ादा सदस्यों वाली पार्टी बीजेपी को जंगलराज का तमका लिए आरजेडी ने बिहार के चुनाव में हरा दिया...लोकतंत्र के पर्व में बीजेपी हार गई है और महागठबंधन का महाविजय हुआ... 243 सीटों वाली विधानसभा में महागठबंधन के 178 महारथियों ने महाविजय हासिल किया...और बीजेपी की करारी हार हुई है..2015 में बीजेपी की दूसरी हार है इससे पहले साल के शुरुआत में दिल्ली चुनाव में बीजेपी को आम आदमी पार्टी ने बूरी तरह हराया 70 में बीजेपी केवल 3 सीट ही जीत पाई...और साल के आखिर में बिहार में महागठबंधन ने बीजेपी को हरा दिया... 160 सीटों पर लड़ने वाली पार्टी 60 सीट भी नहीं जीत पाई...बीजेपी के सहयोगी दल रामविलास, रालोसपा, हम तो इतने भी सहयोग नहीं कर पाए की बिहार में बीजेपी सैंचुरी भी लगा सके...लेकिन नीतीश ने हैट्रिक लगाते हुए बीजेपी को टूर्नामेंट से ही बाहर कर दिया...



सवाल उठता है बिहार में बीजेपी की बूरी हार किसकी वजह..इस हार की क्या वजहें है ये तो एसी कमरे में बैठकर बीजेपी के मठाधीस मंथन करेंगे ...बोलेंगे जनता के फैसले का सम्मान करते हैं, सोचेंगे अगला चुनाव कैसे जीते और कुछ दिन बाद दिल्ली की तरह बिहार चुनाव को भूल कर बीजेपी के नेता बयानबाजी शुरु कर देंगे...लेकिन बिहार में बीजेपी की हार पार्टी और पीएम के लिए चिंता का विषय है और इस हार पर पार्टी में हाहाकार भी होगा और पार्टी में हार का पोस्टमार्टम भी होगा...आखिर बिहार में बीजेपी क्यों नहीं नीतीश, लालू, और कांग्रेस को हरा पाई...क्यों बीजेपी कांग्रेस, लालू और नीतीश के चुनाव रणनीति को नहीं भेद पाई, क्या बीजेपी के चाणक्य अमित शाह नीतीश और लालू के राजनीति के रणनीति को नहीं समझ पाएं..बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी का चेहरा पीएम मोदी थे महागठबंधन का मुखौता नीतीश कुमार थे... बिहार में बीजेपी ने पूरा चुनाव पीएम मोदी के विकास के नाम पर लड़ा तो महागठबंधन में शामिल लालू ने नीतीश को जनता की नजरों में सुशासन बाबू की तरह उतारा और पीएम मोदी को ललकारा...बिहार का चुनाव मुद्दाहीन था वहां न विकास की बात होती थी नहीं चुनावी रैलियों में सुशासन की चर्चा...वहां तो सिर्फ व्यक्तिगत चुनावी मुद्दा था कौन नरभक्षी था तो बह्मपीसाच था, चाराचोर था...चुनावी रैलीयों में विकास की बातें कम आरक्षण देनें और आरक्षण के लिए जी-जान देने की बातें होती थी...आगड़े-पीछड़े की बात होती थी कौन यादव है कौन पीछड़े इसके दावे होते थे...


लालू जानते थे कि वो अगड़े-पीछड़े की राजनीति करके ही अपने सियासी लालटेन को चमका सकते है और वो ही लालू ने किया...बिहार में लालू MY समीकरण के साथ अपने राजनीति को बढ़ाते रहे है लालू जानते थे अगर वो अगड़े-पीछड़े की राजनीति नहीं करेगें तो उनकी राजनीति की लालटेन बुझ जाएगी और नीतीश लालू के साथ नहीं  मिलगे तो नीतीश का सियासी तीर खाली ही रह जाएगा...तो लालू और नीतीश एक साथ हो लिए... लालू के लालटेन में रौशनी आ गई, लालू ने लालटेन से अपने राजनीतिक जीवन को उजाला कर दिया और नीतीश ने पुराने दोस्त और अब दुशमन बीजेपी को अपने तीर ने निशाना लगाकर बिहार में बीजेपी को चारों खाने चित कर दिया...



बिहार का चुनाव बीजेपी और महागठबंधन के लिए सरकार बनाने से ज्यादा साख का सवाल था इस चुनाव में सीएम नीतीश और पीएम मोदी की प्रतिष्ठा दांव पर थी... परिणाम में पीएम की प्रतिष्ठा पानी-पानी हो गया और बिहार की जनता ने पीएम की प्रतिष्ठा से ज्यादा सीएम का सम्मान किया... बिहार विधानसभा चुनाव में डीएनए, आरक्षण, बीफ जैसे मुद्दे मुख्य चुनावी मुद्दे रहे और इसी मुद्दे को महागठबंधन ने भुनाया...आरक्षण की समीक्षा हो भागवत के इस बयान के बाद पिछड़ों में भय हुआ कि बीजेपी आई तो आरक्षण छीन लेगी... लालू ने इस मुद्दे को खुब भुनाया और इस कदर भुनाया कि पिछड़ा वर्ग लालू के जाल में फंस गया...आरक्षण छीन जाने का पिछड़ों में बने इस भय को बीजेपी नहीं निकाल सकी लेकिन बिहार की जनता ने बीजेपी को बिहार की राजनीति से निकाल दिया..बिहार में हुई बीजेपी की हार का प्रभाव आने वाले राज्यों पर पड़ेगा 2016 में बंगाल सहित पांच राज्यों में चुनाव है इसलिए बीजेपी को सोचना होगा और एसी कमरों से लेकर जनता के बीच जाकर जनादेश पाना होगा और बिहार में हुई शर्मनाक हार पर सोचना भी होगा।


Sunday, 11 October 2015

बिहार विधानसभा चुनाव 2015

मतदान तारीख--12 अक्टूबर
10 जिलों की 49 सीटों पर वोटिंग
समस्तीपुर- कल्याणपुर (एससी), वारिसपुर, समस्तीपुर, उजियारपुर, मोरवा, सरायरंज, मोहीउद्दीन नगर, विभूतीपुर , रोसड़ा (एससी), हसनपुर , 10 सीट-136 प्रत्य़ाशी
बेगूसराय-चेरियाबरियार, तेघड़ा, बछवाड़ा, मटिहानी, साहेबपुरकमाल, बेगूसराय, बखरी, 7 सीट -68 प्रत्याशी
खगड़िया-अलौली, खगड़िया, बेलदौर, परबत्ता, 4 सीट-48 प्रत्याशी
भागलपुर-बिहपुर, गोपालपुर, पीरपैंती, कहलगांव, भागलपुर, सुल्तानगंज, नाथनगर, सीट-7 प्रत्याशी 87
बांका-अमरपुर, बांका, धुरैया, कटोरिया, बेलहर, 5 सीट-53 प्रत्याशी
मुंगेर-तारापुर, मुंगेर जमालपुर, 3 सीट-39 प्रत्याशी
लखीसराय-सूर्यागढ़ा, लकीसराय, 2 सीट-26 प्रत्याशी
शेखपूरा-, शेखपुरा, बरबीघा, 2 सीट-27 प्रत्याशी
नवादा-रजौली (एससी), हिसुआ, नवादा, गोविंदपुर, वारसलिगंज, 5 सीट-49 प्रत्याशी
जमुई-सिकंदर, जमुई, चकई, झांझा, 4 सीट-50 प्रत्याशी

कुल 49 सीट 583 प्रत्याशी
पहले चरण के लिए 583 प्रत्याशी
49 सीटों पर मतदाताओं की संख्या 1 करोड़, 35 लाख, 35 हजार, 586
पुरुष मतदाता-72 लाख 27 हजार 835
महिला मतदाता-63 लाख 7 बजार 345
थर्ड जेंडर मतदाता-406
मतदान केंद्र-12 हजार 686
मतदान भवन-9301
49 सीट के लिए 1 लाख 20 हजार पारा मिलिट्री और बिहार पुलिस तैनात
मतदान केंद्रों पारा मिलिट्री की तैनाती, और पेट्रोलिंग में बिहार पुलिस
85-90 हजार सिविल अधिकारी की तैनाती
फाइल फोटो

583 प्रत्याशियों में 174 (30 फीसदी) आपराधिक मामले दर्ज
174 में से 130(22 फीसदी) प्रत्याशियों पर किडनैपिंग, मर्डर, हत्या की कोशिश, महिलाओं के प्रति अपराध जैसे गंभीर मामले दर्ज
16 प्रत्याशियों पर IPC की धारा 302 के मामले दर्ज
नवादा जिलें वारसलिगंज से जेडीयू के प्रत्याशी प्रदीप कुमार पर हत्या से जुड़े 4 केस दर्ज
307 प्रत्याशियों पर IPC 307 के तहत मामला दर्ज
BSP का एक प्रत्याशी, BJP के एक, JDU के 3, JAP के 1 और निर्दलीय के 1 प्रत्याशी पर हत्या की कोशिश के मामले दर्ज
11 प्रत्याशियों पर महिलाओ से जुड़े आपराधिक मामले दर्ज
 
फाइल फोटो
संपत्ति
583 में से 146 (25 फीसदी) प्रत्याशी करोड़पति
पहले चरण के लिए 583 प्रत्याशियों में से औसतन संपत्ति 1.44 करोड़

सबसे ज्यादा संपत्ति वाले उम्मीदवार
वारिसनगर सीट से निर्दलीय विनोद कुमार सिंह 74, 73, 83, 190
खगड़िया से जेडीयू की पूनम देवी यादव 41,34,45,969
भागलपुर से कांग्रेस के अजीत कुमार 40,57,35,981

सबसे कम संपत्ति वाले उम्मीदवार
बखरी से भारतीय जनहित दल के सुरेश सादा-जीरों
हिसुआ से मूलनिवासी समाज पार्टी के प्रदीप राजबंशी --जीरों
बरबीघा से निर्दलीय योगेश्वर मांझी 1000 रु की संप्त्ति( आयोग के अनुसार इन्होने पूरी संपत्ती की डिटेल एफीडेविट में नहीं दिया

जिन प्रत्याशियों ने आयकर डिटेल नहीं दिया

अलौली से बहुजन मुक्ति पार्टी के उदय प्रकाश सादा कुल संपत्ति 10, 30,70, 500

जमुई से किसान अल्पसंख्यक मोर्चा के बलदेव प्रसाद भगत कुल संपत्ति 7,16,05, 559

लखीसराय से जेडीयू के रामानंद मंडल 2,40,66,100

पार्टी में आपराधिक प्रत्याशी
BSP के 41 में 8-20 फीसदी

BJP के 27 में14-52 फीसदी

CPI के 25 में 14-56 फीसदी

JDU के 24 में 44 46 फीसदी

सपा के 18 में 9-50 फीसदी

आरजेडी में 17 में 8-47 फीसदी

जेएपी में 16 में 9-56 फीसदी

एलजेपी में 13 में 8-62 फीसदी

कांग्रेस में 8 में 6-75 फीसदी

आरएलएसपी में 6 में 4-67 फीसदी

हम में 3 में 2 67 फीसदी

पार्टी में करोड़पति उम्मीदवार

जेडीयू में 24 में 19-79 फीसदी

बीजेपी में 27 में 18-67 फीसदी

आरजेडी में 17 में 11-68 फीसदी

एलजेपी में 13 में 8-62 फीसदी

कांग्रेस में 8 में 6-75 फीसदी

जेएपी में 16 में 5-31 फीसदी

टॉप 10 ज्यादा संपत्ति वाले प्रत्याशी

वारिसनगर सीट से निर्दलीय विनोद कुमार सिंह 74, 73, 83, 190
खगड़िया से जेडीयू की पूनम देवी यादव 41,34,45,969
भागलपुर से कांग्रेस के अजीत कुमार 40,57,35,981
सिकंदरा से बीएसपी की रेखा देवी 39, 03,05,000
झांझा से किसान अल्पसंख्यक मोर्चा के उमाशंकर भगत  37,8812,596
तेघड़ा से आरजेडी के बीरेंद्र कुमार 19,0674,731
बांका से बीएसपी के अजीत कुमार-17,01,26,748
हिसुआ से जेडीयू के कौशल यादव 16,14,86,483
गोविंदपुर से कांग्रेस की पूर्णिया यादव 16,14,86,183
लखीसराय से बीजेपी के विजय कुमार सिन्हा 15,64, 10,626


टॉप 10 कम संपत्ति वाले प्रत्याशी

बखरी से भारतीय जनहित दल के सुरेश सादा-जीरों
हिसुआ से मूलनिवासी समाज पार्टी के प्रदीप राजबंशी --जीरों
बरबीघा से निर्दलीय योगेश्वर मांझी 1000 रु की संप्त्ति( आयोग के अनुसार इन्होने पूरी संपत्ती की डिटेल एफीडेविट में नहीं दिया

हिसुआ से बीएसपी के लव कुमार सिंह 2500 रु
बिहपुर से निर्दलीय सुमन कुमार 4,000
नाथनगर से गरीब जनता दल के संदीप कुमार शर्मा-5,000
लखीसराय से बीएसपी के मनोज कुमार 15000
मटिहानी से बहुजन मुक्ति पार्टी के रणवीर कुमार 15,300
बेगूसराय ने निर्दलीय अमरजीत शाह 15,500

बांका से निर्दलीय राजेंद्र राय 15,500